finance ⏱️ 18 मिनट 📅 7 अक्टूबर 2026

IEC Code Online Apply 2026: DGFT पोर्टल से इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड कैसे बनाएं, ₹500 फीस, दस्तावेज, ICEGATE व वार्षिक अपडेट नियम

MA
सीए मयंक अग्रवाल
वरिष्ठ विदेशी व्यापार व सीमा शुल्क सलाहकार

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), कस्टम्स ICEGATE, फेमा (FEMA) व अंतरराष्ट्रीय व्यापार कराधान पर 14 वर्षों का व्यावहारिक परामर्श अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड (Import Export Code - IEC) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी किया जाने वाला 10 अंकों का एक विशिष्ट व्यावसायिक पहचान नंबर है। भारत से किसी भी प्रकार की वस्तु या सेवा का विदेशों में निर्यात (Export) करने या विदेशों से भारत में आयात (Import) करने के लिए यह कोड कानूनी रूप से अनिवार्य है। अब यह कोड आवेदक के पैन कार्ड नंबर (PAN) के समान ही होता है और इसकी वैधता आजीवन (Lifetime) होती है। DGFT के आधिकारिक पोर्टल (dgft.gov.in) पर मात्र ₹500 की सरकारी फीस देकर आधार ओटीपी या क्लास-3 डीएससी के माध्यम से इसे ऑनलाइन 15 से 30 मिनट में जनरेट किया जा सकता है। हर साल अप्रैल से जून के बीच इसका नि:शुल्क ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य होता है।

OFFICIAL CHANNEL GoForDigitalIndia WhatsApp चैनल

सरकारी योजनाओं, नई भर्तियों, एडमिट कार्ड और रिजल्ट्स के ताज़ा अपडेट्स सबसे पहले अपने WhatsApp पर पाएं।

👉 चैनल से जुड़ें (Join WhatsApp)

📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1992 के तहत भारत में किसी भी वाणिज्यिक आयात-निर्यात के लिए आईईसी कोड अनिवार्य है।
  • नए नियमों के तहत आपका 10 अंकों का पैन कार्ड नंबर (PAN Number) ही सीधे आपका आईईसी कोड बन जाता है।
  • सरकारी आवेदन फीस मात्र ₹500 है, जिसका भुगतान भारतकोश (BharatKosh) या नेट बैंकिंग/यूपीआई से सीधे DGFT पोर्टल पर होता है।
  • कस्टम्स क्लीयरेंस और बंदरगाह/एयरपोर्ट पर माल छुड़ाने के लिए आईईसी कोड को ICEGATE पोर्टल और एडी कोड (AD Code) से जोड़ना जरूरी है।
  • डीजीएफटी के अनिवार्य नियम के अनुसार हर साल 1 अप्रैल से 30 जून के बीच प्रत्येक आईईसी धारक को अपना डेटा ऑनलाइन निशुल्क सत्यापित (Annual Update) करना होता है।

📑 विषय सूची (Table of Contents)

विज्ञापन / SPONSORED
किसके लिए काम की है यह संपूर्ण गाइड:

उन सभी व्यक्तिगत उद्यमियों, प्रोप्राइटरशिप फर्मों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, ई-कॉमर्स एक्सपोर्टर्स और कंपनियों के लिए जो भारत से विदेशों में सामान या सेवाएं बेचकर डॉलर में कमाई करना चाहते हैं या विदेशों से कच्चा माल मंगाना चाहते हैं।

काम की बात (Quick Summary):

  • इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड (IEC) के बिना कोई भी बैंक आपके विदेशी व्यापार के भुगतान (Foreign Remittance) को रिलीज नहीं कर सकता।
  • अब अलग से कोई लंबा-चौड़ा नंबर नहीं मिलता—आवेदक की व्यक्तिगत या कंपनी का 10 अंकों का पैन नंबर (PAN) ही आधिकारिक IEC कोड बन जाता है।
  • सरकारी फीस केवल ₹500 है। किसी बिचौलिए या अनधिकृत एजेंट को ₹3,000 से ₹5,000 देने की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • प्रमाण पत्र जारी होने के बाद हर साल 1 अप्रैल से 30 जून के बीच डीजीएफटी पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी को कन्फर्म करना कानूनी रूप से अनिवार्य है, अन्यथा कोड सस्पेंड हो जाता है।

