finance ⏱️ 17 मिनट 📅 2026-10-07T11:00:00+05:30

Personal Loan Foreclosure & Pre-Payment Charges 2026: RBI के नए नियम, 0% पेनल्टी, NOC व ₹5,000 प्रतिदिन हर्जाना गाइड

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CA विनित अग्रवाल
वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट व बैंकिंग वित्तीय सलाहकार

बैंकिंग नियमों, लोन फोरक्लोजर, आरबीआई गाइडलाइन्स और वित्तीय विवाद समाधान पर 16 वर्षों का अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI Pre-payment Directions) के नियमों के अनुसार, किसी भी व्यक्तिगत उधारकर्ता (Individual Borrower) द्वारा लिए गए फ्लोटिंग ब्याज दर वाले लोन पर बैंक या एनबीएफसी कोई भी फोरक्लोजर या प्री-पेमेंट चार्ज नहीं वसूल सकते। इसके अतिरिक्त, यदि लोन पूरा चुकता होने के 30 दिनों के भीतर बैंक सभी मूल दस्तावेज और एनओसी (NOC) नहीं लौटाता, तो बैंक को ग्राहक को ₹5,000 प्रतिदिन का हर्जाना देना अनिवार्य है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • 0% फोरक्लोजर पेनल्टी: व्यक्तिगत नाम से लिए गए फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन, होम लोन या एमएसएमई लोन पर प्री-पेमेंट चार्ज पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
  • पेनाल्टी इंटरेस्ट पर सख्त रोक: ईएमआई बाउंस होने पर बैंक अब ब्याज पर ब्याज (कंपाउंडिंग) नहीं लगा सकते, केवल पारदर्शी और उचित पेनाल्टी चार्ज ही ले सकते हैं।
  • 30 दिन में मूल दस्तावेज नियम: लोन क्लोजर के 30 दिनों के भीतर यदि बैंक आपके मूल दस्तावेज या एनओसी नहीं सौंपता, तो ₹5,000 प्रतिदिन का हर्जाना बैंक को देना होगा।
  • आरबीआई लोकपाल सुविधा: यदि कोई बैंक अवैध रूप से 2% से 5% फोरक्लोजर फीस काटता है, तो cms.rbi.org.in पर ऑनलाइन शिकायत करने पर बैंक को ब्याज सहित पूरा पैसा वापस करना होता है।

📑 विषय सूची (Table of Contents)

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बैंकिंग अधिकारों की बड़ी बात: जब किसी आम नागरिक या नौकरीपेशा व्यक्ति को दिवाली का बोनस मिलता है, कोई पैतृक संपत्ति बिकती है या बचत से एकमुश्त पैसा हाथ आता है, तो उसकी पहली स्वाभाविक इच्छा होती है कि सिर पर लटके 14% से 18% के महंगे पर्सनल लोन को तुरंत चुकाकर खत्म कर दिया जाए। लेकिन जब ग्राहक बैंक पहुंचता है, तो बैंक कर्मचारी यह कहकर डरा देते हैं कि "अगर आप लोन समय से पहले बंद करेंगे तो बकाया मूलधन पर 3% से 5% फोरक्लोजर पेनल्टी और 18% जीएसटी कटेगा।" आइए जानते हैं कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नए कानून के अनुसार बैंक कब आपसे एक रुपया भी नहीं ले सकते और कैसे आप अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई बचा सकते हैं।

🏛️ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आधिकारिक स्रोत व शिकायत लिंक

बैंक नियमों का उल्लंघन करे तो सीधे केंद्रीय बैंक के पोर्टल पर जाएं:

  • आरबीआई आधिकारिक पोर्टल: www.rbi.org.in
  • बैंकिंग लोकपाल शिकायत पोर्टल (CMS): cms.rbi.org.in
  • केंद्रीय अधिसूचना: Fair Lending Practice – Penal Charges in Loan Accounts & Pre-payment Charges Directions

1. काम की बात: लोन समय से पहले बंद करने पर बैंक चार्ज क्यों नहीं ले सकते?

