epfo-pension ⏱️ 15 मिनट पढ़ें 📅 2026-10-24 21:04:00

EPFO पेंशन (EPS-95) की गणना कैसे होती है? फॉर्मूला, पात्रता नियम और 50 बनाम 58 वर्ष में पेंशन का पूरा गणित

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श्रम एवं पेंशन विधिक डेस्क
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⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

EPS-95 के तहत आजीवन मासिक पेंशन पाने के लिए किसी भी संगठित क्षेत्र के कर्मचारी को न्यूनतम 10 वर्ष (120 महीने) की 'पेंशन योग्य सेवा' (Contributory Service) पूरी करनी होती है। पेंशन का आधिकारिक फॉर्मूला है: मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन x पेंशन योग्य सेवा अवधि) / 70। वर्तमान नियमों में अधिकतम पेंशन योग्य वेतन कैप ₹15,000 है, जिससे नियमित अधिकतम पेंशन ₹7,500 प्रति माह बनती है। 58 वर्ष पर पूरी पेंशन मिलती है, जबकि 50 से 57 वर्ष के बीच 'अर्ली पेंशन' लेने पर प्रति वर्ष 4% की आजीवन कटौती होती है।

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कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) क्या है और इसमें अंशदान कैसे जाता है?

त्वरित उत्तर: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) केवल एकमुश्त पीएफ फंड ही नहीं देता, बल्कि निजी क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (Employees' Pension Scheme - EPS-95) संचालित करता है। यह योजना सदस्य को 58 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद आजीवन मासिक पेंशन की गारंटी देती है।

अंशदान का गणित समझना हर कर्मचारी के लिए जरूरी है: आपके वेतन (बेसिक + डीए) से कटने वाला 12% कर्मचारी अंशदान पूरी तरह आपके पीएफ (EPF) खाते में जमा होता है और उस पर सरकार द्वारा घोषित ब्याज मिलता है। लेकिन आपकी कंपनी द्वारा दिए जाने वाले 12% नियोक्ता अंशदान के दो टुकड़े होते हैं: इसमें से 8.33% हिस्सा (अधिकतम ₹1,250 प्रति माह) सीधे केंद्र सरकार के पेंशन फंड (EPS) में जाता है, और शेष 3.67% हिस्सा आपके पीएफ खाते में जमा होता है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार भी 1.16% का बजटीय अंशदान पेंशन फंड में देती है।

💡 न्यूनतम ₹1,000 मासिक पेंशन की वैधानिक गारंटी

केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ईपीएस-95 के अंतर्गत आने वाले किसी भी पात्र पेंशनभोगी को न्यूनतम ₹1,000 प्रति माह की पेंशन मिलना अनिवार्य है। यदि किसी कर्मचारी का फॉर्मूला गणना के अनुसार ₹650 या ₹800 भी बनता है, तो केंद्र सरकार अपनी तरफ से सब्सिडी जोड़कर उसे बढ़ाकर ₹1,000 प्रति माह करती है।

ईपीएस-95 पेंशन पात्रता की 4 अनिवार्य शर्तें

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मासिक पेंशन का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को निम्नलिखित मापदंड पूरे करने होते हैं:

  1. ईपीएफओ का सक्रिय सदस्य होना: कर्मचारी का किसी ऐसे प्रतिष्ठान में कार्यरत होना आवश्यक है जो ईपीएफ अधिनियम 1952 के तहत पंजीकृत हो।
  2. न्यूनतम 10 वर्ष की अंशदायी सेवा (Eligible Service): पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 वर्ष (120 महीने) तक पेंशन फंड में अंशदान जमा होना अनिवार्य है। यह सेवा एक ही कंपनी में होना जरूरी नहीं है; विभिन्न कंपनियों में काम करने के दौरान 'स्कीम सर्टिफिकेट' (Scheme Certificate) के जरिए सेवा अवधि को जोड़ा जा सकता है।
  3. 58 वर्ष की आयु पूरी करना (नियमित पेंशन): सामान्य सुपरएनुएशन पेंशन 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर ही शुरू होती है।
  4. अर्ली पेंशन का विकल्प (50 से 57 वर्ष): यदि किसी कर्मचारी की 10 वर्ष की सेवा पूरी हो चुकी है और वह 50 वर्ष की आयु के बाद नौकरी छोड़ देता है, तो वह 'कम उम्र की पेंशन' (Reduced / Early Pension) का दावा कर सकता है।