आधिकारिक पोर्टल व संपर्क सूत्र:

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT): www.dgft.gov.in | भारतीय सीमा शुल्क पोर्टल (ICEGATE): www.icegate.gov.in | DGFT टोल-फ्री हेल्पलाइन: 1800-111-550 / 1800-572-1550 | ईमेल सहायता: dgftedi@nic.in

इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड (IEC) क्या है और भारत में यह किनके लिए अनिवार्य है?

इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड (Import Export Code - IEC) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade - DGFT) द्वारा विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) के तहत जारी किया जाने वाला एक मुख्य व्यावसायिक लाइसेंस है। विदेश व्यापार (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1992 की धारा 7 के तहत स्पष्ट रूप से प्रावधान है कि भारत का कोई भी व्यक्ति या संस्था बिना वैध आईईसी कोड के किसी भी वस्तु का वाणिज्यिक आयात या निर्यात नहीं कर सकती।

आधुनिक व्यवस्था में डीजीएफटी ने पूरी प्रक्रिया को पैन कार्ड (PAN) से जोड़ दिया है। यानी जिस नाम और पते पर आपका पैन कार्ड है, उसी के आधार पर इलेक्ट्रॉनिक आईईसी (e-IEC) जारी किया जाता है। एक बार जारी होने के बाद यह प्रमाण पत्र जीवनभर वैध रहता है और इसे किसी वार्षिक रिन्यूअल फीस की आवश्यकता नहीं होती।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आईईसी कोड की अनिवार्यता निम्नलिखित तीन स्तरों पर होती है:

  • भारतीय सीमा शुल्क (Customs Port Clearance): जब आपका माल किसी भारतीय बंदरगाह, हवाई अड्डे या आईसीडी (Inland Container Depot) पर पहुंचता है, तो कस्टम अधिकारी बिल ऑफ एंट्री (Bill of Entry) या शिपिंग बिल (Shipping Bill) पास करने के लिए सबसे पहले आईईसी कोड की जांच करते हैं।
  • विदेशी मुद्रा बैंक लेनदेन (Bank Foreign Remittance): जब कोई निर्यातक विदेशी ग्राहक से अमेरिकी डॉलर, यूरो या पाउंड में भुगतान प्राप्त करता है, या कोई आयातक विदेशी सप्लायर को पैसा भेजता है, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के फेमा (FEMA) नियमों के तहत बैंक को ई-बीआरसी (Electronic Bank Realisation Certificate - eBRC) जारी करने के लिए आईईसी की आवश्यकता होती है।
  • सरकारी निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं (Export Incentives): भारत सरकार द्वारा निर्यातकों को दिए जाने वाले टैक्स रिफंड जैसे RoDTEP (Remission of Duties and Taxes on Exported Products), RoSCTL, और ड्यूटी ड्रॉबैक (Duty Drawback) का लाभ उठाने के लिए भी आईईसी अनिवार्य शर्त है।

किसे IEC लेना जरूरी है और किन्हें मिलती है कानूनी छूट?

व्यापार शुरू करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि किन व्यावसायिक संस्थाओं के लिए आईईसी अनिवार्य है और किन परिस्थितियों में सरकार ने छूट दी है:

1. जिनके लिए IEC लेना अनिवार्य है:

  1. एकल स्वामित्व फर्म (Sole Proprietorship): यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी दुकान या ट्रेड नाम से सामान विदेशों में बेचना चाहता है।
  2. साझेदारी फर्म व एलएलपी (Partnership Firm & LLP): पंजीकृत या अपंजीकृत साझेदारी और सीमित दायित्व भागीदारी फर्म।
  3. प्राइवेट लिमिटेड व पब्लिक लिमिटेड कंपनियां (Pvt Ltd & Ltd Companies): कंपनी अधिनियम 2013 के तहत निगमित सभी कंपनियां।
  4. ट्रस्ट, सोसाइटी व हिंदू अविभाजित परिवार (HUF): कोई भी पंजीकृत सामाजिक संस्था या पारिवारिक व्यवसाय जो सीमा पार व्यापार करता है।
  5. ई-कॉमर्स रिटेल निर्यातक (Cross-Border E-commerce): जो उद्यमी Amazon Global Selling, eBay, Etsy या अपनी वेबसाइट के माध्यम से कूरियर द्वारा विदेशों में हस्तशिल्प, कपड़े या आभूषण बेचते हैं।