डायरेक्ट उत्तर: रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बैंकों का काम ग्राहकों को ब्याज के कर्जजाल में बांधकर रखना नहीं है। यदि किसी व्यक्तिगत नागरिक (Individual) ने फ्लोटिंग ब्याज दर पर लोन लिया है और वह अपनी निजी बचत से समय से पहले लोन चुकाना चाहता है, तो बैंक या एनबीएफसी किसी भी प्रकार का प्री-पेमेंट पेनल्टी या फोरक्लोजर चार्ज नहीं वसूल सकते। यह नियम सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक और सभी एनबीएफसी पर समान रूप से लागू होता है।

ज़मीनी हकीकत यह है कि बैंक लोन बेचते समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब कोई ग्राहक 5 साल का लोन 2 साल में ही बंद करने पहुंचता है, तो बैंक का आने वाले 3 साल का भारी ब्याज का मुनाफा बंद हो जाता है। इसी नुकसान की भरपाई के लिए बैंक ग्राहक पर 4% या 5% का जुर्माना ठोक देते थे।

उदाहरण के लिए, यदि आपका ₹5,00,000 का बकाया लोन बचा है, तो 4% पेनल्टी का मतलब सीधे ₹20,000 का जुर्माना और उस पर ₹3,600 का जीएसटी (कुल ₹23,600) बनता है। आरबीआई ने इस अनुचित वसूली को गैरकानूनी घोषित कर दिया है।

2. फ्लोटिंग रेट बनाम फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन: किस पर लगेगी पेनल्टी और किस पर नहीं?

डायरेक्ट उत्तर: आरबीआई के नियम के तहत दो बड़ी शर्तें हैं: पहला, लोन किसी व्यक्तिगत व्यक्ति (Individual) के नाम पर होना चाहिए (किसी कंपनी या फर्म के नाम पर नहीं); दूसरा, लोन 'फ्लोटिंग रेट' (Floating Interest Rate) पर होना चाहिए। यदि आपका लोन फिक्स्ड रेट (Fixed Rate) पर है, तो बैंक अनुबंध के अनुसार 2% से 4% चार्ज ले सकते हैं, बशर्ते यह लोन एग्रीमेंट और की-फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) में पहले से लिखा हो।

अपने लोन एग्रीमेंट में यह जांचने का तरीका:

  • की-फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) देखें: लोन लेते समय बैंक जो 1-2 पेज का सारांश देता है, उसमें ब्याज दर के आगे लिखा होता है: "Floating / Linked to Repo Rate" या "Fixed Rate"।
  • होम लोन और अधिकांश बड़े पर्सनल लोन: भारत में 90% से अधिक होम लोन और बैंकों के पर्सनल लोन रेपो-लिंक्ड फ्लोटिंग रेट पर ही दिए जाते हैं। इन पर 0% फोरक्लोजर फीस का नियम पत्थर की लकीर है।
  • फिक्स्ड रेट पर्सनल लोन और एनबीएफसी: कुछ एनबीएफसी (जैसे बजाज फिनसर्व, टाटा कैपिटल) पर्सनल लोन फिक्स्ड रेट पर देते हैं। यदि आपका लोन फिक्स्ड है, तो भी पहले 12 महीने पूरे होने के बाद कई बैंक केवल 2% या पार्ट-पेमेंट पर शून्य चार्ज की छूट देते हैं।

3. RBI का सख्त नियम: लोन बंद होने के बाद 30 दिन में ओरिजिनल पेपर्स और NOC न देने पर ₹5,000/दिन का मुआवजा

डायरेक्ट उत्तर: आरबीआई के संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार, लोन का पूरा भुगतान होने के अधिकतम 30 दिनों के भीतर बैंक को ग्राहक के सभी मूल दस्तावेज (जैसे मकान की मूल रजिस्ट्री, सेल डीड) लौटाने होंगे और नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) जारी करना होगा। यदि बैंक 30 दिन के बाद 1 दिन भी देरी करता है, तो बैंक को ग्राहक को ₹5,000 प्रतिदिन के हिसाब से नकद हर्जाना (Compensation) देना अनिवार्य है।

यह नियम ग्राहकों के लिए बहुत बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुआ है:

  • दस्तावेज खो जाने पर ₹5 लाख तक का मुआवजा: यदि बैंक की लापरवाही से ग्राहक के मूल रजिस्ट्री पेपर लॉकर में खो जाते हैं, तो बैंक को अपने खर्चे पर डुप्लीकेट प्रमाणित कॉपी निकलवानी होगी और साथ ही ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए अलग से हर्जाना देना होगा।
  • सिविल रिकॉर्ड (CIBIL) से नाम हटाना: लोन बंद होने के बाद बैंक को 30 दिनों के भीतर CIBIL, Experian, CRIF को सूचना भेजकर लोन स्टेटस को "Closed" अपडेट करना होगा ताकि ग्राहक का क्रेडिट स्कोर सुधर सके।