मासिक पेंशन की गणना का आधिकारिक फॉर्मूला और पूरा गणित

1 सितंबर 2014 के संशोधन के बाद ईपीएस-95 के तहत मासिक पेंशन निकालने का आधिकारिक फॉर्मूला इस प्रकार है:

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा अवधि) / 70

फॉर्मूले के दोनों घटकों को बारीकी से समझें:

  • 1. पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary): यह नौकरी छोड़ने की तारीख से ठीक पहले के अंतिम 60 महीनों (5 वर्षों) का औसत मासिक वेतन (बेसिक + डीए) होता है। वर्तमान वैधानिक वेतन सीमा (Wage Ceiling) के अनुसार यह अधिकतम ₹15,000 प्रति माह पर सीमित है।
  • 2. पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service): जितने वर्षों तक कर्मचारी ने पेंशन फंड में अंशदान किया है। यदि किसी कर्मचारी ने 20 वर्ष या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है और वह 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होता है, तो ईपीएफओ उसे 2 वर्ष का बोनस (Bonus of 2 Years) देता है। यानी 25 वर्ष की वास्तविक सेवा को गणना में 27 वर्ष माना जाएगा।

58 वर्ष की आयु में अधिकतम नियमित पेंशन का लाइव उदाहरण

मान लीजिए कि किसी कर्मचारी ने 33 वर्ष तक संगठित क्षेत्र में नौकरी की और उसका औसत वेतन ₹15,000 की वैधानिक सीमा से अधिक था:

  • पेंशन योग्य वेतन = ₹15,000 (सीलिंग सीमा)
  • पेंशन योग्य सेवा = 33 वर्ष + 2 वर्ष का बोनस = 35 वर्ष (अधिकतम अनुमत सीमा)
  • गणना: (15,000 × 35) / 70 = ₹7,500 प्रति माह

अतः वर्तमान व्यवस्था के तहत सामान्य कैपिंग पर अधिकतम पेंशन ₹7,500 प्रति माह ही मिल सकती है।

नियमित पेंशन (58 वर्ष) बनाम अर्ली पेंशन (50 वर्ष): पेंशन कटौती का तुलनात्मक मैट्रिक्स

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यदि कोई व्यक्ति 58 वर्ष की आयु से पहले ही पेंशन लेना शुरू करता है, तो उसे आजीवन भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है:

पेंशन शुरू करने की आयु (Age) 58 वर्ष से शेष वर्षों का अंतर आजीवन पेंशन में कटौती की दर कटौती का कुल प्रतिशत यदि मूल पेंशन ₹7,000 थी, तो वास्तविक प्राप्ति
58 वर्ष (नियमित सेवानिवृत्ति) 0 वर्ष (पूर्ण परिपक्वता) शून्य (0%) 0% कटौती (पूर्ण पेंशन) ₹7,000 प्रति माह
57 वर्ष 1 वर्ष पहले 4% प्रति वर्ष 4% आजीवन कटौती ₹6,720 प्रति माह
56 वर्ष 2 वर्ष पहले 4% प्रति वर्ष 8% आजीवन कटौती ₹6,440 प्रति माह
54 वर्ष 4 वर्ष पहले 4% प्रति वर्ष 16% आजीवन कटौती ₹5,880 प्रति माह
50 वर्ष (न्यूनतम अर्ली पेंशन) 8 वर्ष पहले 4% प्रति वर्ष 32% आजीवन कटौती ₹4,760 प्रति माह

⚠️ अर्ली पेंशन लेने से पहले 10 बार सोचें: यह कटौती स्थायी होती है!