2. जिन्हें IEC लेने से कानूनी छूट प्राप्त है:

  • व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात (Personal Import): यदि कोई सामान्य नागरिक अपने व्यक्तिगत उपयोग, परिवार के सदस्यों या घरेलू उपभोग के लिए डाक या कूरियर से कोई विदेशी सामान मंगाता है, तो उसे आईईसी की आवश्यकता नहीं होती।
  • सरकारी मंत्रालय व विभाग: रक्षा मंत्रालय, केंद्रीय नागरिक उड्डयन या केंद्र सरकार द्वारा अधिकृत सार्वजनिक उपक्रमों को विशेष प्रावधानों के तहत छूट प्राप्त है।
  • नेपाल व म्यांमार सीमांत व्यापार: निर्धारित भूमि सीमा चौकियों से व्यक्तिगत सामान के सीमित आदान-प्रदान में छूट लागू होती है।
  • केवल घरेलू सेवा प्रदाता: जो व्यवसायी केवल भारत के भीतर सेवाएं देते हैं और जिनका विदेशी ग्राहकों से कोई लेनदेन नहीं है।

IEC कोड की मुख्य विशेषताएं, सरकारी नियम व समय सीमा

इंपोर्ट एक्सपोर्ट कोड के मुख्य वैधानिक नियमों और संचालन शर्तों का विवरण नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में देखें:

विशेषता / नियम का नाम सरकारी प्रावधान व मानक आवश्यक दस्तावेज व माध्यम पोर्टल व शुल्क काम की व्यावहारिक सलाह
प्रमाण पत्र की संरचना 10 अंकों का अल्फान्यूमेरिक कोड (समान पैन नंबर आधारित) आयकर विभाग द्वारा जारी मूल पैन कार्ड dgft.gov.in / ₹500 प्रोप्राइटर का व्यक्तिगत पैन ही फर्म का अधिकृत पैन बनता है।
वैधता अवधि (Validity) आजीवन (Lifetime) वैध, जब तक खुद सरेंडर या रद्द न किया जाए वार्षिक रिन्यूअल फीस शून्य (निशुल्क) DGFT ऑनलाइन सिस्टम हर साल अप्रैल से जून के बीच मुफ्त डेटा कन्फर्मेशन करना न भूलें।
सत्यापन विधि (Authentication) आधार ओटीपी (Aadhaar OTP) या क्लास-3 डिजिटल सिग्नेचर (DSC) आधार से लिंक मोबाइल नंबर या यूएसबी टोकन डीएससी डीजीएफटी ई-हस्ताक्षर मॉड्यूल प्रोप्राइटरशिप के लिए आधार ओटीपी सबसे सरल, निशुल्क और तुरंत काम करता है।
बैंक खाता पूर्व-सत्यापन खाता धारक का नाम और पैन आयकर व पीएफएमएस डाटा से मेल खाना चाहिए कैंसिल्ड चेक (Cancelled Cheque) या बैंक प्रमाण पत्र PFMS ऑटोमेटेड वैलिडेशन चेक पर खाता धारक/फर्म का नाम और खाता संख्या कंप्यूटर से मुद्रित होनी चाहिए।
कस्टम्स लिंकेज (ICEGATE) भारतीय बंदरगाहों पर बिल ऑफ एंट्री और शिपिंग बिल फाइलिंग हेतु अनिवार्य आईईसी प्रमाण पत्र + बैंक एडी कोड पत्र icegate.gov.in पोर्टल पहला शिपमेंट भेजने से कम से कम 7 दिन पहले पोर्ट रजिस्ट्रेशन पूरा कर लें।