4. 5-कॉलम प्रमुख बैंकों (SBI, HDFC, ICICI, Axis, Bajaj) के फोरक्लोजर चार्ज व नियम तुलना टेबल

भारत के टॉप बैंकों और एनबीएफसी में पर्सनल लोन प्रीपेमेंट के वास्तविक नियमों की तुलना इस आधिकारिक तालिका से करें:

बैंक / ऋणदाता फ्लोटिंग रेट लोन पर चार्ज फिक्स्ड रेट लोन पर चार्ज पार्ट-पेमेंट (Part-Payment) नियम काम की ज़मीनी टिप
State Bank of India (SBI) शून्य (0%) शून्य (अधिकांश पर्सनल लोन पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं) कभी भी कितना भी पार्ट-पेमेंट करें, कोई चार्ज नहीं एसबीआई में सीधे YONO ऐप से बिना किसी चार्ज के लोन खाते में अतिरिक्त पैसा जमा किया जा सकता है।
HDFC Bank शून्य (0%) (RBI निर्देशानुसार) 13-24 माह: 4%, 25-36 माह: 3%, 36 माह बाद: 2% साल में 2 बार तक पार्ट-पेमेंट की अनुमति (शर्तों सहित) फिक्स्ड लोन में 12 महीने से पहले बंद करने पर सख्त पाबंदी होती है, इसलिए 13वें महीने में बंद करें।
ICICI Bank शून्य (0%) बकाया मूलधन पर 3% से 5% + जीएसटी मूलधन का 25% तक पार्ट-पेमेंट करने की सुविधा पार्ट-पेमेंट करते समय 'Tenure Reduction' चुनें न कि 'EMI Reduction'। इससे ब्याज बहुत ज्यादा बचता है।
Axis Bank शून्य (0%) 2% से 4% + जीएसटी शाखा में जाकर चेक या नेटबैंकिंग से पार्ट पेमेंट लोन फोरक्लोजर रिक्वेस्ट देने से पहले बैंक से 'Foreclosure Statement' की लिखित पर्ची मांगें।
Bajaj Finserv (NBFC) शून्य (0%) (फ्लोटिंग पर) टर्म लोन: 4.72% तक (जीएसटी सहित) फ्लेक्सी लोन (Flexi Loan) में बिना किसी चार्ज के पैसे निकालें व जमा करें यदि बजाज से लोन ले रहे हैं, तो 'Flexi Hybrid' वेरिएंट चुनें जिसमें पार्ट-पेमेंट पर कोई पेनल्टी नहीं लगती।

5. स्टेप-बाय-स्टेप: बैंक जाकर पर्सनल लोन को समय से पहले 0 पेनल्टी में बंद कराने की पूरी प्रक्रिया

डायरेक्ट उत्तर: अपनी लोन शाखा में जाएं और "Foreclosure Statement with Zero Penalty" मांगें। बैंक अधिकारी द्वारा बताए गए अंतिम मूलधन और उस तारीख तक के वास्तविक ब्याज की गणना जांचें। चेक या डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान करें और उसी दिन "Payment Acknowledgment Slip" लें। भुगतान के 15 से 21 दिनों में बैंक से मूल NOC (No Objection Certificate) और दस्तावेज प्राप्त करें।

लोन क्लोज कराने का सुरक्षित 6-चरणीय तरीका:

