epfo-pension ⏱️ 15 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-24 21:28:00

पीएफ निकालने पर कितना टैक्स कटता है? Form 15G/15H भरने के नियम, 5 साल की सर्विस और ₹2.5 लाख ब्याज टैक्स कानून

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श्रम एवं पेंशन विधिक डेस्क
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GoForDigitalIndia संपादकीय टीम — सरकारी योजनाओं, भर्ती व तकनीकी विषयों के विश्लेषक।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

आयकर अधिनियम की धारा 192A के अनुसार यदि किसी कर्मचारी की कुल संगठित सेवा अवधि 5 वर्ष (60 महीने) से कम है और वह ₹50,000 या उससे अधिक का पीएफ निकालता है, तो पैन कार्ड लिंक होने पर 10% और पैन कार्ड लिंक न होने पर अधिकतम 34.608% (Maximum Marginal Rate) की दर से टीडीएस काटा जाता है। यदि चालू वित्त वर्ष में आपकी कुल कर योग्य आय बेसिक छूट सीमा से कम है, तो ऑनलाइन फॉर्म 15G (वरिष्ठ नागरिकों के लिए 15H) अपलोड करके टीडीएस को शून्य (Zero TDS) कराया जा सकता है। 5 साल की सेवा पूरी होने पर पूरी निकासी शत-प्रतिशत टैक्स-फ्री होती है।

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पीएफ निकासी पर टैक्स (TDS) कब कटता है और कब नहीं?

त्वरित उत्तर: सामान्यतः कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को 'EEE' (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी की बचत माना जाता है, जिसमें निवेश पर छूट, ब्याज पर छूट और निकासी पर छूट मिलती है। लेकिन यह कर-मुक्त लाभ केवल तभी लागू होता है जब कर्मचारी ने संगठित क्षेत्र में कम से कम 5 वर्ष (60 महीने) की निरंतर सेवा (Continuous Service) पूरी कर ली हो।

यदि कोई कर्मचारी 5 वर्ष की सेवा पूरी होने से पहले नौकरी छोड़कर अपना पूरा पीएफ बैलेंस (Form 19) निकालता है और निकाली जाने वाली कुल राशि ₹50,000 या उससे अधिक है, तो ईपीएफओ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 192A (Section 192A) के तहत भुगतान करने से पहले ही टीडीएस काट लेता है। यदि पैन कार्ड लिंक नहीं है, तो यह कटौती 34.608% तक हो सकती है, जिससे आपके लाखों रुपये एक झटके में कट सकते हैं।

🚨 पैन कार्ड (PAN) लिंक न होने पर 34.608% का विनाशकारी झटका

यदि आपके यूएएन खाते में आपका वैध पैन कार्ड लिंक और वेरिफाइड नहीं है, तो ईपीएफओ धारा 206AA के तहत फ्लैट 34.608% (सर्वोच्च सीमांत दर) की दर से टीडीएस काट लेता है। यानी आपके ₹1,00,000 के फंड में से सीधे ₹34,600 कट जाएंगे और आपको मात्र ₹65,400 मिलेंगे! इसलिए क्लेम भरने से पहले यूएएन में पैन कार्ड सत्यापित होना जीवन-मरण का सवाल है।

पीएफ निकासी पर टीडीएस दरें और शर्तें: 5-कॉलम तुलनात्मक तालिका

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नीचे दी गई तालिका से समझें कि विभिन्न परिस्थितियों में कितना टैक्स कटता है और उससे कैसे बचा जा सकता है:

सेवा की कुल अवधि निकासी राशि (Withdrawal Amount) पैन कार्ड की स्थिति फॉर्म 15G / 15H की स्थिति लागू होने वाली टीडीएस (TDS) दर
5 वर्ष या अधिक (5+ Years) कोई भी राशि (असीमित) पैन लिंक हो या न हो आवश्यकता नहीं 0% (शत-प्रतिशत कर-मुक्त)
5 वर्ष से कम (< 5 Years) ₹50,000 से कम (< ₹50K) पैन लिंक हो या न हो आवश्यकता नहीं 0% (कोई टीडीएस नहीं)
5 वर्ष से कम (< 5 Years) ₹50,000 या अधिक पैन लिंक और वेरिफाइड जमा नहीं किया 10% टीडीएस
5 वर्ष से कम (< 5 Years) ₹50,000 या अधिक पैन लिंक और वेरिफाइड वैध Form 15G/15H अपलोड किया 0% (शून्य टीडीएस)
5 वर्ष से कम (< 5 Years) ₹50,000 या अधिक पैन लिंक नहीं है (No PAN) फॉर्म 15G अमान्य 34.608% (अधिकतम सीमांत दर)

किन विशेष परिस्थितियों में 5 साल से कम सेवा पर भी टीडीएस नहीं कटता?