ऑनलाइन आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट

डीजीएफटी पोर्टल पर आईईसी के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने से पहले निम्नलिखित दस्तावेजों की स्पष्ट स्कैन कॉपी (पीडीएफ या जेपीईजी, अधिकतम 5 एमबी साइज) तैयार रखें:

  1. आवेदक या संस्था का पैन कार्ड (PAN Card): प्रोप्राइटरशिप के मामले में प्रोप्राइटर का व्यक्तिगत पैन, जबकि कंपनी या पार्टनरशिप के मामले में संस्था का पैन कार्ड।
  2. पहचान व पते का प्रमाण (Identity & Address Proof):
    • आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या ड्राइविंग लाइसेंस।
    • आधार कार्ड में सक्रिय मोबाइल नंबर लिंक होना चाहिए ताकि ओटीपी प्राप्त हो सके।
  3. व्यावसायिक पते का प्रमाण (Business Address Proof):
    • यदि परिसर खुद का है: बिजली बिल (Electricity Bill), पानी का बिल, संपत्ति कर रसीद (Property Tax Receipt), या सेल डीड।
    • यदि परिसर किराए पर है: वैध रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) तथा साथ में मकान मालिक के नाम का हालिया बिजली का बिल और मकान मालिक का नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC)।
  4. बैंक खाते का साक्ष्य (Bank Account Proof - कोई एक):
    • फर्म या कंपनी के नाम का कैंसिल्ड चेक (Cancelled Cheque), जिसमें खाता धारक का नाम, खाता संख्या और आईएफएससी कोड स्पष्ट मुद्रित हो।
    • या बैंक प्रबंधक द्वारा हस्ताक्षरित और मुहर लगा बैंक प्रमाण पत्र (Bank Certificate as per DGFT Format ANF-2A)।
  5. संस्था के कानूनी दस्तावेज (संवैधानिक स्थिति के अनुसार):
    • कंपनी के लिए: सर्टिफिकेट ऑफ इनकॉर्पोरेशन (CIN), एमओए और एओए (MOA & AOA), बोर्ड प्रस्ताव।
    • एलएलपी/पार्टनरशिप के लिए: पंजीकृत पार्टनरशिप डीड या एलएलपी एग्रीमेंट।
    • ट्रस्ट के लिए: ट्रस्ट डीड व पंजीकरण प्रमाण पत्र।

DGFT पोर्टल पर IEC ऑनलाइन आवेदन करने की 6-चरणीय प्रक्रिया

घर बैठे कंप्यूटर से आईईसी कोड बनाने के 6 स्पष्ट और आसान चरण निम्नलिखित हैं:

  1. डीजीएफटी पोर्टल पर यूजर रजिस्ट्रेशन करें: आधिकारिक पोर्टल www.dgft.gov.in पर जाएं। होमपेज पर ऊपर दाईं ओर 'Register' बटन पर क्लिक करें। अपना नाम, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर, राज्य, जिला और पिनकोड भरें। यूजर टाइप में 'Importer/Exporter' चुनें। मोबाइल और ईमेल पर आए ओटीपी को दर्ज करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
  2. लॉगिन करें और 'Apply for IEC' चुनें: अपने यूजरनेम और पासवर्ड से लॉगिन करें। डैशबोर्ड पर 'Services' टैब में जाएं, फिर 'IEC Profile Management' पर क्लिक करें और "Apply for IEC" विकल्प को चुनें।
  3. मूल सामान्य जानकारी (General Information) भरें: अपनी संस्था की प्रकृति (Entity Type - जैसे Individual, Partnership, Pvt Ltd) चुनें। पैन कार्ड के अनुसार अपना पूरा नाम, जन्म तिथि या निगमन तिथि और पैन नंबर दर्ज करें। सिस्टम सीबीडीटी (CBDT) डेटाबेस से आपके पैन का तुरंत ऑनलाइन सत्यापन करेगा।
  4. व्यावसायिक पता और बैंक विवरण भरें: अपना पूरा व्यावसायिक पता, पिनकोड और संपर्क सूत्र भरें। इसके बाद अपने बैंक का आईएफएससी कोड (IFSC), बैंक शाखा का नाम और खाता संख्या दर्ज करें। कैंसिल्ड चेक या बैंक लेटर की स्पष्ट स्कैन कॉपी अपलोड करें।
  5. निदेशक/पार्टनर का विवरण दर्ज करें: यदि आप प्रोप्राइटर हैं तो स्वयं का विवरण, और यदि कंपनी/पार्टनरशिप है तो सभी निदेशकों या साझेदारों के नाम, पैन और पते का विवरण दर्ज करें।
  6. सरकारी फीस जमा करें और ई-हस्ताक्षर करें: फॉर्म का पूर्वावलोकन (Preview) जांचें। भारतकोश (BharatKosh) पेमेंट गेटवे के माध्यम से ₹500 की ऑनलाइन फीस का भुगतान करें (क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग द्वारा)। भुगतान सफल होने के बाद आधार ओटीपी (Aadhaar e-Sign) या क्लास-3 डीएससी के माध्यम से फॉर्म को डिजिटल हस्ताक्षर करें। तुरंत आपका 10 अंकों का e-IEC प्रमाण पत्र स्क्रीन पर जनरेट हो जाएगा, जिसे आप पीडीएफ में डाउनलोड कर सकते हैं।