  1. स्टेप 1 (फोरक्लोजर स्टेटमेंट मांगना): सीधे बैंक काउंटर पर पैसे जमा न करें। पहले आधिकारिक फोरक्लोजर लेटर मांगें। उसमें चेक करें कि कोई अतिरिक्त अवांछित शुल्क (जैसे लेजर चार्ज, अनौपचारिक फीस) तो नहीं जोड़ा गया है।
  2. स्टेप 2 (तारीख का मिलान): फोरक्लोजर स्टेटमेंट में लिखी 'वैलिडिटी डेट' (Validity Date) तक ही भुगतान करें। यदि उस तारीख के बाद पैसा देंगे तो उस दिन तक का अतिरिक्त ब्याज फिर जुड़ जाएगा।
  3. स्टेप 3 (ईएमआई ऑटो-डेबिट रोकना): बैंक को लिखित में आवेदन दें कि लोन बंद होने के बाद अगले महीने की ईएमआई का NACH / ECS ऑटो-डेबिट मैंडेट तत्काल प्रभाव से रद्द (Cancel) किया जाए।
  4. स्टेप 4 (भुगतान व पावती): राशि का भुगतान अपने बैंक खाते से ट्रांसफर या चेक के जरिए करें। काउंटर से मोहर लगी रसीद अनिवार्य रूप से लें।
  5. स्टेप 5 (NOC व क्लोजर लेटर): भुगतान के 15-20 दिनों बाद बैंक से औपचारिक "No Dues Certificate" (एनओसी) डाक से या शाखा से प्राप्त करें।
  6. स्टेप 6 (CIBIL में स्टेटस जांच): 45 दिन बाद अपना फ्री सिबिल स्कोर निकालें और देखें कि उस पर्सनल लोन के आगे **"Closed"** लिखा आ रहा है या नहीं। यदि "Written Off" या "Settled" लिखा आ रहा है, तो तुरंत बैंक से शिकायत करें।

6. पेनाल्टी इंटरेस्ट (Penal Interest) का नया कानून: ईएमआई टूटने पर बैंक ब्याज पर ब्याज क्यों नहीं जोड़ सकते?

डायरेक्ट उत्तर: आरबीआई के "Fair Lending Practice" सर्कुलर के तहत बैंकों द्वारा ईएमआई देरी पर लगाया जाने वाला 'पेनाल्टी इंटरेस्ट' पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। बैंक अब केवल एक निश्चित 'पेनाल्टी चार्ज' (Penal Charges) ले सकते हैं। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि बैंक इस पेनाल्टी चार्ज को लोन के मूलधन में जोड़कर उस पर दोबारा ब्याज (Compounding Interest) नहीं वसूल सकते।

पहले बैंक क्या चालाकी करते थे और अब क्या रोक है:

  • पुरानी व्यवस्था का शोषण: पहले अगर आपकी ₹10,000 की ईएमआई बाउंस होती थी, तो बैंक आपके मूल लोन की ब्याज दर 14% से बढ़ाकर 16% कर देते थे (2% पेनाल्टी इंटरेस्ट)। अगले महीने उस बढ़े हुए ब्याज पर भी ब्याज कटता था, जिससे गरीब और परेशान कर्जदार कभी कर्ज से बाहर ही नहीं निकल पाता था।
  • नई व्यवस्था का नियम: अब बैंक केवल एक निश्चित रकम (जैसे ₹250 या ₹500) पेनाल्टी चार्ज के रूप में अलग ले सकते हैं। इसे मूलधन में नहीं जोड़ा जा सकता। यदि आपने उस महीने की ईएमआई दे दी, तो पेनल्टी वहीं रुक जाएगी।

7. पार्ट-पेमेंट (Part-Payment) बनाम फुल फोरक्लोजर: ब्याज बचाने के लिए कौन सा विकल्प सबसे फायदेमंद?

डायरेक्ट उत्तर: यदि आपके पास पूरा लोन एक साथ चुकाने का पैसा नहीं है, तो आपातकालीन फंड (Emergency Fund) खाली करने के बजाय 'पार्ट-पेमेंट' (आंशिक भुगतान) करना सबसे समझदारी भरा कदम है। जब भी आपके पास ₹20,000, ₹50,000 या ₹1 लाख अतिरिक्त आएं, सीधे लोन के मूलधन में जमा करवाएं और बैंक से कहें कि 'मेरी ईएमआई कम मत करो, बल्कि लोन की अवधि (Tenure) घटा दो'। इससे कुल ब्याज में 40% से 60% की भारी बचत होती है।

एक वास्तविक गणितीय तुलना समझें:

  • लोन विवरण: ₹5 लाख का पर्सनल लोन, 15% ब्याज दर पर 5 साल के लिए। कुल देय ब्याज लगभग ₹2.13 लाख बनता है।
  • यदि आप हर साल ₹50,000 का पार्ट-पेमेंट करते हैं: आपका 5 साल का लोन मात्र 3.2 साल में खत्म हो जाएगा और आप ब्याज में सीधे ₹90,000 से अधिक की नकद बचत कर लेंगे।
  • इमरजेंसी फंड कभी खत्म न करें: लोन बंद करने के चक्कर में अपने बचत खाते का पूरा पैसा खाली न करें। कम से कम 3 महीने के घरेलू खर्च का पैसा अपने सेविंग्स खाते में जरूर रखें।

8. अगर बैंक गैरकानूनी चार्ज काटे तो RBI लोकपाल (CMS Portal) पर 5 मिनट में ऑनलाइन शिकायत कैसे दर्ज करें?