आयकर कानून के नियम 8 (Rule 8 of Part A of Fourth Schedule) के तहत यदि 5 वर्ष से कम सेवा में नौकरी निम्नलिखित कारणों से छूटी है, तो कोई टीडीएस नहीं कटता और पूरी निकासी टैक्स-फ्री होती है:

  1. कर्मचारी का खराब स्वास्थ्य (Ill-health): यदि कर्मचारी किसी गंभीर बीमारी या शारीरिक अशक्तता के कारण नौकरी जारी रखने में असमर्थ हो गया हो।
  2. कंपनी का बंद होना (Discontinuation of Business): यदि कंपनी दिवालिया हो गई, कारखाना बंद हो गया या नियोक्ता ने काम पूरी तरह समाप्त कर दिया।
  3. कर्मचारी के नियंत्रण से परे कोई कारण (Reasons beyond Control): छंटनी (Retrenchment) या परियोजना का अप्रत्याशित रूप से समाप्त हो जाना।
  4. नौकरी बदलने पर फंड ट्रांसफर: यदि आपने पुरानी कंपनी का पैसा निकाला नहीं, बल्कि नई कंपनी में ट्रांसफर कर लिया, तो पुरानी सेवा नई सेवा में जुड़ जाती है और कोई टैक्स नहीं कटता।

फॉर्म 15G और 15H क्या है और इसे ऑनलाइन कैसे भरें?

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फॉर्म 15G (60 वर्ष से कम आयु के नागरिकों के लिए) और फॉर्म 15H (60 वर्ष या अधिक के वरिष्ठ नागरिकों के लिए) एक स्व-घोषणा पत्र (Self-Declaration Form) होता है। इसके जरिए आप सरकार को बताते हैं कि चालू वित्तीय वर्ष में आपकी कुल अनुमानित आय मूल कर-मुक्त सीमा (Basic Exemption Limit) से कम है, इसलिए आपके पीएफ पर टीडीएस न काटा जाए।

फॉर्म 15G भरने की चरणबद्ध गाइड:

  • फॉर्म डाउनलोड करें: आयकर विभाग की वेबसाइट या ईपीएफओ पोर्टल से फॉर्म 15G का नवीनतम प्रारूप डाउनलोड करें।
  • पार्ट-1 (Part I) भरें:
    • कॉलम 1 में अपना नाम और कॉलम 2 में अपना पैन नंबर लिखें।
    • कॉलम 3 में 'Individual' चुनें और कॉलम 4 में चालू वित्तीय वर्ष (उदा. 2026-2027) दर्ज करें।
    • कॉलम 15 में लिखें: 'Estimated income for which declaration is made' - यहां अपने पीएफ विड्रॉल की अनुमानित राशि लिखें।
    • कॉलम 16 में चालू वर्ष की अपनी कुल अनुमानित आय (पीएफ राशि सहित) लिखें।
  • हस्ताक्षर और पीडीएफ निर्माण: फॉर्म के नीचे अपने हस्ताक्षर करें। दोनों पन्नों को एक साथ स्कैन करके एक सिंगल PDF फाइल (साइज अधिकतम 1 MB) बनाएं।
  • पोर्टल पर अपलोड करें: यूएएन पोर्टल पर फॉर्म 19 भरते समय स्क्रीन पर 'Upload Form 15G' का विकल्प आता है; वहां ब्राउज करके इस पीडीएफ को अटैच करें।

💡 सालाना ₹2.5 लाख से अधिक पीएफ अंशदान पर नया ब्याज टैक्स (Section 10(11)/(12))

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के 2021 के संशोधन के अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने भविष्य निधि (EPF + VPF) में एक वित्तीय वर्ष में ₹2,50,000 (ढाई लाख रुपये) से अधिक का व्यक्तिगत अंशदान करता है, तो ₹2.5 लाख से ऊपर की अतिरिक्त राशि पर मिलने वाला ब्याज अब कर-मुक्त नहीं रहता। ईपीएफओ ने अब पासबुक में दो अलग-अलग लेजर बना दिए हैं: 'Taxable Component' और 'Non-Taxable Component'। टैक्सेबल हिस्से पर अर्जित ब्याज कर्मचारी के सामान्य आयकर स्लैब के अनुसार कर-योग्य होता है और उस पर हर साल टीडीएस काटा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs - PAA)

1. क्या अलग-अलग 3 कंपनियों में 2-2 साल की नौकरी मिलाकर 5 साल माने जाएंगे?