कई कर्मचारी 50 वर्ष की उम्र में नौकरी छोड़ने के बाद सोचते हैं कि वे अभी अर्ली पेंशन ले लेते हैं और जब वे 58 साल के होंगे तो पेंशन अपने आप बढ़कर पूरी हो जाएगी। यह बहुत बड़ा भ्रम है! 50 वर्ष में पेंशन शुरू करने पर जो 32% की कटौती लगती है, वह आपके पूरे जीवन काल (Life-long) के लिए स्थायी हो जाती है; 58 वर्ष का होने पर भी वह नहीं बढ़ती। यदि बहुत गंभीर मजबूरी न हो, तो हमेशा 58 वर्ष पर ही पेंशन का दावा करें।

यदि सेवा अवधि 10 वर्ष से कम हो तो क्या पेंशन मिलेगी? (Form 10C विड्रॉल बेनिफिट)

यदि किसी कर्मचारी की कुल अंशदायी सेवा 10 वर्ष से कम (जैसे 6 या 8 वर्ष) है और वह भविष्य में किसी संगठित क्षेत्र में काम नहीं करना चाहता, तो वह पेंशन का हकदार नहीं होता। ऐसी स्थिति में उसके पास दो विकल्प होते हैं:

  1. विकल्प 1 - फॉर्म 10C भरकर पेंशन का पैसा निकालना (Withdrawal Benefit): सदस्य ऑनलाइन Form 10C भरकर अपने पेंशन फंड में जमा पूरा पैसा एकमुश्त वापस ले सकता है। यह राशि टेबल 'डी' (Table D) के आधार पर सेवा के वर्षों और अंतिम वेतन के गुणक से तय होती है।
  2. विकल्प 2 - स्कीम सर्टिफिकेट (Scheme Certificate) लेना: यदि आप आगे किसी दूसरी कंपनी में नौकरी करने की योजना बना रहे हैं, तो कभी भी फॉर्म 10C से पैसा न निकालें। इसके स्थान पर 'स्कीम सर्टिफिकेट' लें। जब आप अगली नौकरी करेंगे, तो पिछली सेवा अवधि नई सेवा में जुड़ जाएगी और दोनों मिलाकर 10 वर्ष होते ही आप आजीवन पेंशन के पात्र बन जाएंगे।

पेंशन क्लेम करने की ऑनलाइन प्रक्रिया (Form 10D) और डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC)

58 वर्ष की आयु पूरी होने पर या अर्ली पेंशन के लिए ऑनलाइन दावा करने की चरणबद्ध प्रक्रिया:

  1. स्टेप 1 (चरण 1) - ऑनलाइन फॉर्म 10D सबमिट करना: यूएएन पोर्टल पर 'Online Services > Claim' में जाकर 'Form 10D' का चयन करें। अपना बैंक खाता और पत्राचार का पता सत्यापित करें और आधार ओटीपी से सबमिट करें।
  2. स्टेप 2 (चरण 2) - क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा सत्यापन: संबंधित क्षेत्रीय पीएफ कार्यालय का पेंशन विभाग आपके सेवा इतिहास और कुल अंशदान की गणना करके क्लेम पास करता है।
  3. स्टेप 3 (चरण 3) - पीपीओ (Pension Payment Order) जारी होना: सत्यापन के बाद ईपीएफओ द्वारा 12 अंकों का यूनिक PPO Number जारी किया जाता है, जो आपकी आजीवन पेंशन का पहचान पत्र होता है।
  4. स्टेप 4 (चरण 4) - वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र (Jeevan Pramaan / DLC): पेंशन शुरू होने के बाद प्रत्येक वर्ष पेंशनर को जीवित रहने का प्रमाण देना अनिवार्य होता है। अब इसके लिए बैंक जाने की आवश्यकता नहीं है; Jeevan Pramaan Face App के जरिए घर बैठे स्मार्टफोन के कैमरे से चेहरा स्कैन करके 2 मिनट में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जमा किया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs - PAA)

1. क्या कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को भी पेंशन मिलती है?