आवेदन चरण, पोर्टल विवरण, सत्यापन विधि व सावधानियां

पूरी प्रक्रिया की तकनीकी जांच और सावधानियों का चरणवार ब्यौरा नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में देखें:

चरण संख्या पोर्टल प्रक्रिया व मॉड्यूल आवश्यक डेटा / इनपुट सत्यापन विधि महत्वपूर्ण तकनीकी सावधानी
चरण 1 डीजीएफटी यूजर आईडी निर्माण मोबाइल, ईमेल, पिनकोड दोहरा ओटीपी (Email + SMS) केवल अपना निजी मोबाइल और ईमेल ही दें, एजेंट का नहीं।
चरण 2 पैन कार्ड ऑनलाइन मिलान 10 अंकों का पैन व जन्म तिथि सीबीडीटी एपीआई ऑटो-चेक पैन में नाम का एक भी अक्षर पोर्टल के नाम से अलग नहीं होना चाहिए।
चरण 3 व्यावसायिक पते का दस्तावेजीकरण बिजली बिल / रेंट एग्रीमेंट दस्तावेज अपलोड (Max 5MB) बिजली बिल 2 महीने से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए।
चरण 4 बैंक विवरण व पीएफएमएस चेक खाता संख्या, आईएफएससी कोड PFMS ऑटो-सत्यापन कैंसिल्ड चेक पर नाम हाथ से लिखा हुआ नहीं होना चाहिए।
चरण 5 सरकारी फीस भुगतान ₹500 शुल्क राशि भारतकोश / UPI / नेट बैंकिंग भुगतान के दौरान ब्राउज़र को रिफ्रेश या बैक न करें।
चरण 6 ई-साइन व आईईसी डाउनलोड आधार नंबर या डीएससी टोकन UIDAI आधार ई-हस्ताक्षर सत्यापन होते ही तुरंत पीडीएफ सर्टिफिकेट डाउनलोड कर सुरक्षित रखें।

कस्टम्स क्लीयरेंस हेतु ICEGATE पोर्टल और AD कोड (Authorised Dealer Code) रजिस्ट्रेशन

अधिकांश नए निर्यातक आईईसी कोड बनवाने के बाद सोचते हैं कि वे तुरंत माल एक्सपोर्ट कर सकते हैं। परंतु वास्तव में माल पोर्ट से बाहर भेजने के लिए एक अनिवार्य कदम बाकी रहता है, जिसे ICEGATE पोर्ट रजिस्ट्रेशन और एडी कोड लिंकेज कहा जाता है:

  1. एडी कोड (Authorised Dealer Code) क्या है? यह आपके बैंक द्वारा जारी 14 अंकों का एक विशेष कोड होता है। यह कोड प्रमाणित करता है कि आपके बैंक को विदेशी मुद्रा लेनदेन करने का अधिकार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्राप्त है।
  2. बैंक से एडी कोड लेटर प्राप्त करना: अपने बैंक शाखा प्रबंधक के पास जाएं और डीजीएफटी/कस्टम्स निर्धारित प्रारूप में 'AD Code Letter' जारी करने का अनुरोध करें। पत्र पर बैंक का आधिकारिक लेटरहेड, शाखा का 14 अंकों का एडी कोड और बैंक की मोहर व हस्ताक्षर होते हैं।
  3. ICEGATE पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के आधिकारिक पोर्टल www.icegate.gov.in पर जाएं। वहां अपनी फर्म का खाता बनाएं। इसके लिए क्लास-3 डिजिटल सिग्नेचर (DSC) होना अनिवार्य है।
  4. कस्टम पोर्ट पर एडी कोड मैप करना: आप जिस किसी भी बंदरगाह (जैसे न्हावा शेवा मुंबई, मुंद्रा पोर्ट गुजरात, चेन्नई पोर्ट) या हवाई अड्डे (जैसे दिल्ली आईजीआई कार्गो, बेंगलुरु एयरपोर्ट) से अपना माल भेजना चाहते हैं, उस विशेष पोर्ट कोड (जैसे INNSA1, INDEL4) के साथ अपना एडी कोड ऑनलाइन लिंक करें। कस्टम्स अधिकारी द्वारा अप्रूवल मिलने के 24 से 48 घंटे बाद आप कानूनी रूप से शिपिंग बिल फाइल कर सकते हैं।

प्रतिवर्ष अप्रैल से जून के बीच IEC का वार्षिक अपडेट (Annual Validation) क्यों अनिवार्य है?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की अधिसूचना संख्या 58/2015-2020 के अनुसार भारत में प्रत्येक आईईसी धारक के लिए एक बेहद सख्त कानूनी नियम लागू किया गया है:

सालाना अपडेट का नियम (Mandatory Annual IEC Update):

प्रत्येक आईईसी कोड धारक को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 30 जून के बीच डीजीएफटी पोर्टल पर जाकर अपने विवरण का इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन करना अनिवार्य है। भले ही आपके पते, बैंक खाते या निदेशकों में कोई भी बदलाव न हुआ हो, फिर भी आपको पोर्टल पर लॉगिन करके 'Confirm Details' पर क्लिक करना होगा। यह प्रक्रिया 100% निशुल्क है।

यदि कोई निर्यातक या आयातक 30 जून तक अपना वार्षिक अपडेट पूरा नहीं करता है, तो डीजीएफटी का कंप्यूटर सिस्टम 1 जुलाई को उस आईईसी कोड को स्वचालित रूप से 'डी-एक्टिवेट' (De-activate / Suspend) कर देता है। कोड निष्क्रिय होते ही कस्टम्स पर आपका माल रुक जाएगा और बैंक किसी भी विदेशी भुगतान को रोक देगा। निष्क्रिय कोड को दोबारा सक्रिय (Re-activate) करने के लिए आपको पोर्टल पर जाकर अपडेट करना होगा, जिसके बाद ही कोड पुनः चालू होता है।

जीएसटी के तहत बिना टैक्स निर्यात हेतु लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LUT) और निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं

भारत सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कर छूट और प्रोत्साहन देती है। नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में प्रमुख योजनाओं और प्रक्रियाओं का लाभ समझें:

योजना / सुविधा का नाम लाभ व वित्तीय छूट का विवरण पात्रता व अनुपालन नियम नोडल विभाग / पोर्टल निर्यातक के लिए व्यावहारिक टिप
जीएसटी एलयूटी (LUT Filing) बिना आईजीएसटी (IGST) भुगतान किए 0% टैक्स पर सामान या सेवा का निर्यात वैध जीएसटी और आईईसी धारक, कोई टैक्स डिफॉल्ट नहीं gst.gov.in (फॉर्म RFD-11) हर वित्तीय वर्ष शुरू होने पर (अप्रैल में) नया एलयूटी ऑनलाइन अवश्य भरें।
RoDTEP योजना कच्चे माल व बिजली पर लगे अन-रिफंडेबल करों का 0.5% से 4.3% तक रिफंड शिपिंग बिल में RoDTEP का क्लेम 'Y' चिन्हित होना चाहिए ICEGATE ई-स्क्रिप लेजर स्क्रिप का उपयोग भविष्य के आयात शुल्क चुकाने में या बाजार में बेचकर किया जा सकता है।
ड्यूटी ड्रॉबैक (Duty Drawback) निर्यात माल के उत्पादन में प्रयुक्त आयातित इनपुट पर चुकाई गई कस्टम ड्यूटी की वापसी ऑल इंडस्ट्री रेट्स (AIR) के अनुसार स्वचालित क्रेडिट भारतीय सीमा शुल्क (Customs) पैसा सीधे आपके उस बैंक खाते में आता है जो कस्टम्स से मैप होता है।
ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट प्रमोशन कूरियर और डाक निर्यात सीमा को बढ़ाकर ₹10 लाख प्रति कंसाइनमेंट किया गया कूरियर बैगिंग बिल (CSB-V) फाइलिंग अनिवार्य कूरियर टर्मिनल / इंडिया पोस्ट डाकघर निर्यात केंद्रों (DNK) पर विशेष लॉजिस्टिक्स सहायता उपलब्ध है।
ईपीसीजी योजना (EPCG Scheme) निर्यात उत्पादन हेतु अत्याधुनिक पूंजीगत मशीनरी का 0% कस्टम ड्यूटी पर आयात 6 वर्षों में बचाई गई ड्यूटी का 6 गुना निर्यात दायित्व पूरा करना DGFT रीजनल अथॉरिटी (RA) यह योजना भारी विनिर्माण और कपड़ा उद्योग के लिए अत्यंत लाभकारी है।

आवेदन में आम त्रुटियां, बैंक पीएफएमएस रिजेक्शन और उनके सटीक समाधान

डीजीएफटी पोर्टल पर आईईसी आवेदन अस्वीकृत होने या तकनीकी अड़चन आने पर नागरिकों द्वारा अपनाए जाने वाले समाधान निम्नलिखित हैं:

1. PFMS बैंक सत्यापन त्रुटि (Name Mismatch in Bank Account):

पोर्टल पर सबसे आम समस्या बैंक सत्यापन फेल होना है। ऐसा तब होता है जब पैन कार्ड पर आपका नाम 'Ramesh Kumar' है, परंतु बैंक खाते में केवल 'Ramesh K' दर्ज है। समाधान: बैंक जाकर अपने खाते में नाम ठीक करवाएं ताकि वह पैन से 100% मेल खाए। साथ ही कैंसिल्ड चेक की जगह डीजीएफटी प्रारूप ANF-2A में बैंक से लेटरहेड पर मुहरयुक्त बैंक प्रमाण पत्र अपलोड करें।

2. बिजली बिल या रेंट एग्रीमेंट अस्वीकृत होना:

यदि अपलोड किया गया बिजली का बिल अस्पष्ट है या 2 महीने से अधिक पुराना है, तो आवेदन पर डेफिशिएंसी (Deficiency) आ जाती है। यदि परिसर किराए पर है, तो रेंट एग्रीमेंट नोटरी या सब-रजिस्ट्रार से सत्यापित होना चाहिए और उसके साथ मकान मालिक का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) तथा मालिक का बिजली बिल एक ही संयुक्त पीडीएफ फाइल में जोड़कर अपलोड करें।

3. आधार ई-साइन (Aadhaar e-Sign) में तकनीकी रुकावट:

यदि आधार ई-साइन के समय ओटीपी नहीं आ रहा है या एरर आ रहा है, तो सुनिश्चित करें कि ब्राउज़र का पॉप-अप ब्लॉकर बंद हो। यदि समस्या बनी रहे तो क्लास-3 डीएससी (Digital Signature Certificate) का उपयोग करें, या 'Incognito Window' में कैश साफ करके दोबारा प्रयास करें।

अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. क्या एक व्यक्ति या फर्म के पास एक से अधिक IEC कोड हो सकते हैं?

