finance ⏱️ 16 min read 📅 28 सितंबर 2026

Bharat Maritime Insurance Pool (BMIP) 2026: ₹20,000 करोड़ का स्वदेशी समुद्री बीमा पूल, GIC Re सपोर्ट, वैश्विक शिपिंग सुरक्षा व फ्रेट लागत में छूट

VS
डॉ. वंदना शर्मा
वरिष्ठ लोक नीति एवं कल्याणकारी योजना विशेषज्ञ

पीएच.डी. (लोक प्रशासन एवं ई-गवर्नेंस)। विगत 12 वर्षों से भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI), वित्तीय समावेशन एवं नागरिक अधिकारों पर शोधपरक लेखन व नीति विश्लेषण।

त्वरित उत्तर (Quick Answer)

भारत समुद्री बीमा पूल (Bharat Maritime Insurance Pool - BMIP) 2026 भारत सरकार द्वारा स्थापित एक ऐतिहासिक स्वदेशी संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (P&I) समुद्री बीमा तंत्र है। ₹20,000 करोड़ के कॉर्पस और भारतीय सामान्य बीमा निगम (GIC Re) के पुनर्बीमा (Reinsurance) सहयोग से संचालित यह पूल भारतीय जहाजों, तटीय नौकाओं और अंतरराष्ट्रीय कार्गो जहाजों को युद्ध जोखिम (War Risk), समुद्री डकैती, तेल रिसाव और वैश्विक प्रतिबंधों से व्यापक वित्तीय व कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे विदेशी बीमा कंपनियों पर भारत की निर्भरता समाप्त होती है।

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मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • ₹20,000 करोड़ का समर्पित समुद्री बीमा पूल (BMIP Corpus) भारतीय निर्यातकों व शिपिंग कंपनियों के लिए सक्रिय।
  • लंदन स्थित इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ P&I क्लब्स पर निर्भरता कम कर विदेशी मुद्रा बहिर्वाह (Foreign Exchange Outflow) में भारी बचत।
  • लाल सागर (Red Sea) और फारस की खाड़ी जैसे संवेदनशील समुद्री गलियारों में भारतीय जहाजों को तुरंत वॉर-रिस्क कवर।
  • भारतीय एमएसएमई निर्यातकों के लिए लॉजिस्टिक्स व समुद्री फ्रेट लागत में 12% से 18% तक की अनुमानित कमी।
  • GIC Re और सार्वजनिक क्षेत्र की 4 गैर-जीवन बीमा कंपनियों (New India, National, United India, Oriental) का संयुक्त कंसोर्टियम।
समुद्री वित्त एवं नीति 2026
भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP) - प्रमुख मापदंड तालिका
मापदंड / श्रेणी सरकारी नियम / तकनीकी विनिर्देश आवश्यक दस्तावेज / पात्रता शुल्क / समय-सीमा काम की टिप / नागरिक सलाह
पूल का आकार व संरचना ₹20,000 करोड़ का प्रारंभिक पुनर्बीमा जोखिम पूल, जिसमें भारत सरकार की सॉवरेन गारंटी शामिल। शिपिंग महानिदेशालय (DGS) में पंजीकृत भारतीय ध्वज वाहक जहाज या भारतीय स्वामित्व वाले कार्गो। शून्य सदस्यता शुल्क; प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में 15% तक कम। भारतीय शिपिंग कंपनियां DGS सिंगल विंडो पोर्टल से सीधे BMIP इन-प्रिंसिपल क्लीयरेंस ले सकती हैं।
कवरेज का दायरा (Coverage Scope) संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (P&I), कार्गो डैमेज, क्रू लायबिलिटी, तेल रिसाव और युद्ध/भू-राजनीतिक जोखिम। IMO रजिस्ट्रेशन नंबर, क्लासिफिकेशन सोसायटी सर्टिफिकेट, वेसल इंस्पेक्शन रिपोर्ट और बीमा प्रस्ताव पत्र। पॉलिसी आवेदन के 24 से 48 घंटे में डिजिटल कवर नोट जारी; वार्षिक नवीनीकरण। संवेदनशील समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों को 72 घंटे पूर्व 'वॉर रिस्क एंडोर्समेंट' एक्टिवेट करना होगा।
पुनर्बीमा एवं क्लेम सेटलमेंट GIC Re और भारतीय सार्वजनिक बीमा कंपनियों के माध्यम से रुपये (INR) में प्रत्यक्ष क्लेम निपटान। समुद्री दुर्घटना जांच रिपोर्ट, सर्वेयर असेसमेंट, मास्टर लॉगबुक और बिल ऑफ लैडिंग (B/L)। दस्तावेज सत्यापन के 15 कार्य दिवसों के भीतर फास्ट-ट्रैक क्लेम ट्रांसफर। अंतरराष्ट्रीय क्लेम में कानूनी विवादों के लिए गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर (GIFT City) मध्यस्थता का उपयोग करें।
तटीय व अंतर्देशीय जलमार्ग लाभ नेशनल वाटरवेज (NW-1 से NW-5) पर चलने वाले बार्जेस और कोस्टल फीडर जहाजों को 25% प्रीमियम सब्सिडी। IWAI (इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी) परमिट, वेसल फिटनेस और नेविगेशन लॉग डेटा। वार्षिक रियायती प्रीमियम स्लैब; 1 वर्ष की एकीकृत समग्र पॉलिसी। तटीय व्यापारी अंतर्देशीय जलमार्ग सब्सिडी का दावा करने के लिए IWAI पोर्टल से सत्यापित रसीद लगाएं।
एमएसएमई निर्यातक सुरक्षा लघु एवं मध्यम निर्यातकों के कंटेनर कार्गो का कम लागत में बीमा, विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव से बचाव। उद्यम रजिस्ट्रेशन (Udyam), IEC कोड, जीएसटी चालान और एक्सपोर्ट इनवॉइस। प्रति कंसाइनमेंट ऑन-डिमांड डिजिटल माइक्रो-इंश्योरेंस उपलब्ध। MSME निर्यातक फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (FIEO) डिस्काउंट कोड से अतिरिक्त छूट पाएं।