हां, ईपीएस-95 के तहत कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसकी विधवा/विधुर को आजीवन पारिवारिक पेंशन (Widow/Widower Pension) मिलती है, जो सदस्य की कुल पेंशन का 50% होती है (न्यूनतम ₹1,000)। इसके अलावा अधिकतम दो बच्चों को 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक सदस्य की पेंशन का 25-25% प्रति माह बाल पेंशन (Children Pension) के रूप में मिलता है।

2. क्या मैं 58 वर्ष के बाद भी नौकरी जारी रखकर पेंशन टाल (Defer) सकता हूं?

हां, यदि आप 58 वर्ष के बाद भी काम कर रहे हैं, तो आप अपनी पेंशन को 60 वर्ष की आयु तक टाल सकते हैं (Deferred Pension)। यदि आप पेंशन 1 वर्ष टालते हैं (59 वर्ष पर लेते हैं) तो आपकी मूल पेंशन में 4% की आजीवन बढ़ोतरी मिलती है, और यदि 2 वर्ष टालते हैं (60 वर्ष पर लेते हैं) तो पेंशन में 8.16% की स्थायी अतिरिक्त बढ़ोतरी की जाती है।

3. क्या ईपीएस पेंशन पर आयकर (Income Tax) लगता है?

हां, ईपीएफ का एकमुश्त पीएफ फंड जहां 5 वर्ष की सेवा के बाद पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, वहीं ईपीएस-95 के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन को आयकर कानून के अनुसार 'वेतन से आय' (Income from Salary / Pension) माना जाता है। यह पेंशनभोगी के कुल कर योग्य स्लैब में जुड़ती है। हालांकि, वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाले ₹50,000 के मानक कटौती (Standard Deduction) और ₹3 लाख/₹7 लाख के बेसिक टैक्स रिबेट के कारण अधिकांश पेंशनरों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।

4. सुप्रीम कोर्ट के हायर पेंशन (Higher Pension) फैसले का क्या असर हुआ है?

सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के अनुसार, जिन कर्मचारियों ने वास्तविक वेतन पर 8.33% पेंशन अंशदान का संयुक्त विकल्प दिया था, उन्हें ₹15,000 की सीलिंग के बजाय उनके वास्तविक वेतन (Actual Salary) के आधार पर उच्च पेंशन पाने का अधिकार मिला है। इसके तहत पीएफ खाते से अतिरिक्त राशि पेंशन फंड में स्थानांतरित की जाती है, जिससे मासिक पेंशन ₹7,500 की सीमा से बढ़कर ₹20,000 से ₹40,000 तक पहुंच सकती है।

5. क्या मैं अपनी ईपीएस पेंशन का कम्यूटेशन (एकमुश्त नकद निकासी) करा सकता हूं?

वर्तमान नियमों के अनुसार ईपीएस-95 में कम्यूटेशन (Commutation of Pension) की सुविधा बंद कर दी गई है। पूरी राशि मासिक पेंशन के रूप में ही दी जाती है। 2009 से पहले कम्यूटेशन की सुविधा थी जिसे बाद में 15 वर्ष बाद बहाल करने का नियम बनाया गया था, लेकिन नए पेंशनरों के लिए अब केवल 100% मासिक पेंशन ही उपलब्ध है।

6. अगर मेरी 10 साल की सेवा में कुछ महीनों का ब्रेक (गैप) रहा हो तो क्या होगा?