हां, बिल्कुल! आयकर कानून में '5 वर्ष की निरंतर सेवा' का अर्थ किसी एक ही कंपनी में 5 साल होना नहीं है। यदि आपने कंपनी 'A' में 2 साल, कंपनी 'B' में 2 साल और कंपनी 'C' में 2 साल काम किया और हर बार नौकरी बदलते समय अपना पीएफ ट्रांसफर (Form 13) कराया, तो आपकी कुल सेवा 6 वर्ष मानी जाएगी और अंतिम निकासी पूरी तरह कर-मुक्त (Zero Tax) होगी।

2. अगर मेरा गलती से टीडीएस कट गया है, तो क्या वह पैसा मुझे वापस मिल सकता है?

हां, यदि आपकी कुल वार्षिक आय कर-योग्य सीमा से कम थी और ईपीएफओ ने गलती से टीडीएस काट लिया, तो घबराएं नहीं। ईपीएफओ द्वारा काटा गया टीडीएस आपके फॉर्म 26AS और AIS (Annual Information Statement) में दिखाई देगा। जब आप चालू वित्त वर्ष का आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करेंगे, तो आप पूरे टीडीएस के रिफंड का दावा कर सकते हैं। आयकर विभाग ब्याज सहित वह पैसा सीधे आपके बैंक खाते में वापस भेज देगा।

3. क्या पीएफ एडवांस (Form 31) निकालने पर भी 5 साल की सेवा की शर्त लागू होती है?

नहीं, धारा 192A केवल 'फाइनल विड्रॉल' (Form 19) पर लागू होती है। नौकरी में रहते हुए बीमारी, शादी या मकान के लिए फॉर्म 31 से निकाला गया कोई भी एडवांस पूरी तरह गैर-कर योग्य होता है; भले ही आपकी सेवा केवल 6 महीने की ही क्यों न हो, एडवांस पर कभी कोई टीडीएस नहीं कटता।

4. पेंशन (EPS - Form 10C) का पैसा निकालने पर क्या कोई टीडीएस कटता है?

नहीं, 10 वर्ष से कम की सेवा में फॉर्म 10C के तहत मिलने वाले पेंशन विड्रॉल बेनिफिट (Lump sum Withdrawal) पर ईपीएफओ कोई टीडीएस नहीं काटता। हालांकि, इस राशि को आयकर नियमों के अनुसार 'वेतन के एवज में लाभ' माना जाता है और इसे अपने आईटीआर में उचित रूप से दर्शाना चाहिए।

5. क्या फॉर्म 15G गलत भरने पर कोई कानूनी पेनल्टी लग सकती है?

हां, आयकर अधिनियम की धारा 277 के तहत यदि कोई व्यक्ति झूठी घोषणा करता है कि उसकी आय कर-योग्य सीमा से कम है जबकि वास्तव में उसकी आय टैक्स स्लैब में आती है, तो यह जानबूझकर कर चोरी का संज्ञेय अपराध माना जाता है, जिसमें जुर्माना और कारावास का प्रावधान है। इसलिए फॉर्म 15G केवल तभी भरें जब आपकी वास्तविक कुल आय बेसिक छूट सीमा से कम हो।

6. अगर मेरी कुल आय टैक्स स्लैब में आती है, तो क्या मैं टीडीएस से बच सकता हूं?

यदि आपकी वार्षिक आय कर-योग्य सीमा से अधिक है, तो आप कानूनी रूप से फॉर्म 15G नहीं भर सकते। ऐसे में आपके पीएफ पर 10% टीडीएस कटना अनिवार्य है। इस टैक्स से बचने का एकमात्र कानूनी और सुरक्षित तरीका यह है कि आप पीएफ का पैसा न निकालें, बल्कि नई कंपनी में ट्रांसफर करा लें जिससे आपका फंड बढ़ता रहेगा और 5 साल पूरे होने पर भविष्य की पूरी निकासी शून्य टैक्स पर होगी।

🧮 पीएफ के 4 घटकों का विस्तृत गणित: टैक्स कैसे कैल्कुलेट होता है?

