देश के विभिन्न सार्वजनिक और निजी बैंकों में नागरिकों के लगभग ₹78,000 करोड़ से अधिक की जमा राशि बिना किसी दावेदार के लावारिस पड़ी है। अक्सर लोग शहर बदलने, नौकरी बदलने या परिवार के बुजुर्ग की अचानक मृत्यु हो जाने के बाद पुरानी पासबुक और फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदों को भूल जाते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस समस्या को समाप्त करने के लिए UDGAM (Unclaimed Deposits - Gateway to Access inforMation) पोर्टल शुरू किया है। इस गाइड में हम जानेंगे कि घर बैठे अपने या अपने पूर्वजों के पुराने खातों की खोज कैसे करें और बैंक से पाई-पाई कैसे वापस पाएं।
1. अनक्लेम्ड डिपॉजिट क्या है और यह पैसा कहाँ जाता है?
बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 26ए के अनुसार:
- 2 साल तक निष्क्रियता (Inoperative Account): यदि किसी बचत या चालू खाते में लगातार 24 महीने तक खाताधारक की ओर से कोई डेबिट या क्रेडिट लेन-देन नहीं होता, तो बैंक उसे 'इनऑपरेटिव' या 'डॉर्मेंट' श्रेणी में डाल देता है ताकि धोखाधड़ी न हो।
- 10 साल की सीमा (Unclaimed): यदि लगातार 10 साल तक खाते में कोई लेन-देन नहीं होता, या एफडी मैच्योर होने के 10 साल बाद भी कोई दावा नहीं करता, तो बैंक उस पूरे मूलधन और ब्याज को आरबीआई के Depositor Education and Awareness (DEA) Fund में भेज देता है।
- क्या पैसा सरकार का हो जाता है?: बिल्कुल नहीं। यह पैसा हमेशा मूल खाताधारक या उसके कानूनी वारिसों की अमानत रहता है। आरबीआई के पास यह पैसा सुरक्षित रहता है और जब भी सही दावेदार वैध दस्तावेजों के साथ आता है, बैंक को ब्याज सहित पूरा भुगतान करना पड़ता है।
2. 5-कॉलम तुलना: इनऑपरेटिव अकाउंट बनाम अनक्लेम्ड डिपॉजिट
| मानदंड | सक्रिय खाता (Active Account) | निष्क्रिय खाता (Inoperative Account) | अनक्लेम्ड डिपॉजिट (UDGAM Portal) | आवश्यक कानूनी दस्तावेज |
|---|---|---|---|---|
| निष्क्रियता की अवधि | नियमित लेन-देन जारी | 2 वर्ष (24 माह) से कोई लेन-देन नहीं | 10 वर्ष से अधिक समय से अछूता | पैन कार्ड + आधार कार्ड |
| फंड का स्थान | आपके होम ब्रांच में | होम ब्रांच के इनऑपरेटिव लेजर में | आरबीआई के DEA फंड में | शाखा मैनेजर के नाम क्लेम फॉर्म |
| ब्याज की स्थिति | तिमाही क्रेडिट होता है | बचत खाता ब्याज निरंतर जुड़ता है | आरबीआई द्वारा निर्धारित दर पर ब्याज सुरक्षित | पुरानी पासबुक / टीडीआर रसीद |
| सर्च की सुविधा | नेटबैंकिंग / मोबाइल ऐप | केवल होम ब्रांच जाकर | udgam.rbi.org.in पर ऑनलाइन | पैन, वोटर आईडी या पासपोर्ट |
| एक्टिवेशन प्रक्रिया | लागू नहीं | शाखा में जाकर पुनः फ्रेश केवाईसी | फॉर्म 15एच/जी, केवाईसी + क्लेम अप्रूवल | मृत्यु प्रमाणपत्र + वारिसनामा (यदि लागू हो) |
3. UDGAM पोर्टल पर 5 मिनट में पुराना खाता खोजने का तरीका
पोर्टल पर खोज करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन करें:
- स्टेप 1: आधिकारिक पोर्टल खोलें: ब्राउज़र में सीधे udgam.rbi.org.in पर जाएं। किसी भी अन्य थर्ड-पार्टी वेबसाइट या ऐप पर भरोसा न करें।
- स्टेप 2: नया रजिस्ट्रेशन करें: अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर, नाम और पासवर्ड दर्ज करें। आपके मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसे सत्यापित करके लॉगिन करें।
- स्टेप 3: खोज विवरण भरें: खाताधारक का पूरा नाम दर्ज करें (जैसा बैंक पासबुक में दर्ज था)। इसके बाद नीचे दिए गए पहचान विकल्पों में से कम से कम एक विकल्प चुनें:
- पैन कार्ड नंबर (PAN Card)
- वोटर आईडी कार्ड नंबर
- पासपोर्ट नंबर या जन्मतिथि (Date of Birth)
- स्टेप 4: बैंक का चयन करें: आप किसी एक विशिष्ट बैंक (जैसे State Bank of India या Punjab National Bank) को चुन सकते हैं या 'All Banks' पर टिक करके एक साथ 30+ बैंकों में सर्च चला सकते हैं।
- स्टेप 5: परिणाम स्क्रीन: स्क्रीन पर खाताधारक का नाम, बैंक का नाम, ब्रांच का नाम और अनक्लेम्ड डिपॉजिट रेफरेंस नंबर (UDRN) आ जाएगा। इस पेज का प्रिंटआउट या स्क्रीनशॉट सुरक्षित रख लें।
4. बैंक शाखा से ब्याज सहित पैसा वापस क्लेम करने की प्रक्रिया
UDGAM पोर्टल पर खाते की पुष्टि हो जाने के बाद यह चार-चरणीय प्रक्रिया पूरी करें:
- संबंधित शाखा में संपर्क: जिस बैंक शाखा में खाता दिखाया गया है, वहाँ जाएं। यदि वह शाखा बंद या शिफ्ट हो चुकी है, तो उस बैंक की किसी भी निकटतम मुख्य शाखा में जा सकते हैं।
- UDGAM सर्च स्लिप व फॉर्म: UDRN नंबर वाली स्लिप के साथ बैंक का 'Unclaimed Deposit Claim Form' भरें।
- स्वयं का फ्रेश केवाईसी: अपना मूल आधार कार्ड, पैन कार्ड, दो पासपोर्ट फोटो और पुराना एड्रेस प्रूफ जमा करें।
- खाता री-एक्टिवेशन या ट्रांसफर: सत्यापन के 3 से 7 कार्यदिवसों के भीतर बैंक वह सारा पैसा ब्याज सहित या तो आपके नए चालू खाते में एनईएफटी कर देगा या चेक जारी कर देगा।
5. खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में कानूनी वारिस (Legal Heir) क्लेम नियम
यदि खाताधारक अब जीवित नहीं हैं, तो प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- यदि नॉमिनी दर्ज था: नॉमिनी को केवल मूल मृत्यु प्रमाणपत्र (Death Certificate), अपना आधार/पैन और खाताधारक के साथ संबंध का प्रमाण बैंक में देना होगा। 15 दिनों में भुगतान हो जाता है।
- यदि नॉमिनी दर्ज नहीं था (No Nomination): सभी कानूनी वारिसों (पत्नी, बेटे, बेटियां) का संयुक्त शपथ पत्र (Joint Indemnity Affidavit) या ₹5 लाख से अधिक की राशि होने पर न्यायालय से प्राप्त सक्सेशन सर्टिफिकेट (Succession Certificate) बैंक में जमा करना अनिवार्य होता है।