नौकरी बदलने के बीच यदि 2-3 महीने या साल भर का कोई गैप रहा है, तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। ईपीएफओ केवल उन महीनों की कुल संख्या गिनता है जिनमें वास्तव में पेंशन अंशदान जमा हुआ था (Non-contributory period is excluded)। जब सभी कंपनियों की कुल अंशदायी सेवा जोड़कर 120 महीने हो जाती है, तो आप पेंशन के पूर्ण पात्र बन जाते हैं।

🏛️ सुप्रीम कोर्ट हायर पेंशन (Higher Pension) ऐतिहासिक फैसला: वास्तविक वेतन पर गणना

4 नवंबर 2022 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारी पेंशन योजना पर एक युगांतरकारी फैसला सुनाया था, जिसने लाखों कर्मचारियों के लिए पेंशन के दरवाजे नए सिरे से खोल दिए:

  • वेतन सीमा (Wage Ceiling) का विवाद: 1 सितंबर 2014 से पहले पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹6,500 थी, जिसे बढ़ाकर ₹15,000 किया गया था। लेकिन जिन कर्मचारियों का वास्तविक मूल वेतन ₹50,000 या ₹1,00,000 था, उनकी पेंशन भी मात्र ₹15,000 पर ही गिनी जाती थी, जिससे उन्हें रिटायरमेंट पर मात्र ₹3,000 से ₹7,500 की मामूली पेंशन मिलती थी।
  • संयुक्त विकल्प (Joint Option) का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जो कर्मचारी 1 सितंबर 2014 को सेवा में थे और उन्होंने अपनी कंपनी के साथ मिलकर वास्तविक वेतन पर पेंशन अंशदान का विकल्प चुना था, उन्हें पूरे वास्तविक वेतन पर पेंशन पाने का वैधानिक अधिकार है।
  • पेंशन की दोहरी गणना (Pro-rata Pension Calculation): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 1 सितंबर 2014 से पहले की सेवा पर पेंशन की गणना अंतिम 12 महीनों के औसत वेतन से होगी, और 1 सितंबर 2014 के बाद की सेवा पर गणना अंतिम 60 महीनों के औसत वेतन से होगी। इस दोहरे फॉर्मूले से कई उच्च वेतनभोगी अधिकारियों की मासिक पेंशन ₹25,000 से ₹45,000 प्रति माह तक पहुंच रही है।

👨‍👧‍👦 अनाथ पेंशन (Orphan Pension) और नामांकित व्यक्ति (Nominee) के अधिकार

यदि दुर्भाग्यवश किसी ईपीएफओ सदस्य की सेवा के दौरान या पेंशन शुरू होने के बाद मृत्यु हो जाती है और उसकी पत्नी/पति की भी पूर्व में मृत्यु हो चुकी है, तो पेंशन योजना बच्चों को पूर्ण सुरक्षा देती है:

  1. अनाथ पेंशन की दर: प्रत्येक अनाथ बच्चे को नियमित पारिवारिक पेंशन का 75% हिस्सा (न्यूनतम ₹750 प्रति माह प्रति बच्चा) दिया जाता है। यह लाभ एक समय में अधिकतम 2 सबसे बड़े बच्चों को उनकी 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक मिलता है।
  2. दिव्यांग बच्चों को आजीवन पेंशन: यदि सदस्य का कोई बच्चा शारीरिक या मानसिक रूप से स्थायी रूप से दिव्यांग (Locomotor / Mental Disability) है, तो उसे 25 वर्ष की आयु के बाद भी पूरे जीवन काल तक पारिवारिक पेंशन मिलती रहती है।
  3. अविवाहित सदस्य के माता-पिता की पेंशन: यदि सदस्य अविवाहित था और उसने अपने माता या पिता को पेंशन का नॉमिनी बनाया था, तो सदस्य की मृत्यु के बाद उसके पिता अथवा माता को आजीवन मासिक पेंशन दी जाती है।