जब 5 साल से कम सेवा में पीएफ निकाला जाता है, तो ईपीएफओ आपके पूरे बैलेंस को 4 अलग-अलग लेजर्स में बांटकर टैक्स की गणना करता है:

पीएफ बैलेंस का घटक घटक का विवरण 5 साल से कम सेवा में टैक्स नियम आईटीआर में किस हेड के तहत कर लगेगा?
1. कर्मचारी अंशदान (Employee Contribution) हर महीने आपके वेतन से कटा 12% मूल पैसा यदि पूर्व में धारा 80C की छूट ली थी तो पूरी तरह कर-योग्य; अन्यथा टैक्स-फ्री वेतन से आय (Income from Salary)
2. कर्मचारी ब्याज (Employee Interest) कर्मचारी अंशदान पर सरकार द्वारा दिया गया ब्याज शत-प्रतिशत कर-योग्य (100% Taxable) अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources)
3. नियोक्ता अंशदान (Employer Contribution) कंपनी द्वारा जमा किया गया 3.67% पीएफ हिस्सा शत-प्रतिशत कर-योग्य (100% Taxable) वेतन के एवज में लाभ (Profits in lieu of Salary)
4. नियोक्ता ब्याज (Employer Interest) कंपनी अंशदान पर सरकार द्वारा अर्जित ब्याज शत-प्रतिशत कर-योग्य (100% Taxable) अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources)

🌍 अनिवासी भारतीयों (NRI) के लिए पीएफ निकासी पर टीडीएस: धारा 195 के कड़े नियम

यदि कोई कर्मचारी विदेश में नौकरी के लिए शिफ्ट हो गया है और उसका टैक्स स्टेटस Non-Resident Indian (NRI) हो गया है, तो उसके लिए आयकर नियम सामान्य नागरिकों से अत्यधिक कड़े होते हैं:

  • धारा 195 के तहत 30% फ्लैट टीडीएस: एनआरआई द्वारा 5 साल से पहले पीएफ निकालने पर धारा 192A के बजाय धारा 195 लागू होती है। इसके तहत बिना किसी ₹50,000 की छूट सीमा के, सीधे 30% बेस टैक्स + अधिभार (Surcharge) + 4% सेस काटकर लगभग 31.2% से 35% तक टीडीएस काट लिया जाता है।
  • फॉर्म 15G एनआरआई के लिए अमान्य: आयकर अधिनियम के तहत कोई भी एनआरआई नागरिक फॉर्म 15G या 15H जमा नहीं कर सकता।
  • दोहरे कराधान से बचाव (DTAA Benefit): यदि भारत और उस विदेशी देश के बीच दोहरा कराधान परिहार समझौता (DTAA) है, तो एनआरआई कर्मचारी टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) और फॉर्म 10F जमा करके कम टीडीएस दर का लाभ ले सकता है।

💡 वीपीएफ (VPF) में निवेश करने वालों के लिए टैक्स प्लानिंग

स्वैच्छिक भविष्य निधि (Voluntary Provident Fund - VPF) में आप अपने बेसिक का 100% तक जमा कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि कर्मचारी अंशदान (EPF + VPF) मिलाकर ₹2.5 लाख की वार्षिक सीमा पार होते ही अतिरिक्त ब्याज पर टैक्स कटना शुरू हो जाएगा। यदि आपका टैक्स स्लैब 30% है, तो ₹2.5 लाख से अधिक के निवेश पर प्रभावी शुद्ध रिटर्न 8.25% से घटकर लगभग 5.7% रह जाता है। अतः उच्च टैक्स स्लैब वालों को ₹2.5 लाख से अधिक की बचत के लिए पीपीएफ (PPF) या डेट म्यूचुअल फंड्स पर भी विचार करना चाहिए।

📋 फॉर्म 15G और 15H में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष छूट नियम

60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयकर के नियम अधिक उदार और सुरक्षात्मक हैं:

  • फॉर्म 15H की पात्रता: 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी भारतीय निवासी वरिष्ठ नागरिक फॉर्म 15H जमा कर सकता है। फॉर्म 15H के लिए यह शर्त नहीं है कि कुल आय ₹2.5 लाख से कम होनी चाहिए; केवल यह शर्त है कि कुल आय पर शुद्ध देय कर (Net Tax Payable) शून्य होना चाहिए।
  • धारा 87A की टैक्स रिबेट का लाभ: नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत ₹7 लाख तक की वार्षिक आय पर धारा 87A के तहत पूर्ण कर छूट मिलती है। अतः यदि किसी व्यक्ति की पेंशन, ब्याज और पीएफ निकासी मिलाकर भी कुल वार्षिक आय ₹7 लाख से कम है, तो वह बिना किसी संकोच के फॉर्म 15G/15H भरकर 100% टीडीएस से छूट प्राप्त कर सकता है।
  • फॉर्म 16A (TDS Certificate) प्राप्त करना: यदि ईपीएफओ ने आपके पीएफ निकासी पर टीडीएस काटा है, तो ईपीएफओ आपको Form 16A जारी करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। आप ईपीएफओ पासबुक पोर्टल से या आयकर विभाग के Traces पोर्टल से अपना फॉर्म 16A डाउनलोड कर सकते हैं और आईटीआर में क्रेडिट ले सकते हैं।