📑 विषय सूची (Table of Contents)

यह नीति और गाइड किसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है?
  • भारतीय शिपिंग कंपनियां एवं पोत स्वामी (Shipowners): जो प्रतिस्पर्धी दरों पर व्यापक स्वदेशी P&I और हल-मशीनरी कवर चाहते हैं।
  • निर्यात-आयात (EXIM) एवं MSME निर्यातक: जिन्हें समुद्री फ्रेट लागत में कमी और सुरक्षित कार्गो बीमा की आवश्यकता है।
  • लॉजिस्टिक्स, फ्रेट फॉरवर्डर्स व मरीन ब्रोकर: जो भारतीय मुद्रा (INR) में निर्बाध क्लेम सेटलमेंट और पॉलिसी जारी करना चाहते हैं।
  • आर्थिक एवं नीति विश्लेषक: जो भारत के व्यापार संतुलन, गिफ्ट सिटी मैरीटाइम हब और सागरमाला परियोजना का अध्ययन कर रहे हैं।

1. भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP): आवश्यकता और पृष्ठभूमि

भारत का 95% व्यापार मात्रा (Volume) के हिसाब से और 70% मूल्य (Value) के हिसाब से समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है। इसके बावजूद, दशकों से भारतीय जहाजों और निर्यात कार्गो को अपनी सुरक्षा के लिए लंदन, नॉर्वे और पश्चिमी देशों के 'इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ P&I क्लब्स' (International Group of P&I Clubs) पर निर्भर रहना पड़ता था।

हाल के वर्षों में लाल सागर (Red Sea) संकट, स्वेज नहर में गतिरोध और वैश्विक भू-राजनीतिक प्रतिबंधों के चलते विदेशी बीमाकर्ताओं ने भारतीय जहाजों पर भारी 'वॉर रिस्क सरचार्ज' (War Risk Surcharge) लगाना शुरू कर दिया था। कई बार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आयातों (जैसे कच्चा तेल और उर्वरक) के समय विदेशी बीमा कंपनियों ने मनमाने ढंग से सेवाएं रोक दीं। इसी निर्भरता को समाप्त करने और भारतीय शिपिंग को सुरक्षित कवच देने के लिए BMIP 2026 की स्थापना की गई है।