बिल्कुल नहीं। डीजीएफटी के स्पष्ट नियमों के अनुसार 'एक पैन - एक आईईसी' (One PAN - One IEC) का कड़ा नियम लागू है। एक पैन कार्ड पर पूरे देश में केवल एक ही आईईसी कोड जारी किया जा सकता है। यदि आपकी कई शाखाएं, कारखाने या अलग-अलग राज्यों में व्यापारिक प्रतिष्ठान हैं, तो आप उसी मुख्य आईईसी कोड के तहत पोर्टल पर 'Branch Addition' के माध्यम से अन्य शाखाएं जोड़ सकते हैं। एक से अधिक आईईसी कोड लेना अवैध है।

Q2. क्या IEC कोड लेने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन (GST Registration) होना अनिवार्य है?

वस्तुओं (Goods) के वाणिज्यिक आयात-निर्यात के लिए जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य होता है। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति या फर्म केवल 'सेवाओं का निर्यात' (Export of Services - जैसे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, फ्रीलांस कंसल्टेंसी, डिजिटल मार्केटिंग) करती है और उसका वार्षिक टर्नओवर ₹20 लाख की छूट सीमा से कम है, तो वह बिना जीएसटी के भी केवल अपने पैन कार्ड पर आईईसी कोड प्राप्त कर सकती है।

Q3. क्या आईईसी कोड में संशोधन (Modification) करने पर कोई फीस लगती है?

यदि आप अपने आईईसी कोड में पता, बैंक खाता, निदेशक या फोन नंबर बदलते हैं, तो डीजीएफटी पोर्टल पर संशोधन के लिए मात्र ₹200 की सरकारी फीस लगती है। हालांकि, वित्तीय वर्ष के अप्रैल से जून के बीच यदि आप केवल सामान्य वार्षिक सत्यापन (Annual Confirmation) करते हैं और कोई विवरण नहीं बदलते, तो वह प्रक्रिया 100% निशुल्क होती है।

Q4. क्या बचत खाते (Savings Bank Account) के आधार पर आईईसी कोड बन सकता है?

एकल स्वामित्व फर्म (Individual/Proprietor) के मामले में आवेदक अपने व्यक्तिगत बचत खाते (Savings Account) के आधार पर आईईसी के लिए आवेदन कर सकता है। परंतु व्यावसायिक दृष्टिकोण से विदेशी मुद्रा प्राप्त करने, फेमा अनुपालन और बैंक चार्जेज से बचने के लिए फर्म के नाम से चालू खाता (Current Account) खुलवाना ही सबसे बेहतर और सुरक्षित विकल्प होता है। पार्टनरशिप या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए चालू खाता अनिवार्य है।

Q5. क्या आईईसी धारक को कोई नियमित मासिक या वार्षिक रिटर्न दाखिल करना पड़ता है?

नहीं। आईईसी कोड के तहत जीएसटी या आयकर की तरह कोई नियमित मासिक या त्रैमासिक रिटर्न दाखिल नहीं करना होता। आपको केवल हर साल 1 अप्रैल से 30 जून के बीच डीजीएफटी पोर्टल पर जाकर एक बार ऑनलाइन डेटा कंफर्म करना होता है। यदि आपने उस वर्ष कोई आयात-निर्यात नहीं भी किया है, तो भी कोई जुर्माना नहीं लगता और कोड सक्रिय बना रहता है।

Q6. क्या पुराना कागजी आईईसी कोड नए पोर्टल पर मान्य है?

यदि आपके पास पुराना कागजी आईईसी कोड था (जो पैन आधारित नहीं था), तो आपको डीजीएफटी पोर्टल पर जाकर 'Link Old IEC to PAN' विकल्प के तहत अपने डिजिटल सिग्नेचर या आधार से उसे अपने पैन से लिंक करके नया इलेक्ट्रॉनिक e-IEC जारी कराना होगा। पुराने बिना लिंक वाले कोड अब कस्टम्स और बैंकों द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते।

विज्ञापन / SPONSORED

क्या यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही?

अपने दोस्तों, परिजनों और ग्रुप्स में इस महत्वपूर्ण जानकारी को तुरंत शेयर करें:

💬 WhatsApp पर शेयर करें 📢 चैनल जॉइन करें
💬 WhatsApp शेयर 🔔 WhatsApp चैनल जॉइन करें