⚠️ गलत पैन कार्ड नंबर दर्ज होने पर टीडीएस रिफंड में भयंकर परेशानी

यूएएन पोर्टल पर पैन कार्ड लिंक करते समय स्पेलिंग और अक्षरों को तीन बार जांचें। यदि आपके पैन कार्ड का एक भी अक्षर (उदा. 'O' के स्थान पर '0' या 'I' के स्थान पर '1') गलत दर्ज हो जाता है, तो ईपीएफओ द्वारा काटा गया टीडीएस किसी अज्ञात पैन पर जमा हो जाएगा और आपको आईटीआर में उसका रिफंड कभी नहीं मिल सकेगा। हमेशा NSDL/UTIITSL से सत्यापित पैन ही दर्ज करें।

📊 पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime) बनाम नई कर व्यवस्था (New Regime) में पीएफ टैक्स

पीएफ निकासी के बाद आईटीआर फाइल करते समय यह समझना जरूरी है कि दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में क्या अंतर है:

  • पुरानी कर व्यवस्था में कटौती: यदि आप पुरानी व्यवस्था चुनते हैं, तो यदि 5 साल से कम सेवा में पीएफ निकाला गया है, तो पूर्व वर्षों में ली गई धारा 80C की कटौती वापस जोड़ दी जाती है और उस पर पिछले वर्षों की टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स बनता है।
  • नई कर व्यवस्था में सीधा स्लैब: नई कर व्यवस्था (Section 115BAC) में धारा 80C की कोई छूट नहीं होती। अतः 5 साल से कम सेवा में निकाला गया पीएफ सीधे चालू वर्ष की कुल कर-योग्य आय में जुड़ जाता है। यदि कुल आय ₹7 लाख से कम है, तो धारा 87A की रिबेट के कारण 1 रुपये का भी टैक्स नहीं बनता और काटा गया पूरा टीडीएस रिफंड आ जाता है।

💡 चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की अंतिम सलाह

यदि आपने 4 साल 10 महीने काम किया है और केवल 2 महीने बचे हैं, तो कभी भी जल्दबाजी में नौकरी छोड़ते ही पीएफ न निकालें! मात्र 2 महीने का इंतजार करके या नई कंपनी में केवल 2 महीने और काम करके पीएफ ट्रांसफर करा लें। ऐसा करते ही आपकी कुल सेवा 5 साल पार कर जाएगी और आपका पूरा ₹5 लाख या ₹10 लाख का फंड कानूनी रूप से 100% टैक्स-फ्री हो जाएगा। थोड़े से सब्र से आप लाखों रुपये के टैक्स की सीधी बचत कर सकते हैं।

📑 फॉर्म 15G भरने के बाद ईपीएफओ द्वारा जारी पावती (Acknowledgment)

जब आप फॉर्म 19 के साथ फॉर्म 15G की पीडीएफ अपलोड करके क्लेम सबमिट करते हैं, तो क्लेम की पीडीएफ रसीद में स्पष्ट रूप से लिखा आता है: 'Form 15G / 15H uploaded: YES'।

  • रसीद की जांच: सबमिट करते ही डाउनलोड की गई रसीद में यह अवश्य जांचें कि 'Form 15G Uploaded' के आगे 'YES' लिखा है या नहीं। यदि किसी तकनीकी खामी से 'NO' लिखा आए, तो इसका अर्थ है कि फाइल अटैच नहीं हो सकी। ऐसे में तुरंत क्लेम ट्रैक करके उसे री-सबमिट करें।
  • फील्ड ऑफिसर द्वारा सत्यापन: ईपीएफओ का सॉफ्टवेयर फॉर्म 15G को सीधे टैक्स मॉड्यूल में भेजता है जिससे क्लेम सेटलमेंट के समय टीडीएस का डिडक्शन शून्य हो जाता है और पूरा फंड बिना ₹1 की कटौती के सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाता है।

निष्कर्ष: कर नियमों की सही जानकारी और समय पर फॉर्म 15G जमा करना आपके खून-पसीने की कमाई को टीडीएस के रूप में कटने से बचाने का सबसे प्रभावी कानूनी कवच है।

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