डायरेक्ट उत्तर: यदि बैंक फ्लोटिंग रेट लोन पर अवैध फोरक्लोजर फीस काटता है या 30 दिन में एनओसी नहीं देता, तो पहले बैंक के नोडल अधिकारी (PNO) को लिखित ईमेल भेजें। यदि 30 दिन में समाधान न हो, तो सीधे cms.rbi.org.in पर जाएं। "File a Complaint" पर क्लिक करें, बैंक का नाम, खाता संख्या और अवैध वसूली की रसीद अपलोड करें। आरबीआई लोकपाल बैंक पर सीधे जुर्माना लगाकर आपका पैसा रिफंड करवाता है।

शिकायत दर्ज कराने के 3 पक्के नियम:

  1. आरबीआई सर्कुलर का हवाला दें: अपनी शिकायत में स्पष्ट लिखें—"Violation of RBI Directions on Pre-payment Charges on Loans and Fair Lending Practices"।
  2. रिफंड के साथ ब्याज की मांग: जो पैसा बैंक ने अवैध रूप से काटा है, उस पर उस तारीख से लेकर रिफंड की तारीख तक बैंक दर पर ब्याज और मानसिक उत्पीड़न के मुआवजे की मांग करें।
  3. ट्रैकिंग नंबर: शिकायत दर्ज होते ही स्क्रीन पर 10 अंकों का कम्प्लेंट नंबर आ जाता है, जिसे मोबाइल पर कभी भी ट्रैक किया जा सकता है।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या पर्सनल लोन जल्दी बंद करने से मेरा CIBIL स्कोर खराब होता है?

उत्तर: नहीं। जब आप लोन का पूरा पैसा समय से पहले ब्याज सहित चुकता करते हैं, तो CIBIL में स्टेटस "Closed - Fully Paid" दर्ज होता है। इससे आपका डेट-टू-इनकम रेश्यो (DTI) सुधरता है और भविष्य में नया लोन या क्रेडिट कार्ड और भी आसानी से व कम ब्याज पर मिलता है।

Q2. क्या बैंक से एनओसी (NOC) लेना सचमुच इतना जरूरी है?

उत्तर: हाँ, यह अत्यंत अनिवार्य कानूनी दस्तावेज है। एनओसी ही एकमात्र ऐसा प्रमाण है जो यह साबित करता है कि बैंक का अब आप पर एक रुपया भी बकाया नहीं है। बिना एनओसी के यदि बैंक के कंप्यूटर में ₹10 का भी कोई सिस्टम एरर रह जाए, तो 5 साल बाद वह हजारों का डिफॉल्ट बनकर आपका सिबिल स्कोर पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।

Q3. अगर बैंक मैनेजर कहे कि 'हमारे सिस्टम में चार्ज माफ करने का ऑप्शन नहीं है' तो क्या करें?

उत्तर: मैनेजर से कहें कि वे लिखित में यह लिखकर दें कि वे आरबीआई के फ्लोटिंग रेट प्री-पेमेंट सर्कुलर का पालन करने से इनकार कर रहे हैं। कोई भी बैंक मैनेजर लिखित में ऐसा देने की हिम्मत नहीं करेगा। तुरंत बैंक के रीजनल ग्रीवेंस हेड को ईमेल भेजें और आरबीआई पोर्टल पर केस दर्ज करें।

Q4. क्या बिजनेस लोन या फर्म के नाम पर लिए गए लोन पर भी 0% फोरक्लोजर लागू है?