2. लंदन P&I क्लब बनाम स्वदेशी BMIP मॉडल का तुलनात्मक विश्लेषण

संरक्षण और क्षतिपूर्ति (Protection and Indemnity - P&I) बीमा सामान्य वाणिज्यिक बीमा से भिन्न होता है। यह तीसरे पक्ष की देयताओं (Third-party liabilities), जैसे कि समुद्र में तेल रिसाव, जहाजों की टक्कर, चालक दल (Crew) के स्वास्थ्य व जानमाल का नुकसान, और जहाजों के मलबे को हटाने (Wreck Removal) के असीमित जोखिमों को कवर करता है।

पारंपरिक रूप से दुनिया का 90% से अधिक समुद्री P&I बीमा लंदन स्थित 12-13 क्लबों के सिंडिकेट द्वारा नियंत्रित होता था। जब कभी पश्चिमी देश किसी तीसरे देश पर प्रतिबंध लगाते थे, तो ये क्लब भारतीय जहाजों का बीमा रद्द करने की धमकी देते थे। BMIP के गठन से भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु और नियम-आधारित घरेलू तंत्र मिल गया है जो भारतीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

3. ऊर्जा सुरक्षा, कच्चा तेल आयात और वैश्विक प्रतिबंधों से बचाव

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और मूल्य सीमा (Price Cap) के दौरान विदेशी टैंकर बीमाकर्ताओं ने कई बार भारतीय रिफाइनरियों (IOCL, BPCL, HPCL, Reliance) को तेल आपूर्ति करने वाले जहाजों को कवर देने से मना कर दिया था।

रणनीतिक ऊर्जा कवच: BMIP 2026 बड़े कच्चे तेल वाहक टैंकरों (VLCCs और Suezmax जहाजों) को पूर्ण P&I और संदूषण (Pollution Liability) बीमा प्रदान करता है। इससे भारत बिना किसी विदेशी भू-राजनीतिक दबाव के मित्र देशों से रियायती दरों पर ऊर्जा संसाधन सुरक्षित रूप से आयात करने में पूरी तरह सक्षम हो गया है।

4. ₹20,000 करोड़ का वित्तीय ढांचा और GIC Re का योगदान

BMIP को एक बहु-स्तरीय वित्तीय गारंटी के साथ डिजाइन किया गया है:

  • ₹20,000 करोड़ का प्रारंभिक जोखिम कॉर्पस: इसमें भारत सरकार द्वारा समर्थित सॉवरेन बैकस्टॉप शामिल है, जिससे यह पूल किसी भी बड़े समुद्री हादसे में अरबों रुपये के दावों का भुगतान करने में सक्षम है।
  • GIC Re की लीड री-इंश्योरेंस भूमिका: भारत की राष्ट्रीय पुनर्बीमा कंपनी GIC Re इस पूल की मुख्य अंडरराइटर और जोखिम प्रबंधक के रूप में कार्य कर रही है।
  • चार सार्वजनिक बीमा कंपनियों का संघ: द न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस और द ओरिएंटल इंश्योरेंस इस पूल में प्राथमिक भागीदार के रूप में पॉलिसी जारी कर रही हैं।
  • भारतीय मुद्रा (INR) में प्रीमियम और सेटलमेंट: अमेरिकी डॉलर या यूरो की विनिमय दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से व्यापारियों को पूरी सुरक्षा मिलती है क्योंकि संपूर्ण लेन-देन भारतीय रुपये में होता है।

5. लाल सागर, होर्मुज व युद्ध जोखिम (War Risk) विशेष कवरेज

वर्तमान में यमन के निकट बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर में जहाजों पर ड्रोन हमलों के कारण वैश्विक बीमा कंपनियां अत्यधिक प्रीमियम वसूल रही थीं, जिससे भारतीय निर्यातकों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के लंबे रास्ते से जाना पड़ रहा था। इससे यात्रा समय में 14 से 20 दिनों की वृद्धि और भारी ईंधन खर्च हो रहा था।