📱 स्मार्टफोन से डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (Jeevan Pramaan) जमा करने की गाइड

वरिष्ठ पेंशनरों को अब नवंबर के महीने में बैंक में लाइन लगाने की आवश्यकता नहीं है:

  • गूगल प्ले स्टोर से AadhaarFaceRD और Jeevan Pramaan ऐप इंस्टॉल करें।
  • अपना आधार नंबर, मोबाइल नंबर और पीपीओ नंबर (PPO Number) दर्ज करें।
  • स्मार्टफोन के फ्रंट कैमरे से अपनी आंखें झपकाएं (Blink Eyes)। आधार फेशियल रिकग्निशन से चेहरा मैच होते ही डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट सीधे ईपीएफओ के सर्वर पर जमा हो जाता है और पावती तुरंत एसएमएस पर आ जाती है।

📜 स्कीम सर्टिफिकेट (Scheme Certificate - Form 10C) का महत्व और फायदे

जब भी कोई कर्मचारी 58 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले या 10 वर्ष की सेवा से पहले नौकरी बदलता है, तो उसे 'स्कीम सर्टिफिकेट' का महत्व जरूर समझना चाहिए:

  • सेवा अवधि की अखंडता (Continuity of Pension Service): यदि आपने कंपनी 'A' में 4 साल काम किया और फिर 2 साल का गैप लेकर कंपनी 'B' में 6 साल काम किया, तो स्कीम सर्टिफिकेट आपके दोनों कार्यकालों को जोड़कर कुल 10 वर्ष की सेवा बना देता है, जिससे आप आजीवन पेंशन के पूर्ण पात्र बन जाते हैं।
  • पारिवारिक सुरक्षा का कवच: यदि किसी कर्मचारी के पास स्कीम सर्टिफिकेट है और नौकरी न होने के दौरान भी दुर्भाग्यवश उसकी असामयिक मृत्यु हो जाती है, तब भी उसके परिवार को नियमित रूप से आजीवन विधवा और बाल पेंशन का पूरा हक मिलता है।
  • एकमुश्त निकासी का नुकसान: यदि आप फॉर्म 10C से पेंशन का पैसा निकाल लेते हैं, तो आपकी पुरानी सेवा शून्य (Zero) हो जाती है और अगली कंपनी में आपको दोबारा पहले साल से सेवा शुरू करनी पड़ती है। इसलिए थोड़े से पैसों के लिए अपने बुढ़ापे की पेंशन को कभी न बेचें।

💡 पीपीओ नंबर खो जाने पर ऑनलाइन कैसे खोजें?

यदि सेवानिवृत्ति के बाद आपका पीपीओ (Pension Payment Order) नंबर खो गया है, तो ईपीएफओ पेंशनर्स पोर्टल mis.epfindia.gov.in/PensionersPortal पर जाएं। वहां 'Know Your PPO Number' पर क्लिक करें। अपना बैंक खाता संख्या या यूएएन नंबर दर्ज करें। स्क्रीन पर तुरंत आपका 12 अंकों का पीपीओ नंबर, पेंशन स्टेटस और मासिक भुगतान का पूरा विवरण प्रदर्शित हो जाएगा।

🛡️ पेंशन पासबुक में पेंशन योगदान का ऑडिट कैसे करें?

हर महीने जब आपकी कंपनी पीएफ रिटर्न फाइल करती है, तो अपनी ईपीएफओ पासबुक में देखें कि 'Pension Share' वाले कॉलम में ₹1,250 (या आपके मूल वेतन का 8.33%) नियमित रूप से जमा हो रहा है या नहीं। यदि किसी महीने यह कॉलम खाली दिखता है या 'NCP Days' (Non-Contributory Period) ज्यादा दिखते हैं, तो तुरंत अपने एचआर से संपर्क करें ताकि भविष्य में आपकी 10 वर्ष की पेंशन सेवा गणना में कोई विसंगति न आए।

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