उत्तर: यदि बिजनेस लोन किसी व्यक्ति (Individual / Sole Proprietor) के नाम पर है या पात्र माइक्रो व स्मॉल एंटरप्राइज (MSE) के तहत फ्लोटिंग रेट पर है, तो उस पर भी आरबीआई ने राहत दी है। लेकिन यदि लोन किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या पार्टनरशिप फर्म के नाम पर है, तो अनुबंध के अनुसार चार्ज लग सकते हैं।

10. बैंकिंग लोकपाल व प्रमुख बैंकों के ग्रीवेंस रिड्रेसल कांटेक्ट सूत्र

यदि बैंक आपकी बात न सुने या अवैध पेनल्टी काटने पर अड़ा रहे, तो इन आधिकारिक अधिकारियों से संपर्क करें:

प्राधिकरण / बैंक का नाम शिकायत संपर्क सूत्र / ईमेल अधिकार व निस्तारण समय
RBI ओंबुड्समैन (लोकपाल) CRPC, टोल-फ्री 14448 | cms.rbi.org.in अंतिम न्यायिक अधिकार (बैंक पर सीधे जुर्माना लगाने की शक्ति)
SBI कस्टमर केयर व ग्रीवेंस 1800-1234 / customercare@sbi.co.in शाखा स्तर पर 7 कार्यदिवस में समाधान
HDFC बैंक ग्रीवेंस रिड्रेसल grievance.redressal@hdfcbank.com 10 कार्यदिवस में लिखित जवाब अनिवार्य
ICICI बैंक हेड ग्रीवेंस headservicequality@icicibank.com चार्ज विवादों में तुरंत समाधान व रिफंड

11. बैंक लोन सेटलमेंट (Settlement) बनाम फुल फोरक्लोजर (Closure): सिबिल पर पड़ने वाले असर का सच

डायरेक्ट उत्तर: लोन सेटलमेंट और लोन फोरक्लोजर में जमीन-आसमान का अंतर है। 'लोन सेटलमेंट' का मतलब है कि आपने मजबूरी में बैंक से कुछ पैसा माफ करवाकर कम पैसे दिए, जिससे सिबिल में 7 साल के लिए 'Settled' का काला धब्बा लग जाता है और भविष्य में कोई लोन नहीं मिलता। वहीं 'लोन फोरक्लोजर' का मतलब है कि आपने पूरा मूलधन और ब्याज समय से पहले ईमानदारी से चुका दिया, जिससे सिबिल में 'Closed - Paid in Full' दर्ज होता है और स्कोर 780+ हो जाता है।

यदि आपके पास पैसा है, तो कभी भी बैंक के रिकवरी एजेंट के झांसे में आकर 'लोन सेटलमेंट' न करें। हमेशा पूरा भुगतान करके आधिकारिक 'क्लोजर लेटर' ही लें।

12. फोरक्लोजर के लिए बैंक प्रबंधक को देने वाला औपचारिक कानूनी आवेदन पत्र (प्रारूप)

यदि बैंक कर्मचारी फोरक्लोजर करने में आनाकानी करें, तो शाखा प्रबंधक को यह औपचारिक आवेदन पत्र सौंपें और उसकी रिसीविंग ले लें:

सेवा में,
श्रीमान शाखा प्रबंधक महोदय,
[अपने बैंक का नाम], शाखा: [शाखा का नाम]

विषय: पर्सनल लोन खाता संख्या [लोन अकाउंट नंबर] का आरबीआई निर्देशानुसार 0% फोरक्लोजर व खाता बंदी बाबत।

महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैंने आपके बैंक से व्यक्तिगत पर्सनल लोन (खाता संख्या: [लोन नंबर]) लिया हुआ है। यह लोन रेपो-लिंक्ड फ्लोटिंग ब्याज दर पर आधारित है। मैं अपनी निजी बचत से इस ऋण का संपूर्ण बकाया मूलधन एकमुश्त चुकाकर खाता बंद कराना चाहता हूँ।

भारतीय रिज़र्व बैंक के सर्कुलर (RBI Directions on Pre-payment Charges on Loans) के अनुसार व्यक्तिगत उधारकर्ताओं द्वारा लिए गए फ्लोटिंग रेट ऋणों पर कोई भी प्री-पेमेंट अथवा फोरक्लोजर शुल्क वसूलना पूर्णतः प्रतिबंधित है।

अतः आपसे प्रार्थना है कि मुझे आज की तिथि तक का अंतिम फोरक्लोजर स्टेटमेंट उपलब्ध कराने की कृपा करें, जिसमें कोई अनधिकृत पेनल्टी न जोड़ी गई हो। भुगतान उपरांत कृपया 30 कार्यदिवसों के भीतर औपचारिक नो-ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने का कष्ट करें।

सधन्यवाद,
हस्ताक्षर: ____________
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दिनांक: [तारीख]
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