BMIP के तहत भारतीय नौसेना द्वारा सुरक्षित 'कन्वॉय कॉरिडोर' से गुजरने वाले जहाजों को किफायती दरों पर तुरंत विशेष युद्ध जोखिम (War Risk) कवर दिया जाता है। यदि जहाज को किसी संघर्ष क्षेत्र में नुकसान होता है, तो BMIP 48 घंटे के भीतर अंतरिम मुआवजा जारी करता है।

6. भारतीय निर्यातकों और एमएसएमई सेक्टर के लिए आर्थिक लाभ

BMIP केवल बड़े जहाज मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे क्रांतिकारी प्रभाव छोटे और मध्यम निर्यातकों (MSMEs) पर पड़ रहा है:

  1. फ्रेट लागत में 12% से 18% तक की बचत: सस्ते मरीन इंश्योरेंस से शिपिंग लाइनों द्वारा वसूले जाने वाले अतिरिक्त हैंडलिंग और जोखिम शुल्क समाप्त हो जाते हैं।
  2. माइक्रो-कंटेनर बीमा: छोटे निर्यातक अपने 1 या 2 कंटेनर के लिए भी सिंगल इनवॉइस पर ₹500 से शुरू होने वाले डिजिटल मरीन कवर खरीद सकते हैं।
  3. बैंकों द्वारा आसान कोलैटरल स्वीकृति: BMIP कवर प्राप्त कार्गो को भारतीय बैंक तुरंत निर्यात ऋण (Export Credit) के लिए सुरक्षित गारंटी के रूप में स्वीकार करते हैं।
  4. निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि: यूरोप, अफ्रीका और मध्य पूर्व के बाजारों में भारतीय वस्त्र, इंजीनियरिंग उत्पाद और कृषि जिंसों की कीमतें अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो जाती हैं।

7. ब्लॉकचेन बिल ऑफ लैडिंग और डिजिटल क्लेम सत्यापन

दावों के निपटान में लगने वाले हफ्तों के समय को घटाकर कुछ दिनों में सीमित करने के लिए BMIP ने नेशनल लॉजिस्टिक्स पोर्टल (NLP-Marine) के साथ ब्लॉकचेन इंटीग्रेशन किया है:

  • ई-बिल ऑफ लैडिंग (e-B/L): कागजी दस्तावेजों के स्थान पर क्रिप्टोग्राफिकली सुरक्षित डिजिटल बिल ऑफ लैडिंग का उपयोग होता है, जिससे जालसाजी पूरी तरह रुकती है।
  • आईओटी सेंसर आधारित कार्गो ट्रैकिंग: रेफ्रिजरेटेड कंटेनरों (Reefers) में तापमान और नमी में गड़बड़ी होने पर सिस्टम स्वचालित रूप से स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट के जरिए प्रारंभिक क्लेम दर्ज कर लेता है।
  • डिजिटल सर्वेयर नेटवर्क: दुनिया के 120 प्रमुख बंदरगाहों पर भारतीय दूतावासों और अधिकृत अंतरराष्ट्रीय मरीन सर्वेयरों की मौजूदगी से 24 घंटे में सर्वे रिपोर्ट अपलोड होती है।

8. गिफ्ट सिटी मध्यस्थता और त्वरित कानूनी समाधान

समुद्री बीमा विवादों के समाधान के लिए गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) में स्थित 'गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर' (GMC) को अधिकृत कानूनी मध्यस्थता केंद्र बनाया गया है।

विदेशी अदालतों (जैसे लंदन की एडमिरल्टी कोर्ट) में वर्षों चलने वाले मुकदमों के स्थान पर BMIP के मामलों का निपटारा भारतीय समुद्री कानूनों और वैश्विक UNCITRAL नियमों के तहत 60 से 90 दिनों में फास्ट-ट्रैक मोड में किया जाता है।

9. तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग (Sagarmala) जहाजों के लिए रियायतें

प्रधानमंत्री गति शक्ति और सागरमाला परियोजना के तहत भारत अपने अंतर्देशीय जलमार्गों (गंगा NW-1, ब्रह्मपुत्र NW-2) और तटीय शिपिंग को तेजी से बढ़ावा दे रहा है।

  • 25% प्रीमियम सब्सिडी: भारत के आंतरिक जलमार्गों पर चलने वाले सभी कार्गो बार्जेस और इलेक्ट्रिक नौकाओं को प्रीमियम में 25% की सीधी सब्सिडी दी जा रही है।
  • ग्रीन वेसल इंसेंटिव: मेथनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन या इलेक्ट्रिक बैटरी से चलने वाले जहाजों को अतिरिक्त 10% की ग्रीन-रिबेट प्रदान की जाती है।
  • सरलीकृत डॉक्यूमेंटेशन: तटीय मछुआरों और छोटे नौका ऑपरेटरों के लिए आधार आधारित वन-पेज पॉलिसी फॉर्म की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
  • मेक इन इंडिया शिपयार्ड प्रोत्साहन: कोचीन शिपयार्ड, मझगांव डॉक और एलएंडटी कट्टुपल्ली जैसे भारतीय शिपयार्डों में निर्मित नए वेसल्स को पहले 3 वर्षों तक P&I अंडरराइटिंग में शून्य डिडक्टिबल (Zero Deductible) का विशेष सुरक्षा कवच दिया जाता है।

10. BMIP रिस्क रेटिंग और ऑटोमेटेड अंडरराइटिंग मैट्रिक्स

BMIP का डिजिटल प्लेटफॉर्म जोखिम मूल्यांकन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डायनेमिक प्राइसिंग इंजन का उपयोग करता है:

  • वेसल ऐज फैक्टर: 15 वर्ष से कम आयु के जहाजों को 'ग्रीन रिस्क' श्रेणी में रखा जाता है, जिन पर न्यूनतम बेस प्रीमियम लागू होता है।
  • सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) ऑडिट: जहाजों के सुरक्षा रिकॉर्ड और डीजीएस इंस्पेक्शन रिपोर्ट में शून्य दोष (Zero Deficiency) पाए जाने पर अतिरिक्त 5% का 'नो-क्लेम बोनस' पॉलिसी रिन्यूअल पर दिया जाता है।
  • पर्यावरण व बैलास्ट वाटर अनुपालन: अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के बैलास्ट वाटर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल का पालन करने वाले सभी क्रू और वेसल्स को तुरंत पर्यावरण प्रमाणन जारी किया जाता है।

11. द्विपक्षीय मुद्रा व्यापार और रुपया-दीरहम/रूबल में समुद्री लेन-देन

भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू किए गए विशेष वोस्ट्रो खाते (Special Vostro Accounts) और स्थानीय मुद्रा व्यापार तंत्र (Local Currency Settlement) को BMIP के साथ सीधे लिंक किया गया है। अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE), रूस और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ होने वाले व्यापार में समुद्री बीमा प्रीमियम और दावों का भुगतान अमेरिकी डॉलर के स्थान पर सीधे भारतीय रुपये, दिरहम या संबंधित स्थानीय मुद्रा में संभव हो गया है। इससे निर्यातकों को विदेशी मुद्रा रूपांतरण शुल्क (Forex Conversion Fees) पर प्रति कंटेनर हजारों रुपये की सीधी बचत होती है।

12. BMIP पॉलिसी प्राप्त करने की चरणबद्ध ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया

शिपिंग कंपनियों और निर्यातकों के लिए BMIP पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल है:

1

पोर्टल विजिट व ऑथेंटिकेशन

शिपिंग महानिदेशालय (DGS) के अधिकृत BMIP पोर्टल (maritime-insurance.gov.in) पर जाएं और अपने IEC कोड या DGS कंपनी रजिस्ट्रेशन आईडी से लॉगिन करें।

2

जहाज या कार्गो विवरण दर्ज करें

IMO नंबर, वेसल टाइप, निर्माण वर्ष, क्लासिफिकेशन सोसायटी सर्वे रिपोर्ट और यात्रा मार्ग (Voyage Route) का चयन करें। निर्यातक अपना बिल ऑफ लैडिंग और पैकिंग लिस्ट अपलोड करें।

3

प्रीमियम कैलकुलेशन व डिजिटल कोटेशन

एआई-आधारित अंडरराइटिंग सिस्टम 30 सेकंड के भीतर जोखिम मूल्यांकन कर भारतीय रुपये (INR) में पारदर्शी प्रीमियम कोटेशन स्क्रीन पर प्रदर्शित करेगा।

4

डिजिटल भुगतान व तत्काल कवर नोट

नेट बैंकिंग, एनईएफटी/आरटीजीएस या कॉरपोरेट यूपीआई से भुगतान करें। भुगतान सफल होते ही डिजिटल हस्ताक्षरित P&I कवर नोट और पॉलिसी सर्टिफिकेट तुरंत डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाता है।

11. निर्यातक एवं शिपिंग सहायता, हेल्पलाइन व शिकायत निवारण

समुद्री आपात स्थितियों, दुर्घटनाओं या क्लेम संबंधी किसी भी सहायता के लिए BMIP 24x7 इमरजेंसी मरीन रिस्पांस डेस्क संचालित करता है:

आधिकारिक संपर्क व सहायता केंद्र:

  • BMIP 24x7 मरीन इमरजेंसी हॉटलाइन: 1800-120-BMIP (2647) / +91-22-2286-SHIP
  • ईमेल इमरजेंसी डेस्क: emergency.claims@bmip.gov.in / marine.desk@gicre.in
  • गिफ्ट सिटी मैरीटाइम आर्बिट्रेशन सेल: dispute.resolution@giftmaritime.in
  • दावा निपटान समयावधि: आपातकालीन बचाव एवं प्राथमिक व्यय 48 घंटे में; पूर्ण सर्वेक्षण क्लेम 15 कार्य दिवसों के भीतर।
विशेष संपादकीय निष्कर्ष: भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP 2026) न केवल देश के 7,500 किलोमीटर से अधिक लंबे समुद्री तट और बंदरगाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति (Global Maritime Hub) बनाने के विजन को धरातल पर उतारता है। यह भारतीय शिपिंग उद्योग के लिए आत्मनिर्भरता का एक स्वर्णिम अध्याय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. भारत समुद्री बीमा पूल (BMIP) क्या है और इसकी स्थापना क्यों की गई?

A. BMIP भारत सरकार द्वारा ₹20,000 करोड़ के प्रारंभिक कॉर्पस के साथ स्थापित स्वदेशी समुद्री संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति (P&I) बीमा पूल है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय जहाजों और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, लाल सागर जैसे युद्ध क्षेत्रों और विदेशी बीमा क्लबों की मनमानी से बचाकर आत्मनिर्भर समुद्री सुरक्षा प्रदान करना है।

Q. BMIP से भारतीय निर्यातकों और MSME व्यापारियों को क्या लाभ होगा?

A. BMIP के जरिए निर्यातकों को भारतीय रुपये (INR) में 15% तक कम प्रीमियम पर कार्गो और जहाज बीमा मिलता है। इससे समुद्री माल ढुलाई (Freight) लागत में 12% से 18% तक की कमी आती है और विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के जोखिम से मुक्ति मिलती है।

Q. क्या BMIP में तटीय और अंतर्देशीय जलमार्गों (National Waterways) के जहाजों को विशेष छूट मिलती है?

A. हाँ, सागरमाला और गति शक्ति विजन के तहत गंगा, ब्रह्मपुत्र और तटीय मार्गों पर चलने वाले सभी पंजीकृत कार्गो बार्जेस को प्रीमियम पर 25% की सीधी सरकारी सब्सिडी तथा हरित ईंधन (Green Fuel) वाले जहाजों को अतिरिक्त 10% की छूट प्रदान की जाती है।

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