उन सभी भारतीय नागरिकों, व्यापारियों, किसानों, खेल निशानेबाजों और पूर्व सैनिकों के लिए जो अपनी जान-माल की रक्षा, जंगली जानवरों से फसल की सुरक्षा या राष्ट्रीय निशानेबाजी खेल हेतु कानूनी तरीके से शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना चाहते हैं।
काम की बात (Quick Summary):
- भारत में हथियार रखना कोई मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है, बल्कि यह सरकार द्वारा दी जाने वाली एक नियंत्रित कानूनी अनुमति (Privilege) है।
- अब पुरानी लाल डायरी वाले मैनुअल लाइसेंस पूरी तरह बंद हो चुके हैं; प्रत्येक वैध लाइसेंस का 18 अंकों का UIN नंबर गृह मंत्रालय के पोर्टल पर दर्ज होना अनिवार्य है।
- एक नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 2 हथियार ही रख सकता है। यदि पूर्व में 3 हथियार थे, तो तीसरे को जमा करना या बेचना अनिवार्य है।
- लाइसेंस की वैधता अब 5 वर्षों की होती है (पहले 3 वर्ष थी), जिसके बाद समय पर नवीनीकरण कराना होता है।
आधिकारिक पोर्टल व संपर्क सूत्र:
गृह मंत्रालय NDAL-ALIS पोर्टल: ndal-alis.gov.in | केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA): mha.gov.in | हेल्पलाइन ईमेल: support-alis@nic.in
भारत में शस्त्र लाइसेंस क्या है और इसका कानूनी ढांचा (Arms Act 1959 & Rules 2016)
भारत में किसी भी नागरिक द्वारा आग्नेयास्त्र (Firearm) रखने, खरीदने, बेचने या ले जाने को आयुध अधिनियम 1959 (The Arms Act, 1959) और आयुध नियम 2016 (The Arms Rules, 2016) द्वारा कड़ाई से नियंत्रित किया जाता है। देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए बिना वैध लाइसेंस के हथियार रखना एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की कड़ी सजा का प्रावधान है।
गृह मंत्रालय ने अवैध हथियारों और फर्जी कागजी लाइसेंसों पर पूर्ण रोक लगाने के लिए NDAL-ALIS (National Database on Arms Licenses - Arms License Issuance System) नामक केंद्रीय डिजिटल पोर्टल स्थापित किया है। इस पोर्टल के तहत पूरे देश में प्रत्येक लाइसेंसधारक को 18 अंकों का एक विशिष्ट यूआईएन (Unique Identification Number - UIN) आवंटित किया जाता है। बिना वैध UIN के कोई भी गन डीलर आपको कारतूस या हथियार नहीं बेच सकता।
दिसंबर 2019 में संसद द्वारा पारित आयुध (संशोधन) अधिनियम 2019 के प्रमुख बदलाव इस प्रकार हैं:
- हथियारों की अधिकतम सीमा: पहले एक व्यक्ति को अधिकतम 3 आग्नेयास्त्र रखने की अनुमति थी, जिसे घटाकर अब अधिकतम 2 हथियार कर दिया गया है।
- वैधता अवधि में वृद्धि: लाइसेंस की नवीनीकरण अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
- हर्ष फायरिंग पर पूर्ण प्रतिबंध: शादियों, धार्मिक उत्सवों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में जश्न मनाने के लिए हवाई फायरिंग (Celebratory Firing) को संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है, जिसमें 2 साल की जेल और ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है, साथ ही लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाता है।
शस्त्र लाइसेंस के लिए आवश्यक कानूनी पात्रता और आवेदन के 3 मान्य आधार
आयुध अधिनियम की धारा 9 और 14 के अनुसार शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवेदक को निम्नलिखित कानूनी शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है:
1. बुनियादी कानूनी पात्रता:
- आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष पूरी होनी चाहिए (खेल निशानेबाजी के मामले में जूनियर निशानेबाजों के लिए आयु सीमा 12 वर्ष से अधिक हो सकती है)।
- मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य: आवेदक का मानसिक संतुलन पूरी तरह स्वस्थ होना चाहिए। वह किसी गंभीर मानसिक विकार, अत्यधिक शराब या मादक पदार्थों की लत से ग्रस्त नहीं होना चाहिए।
- आपराधिक रिकॉर्ड न होना: आवेदक किसी भी संज्ञेय या हिंसक अपराध में दोषी न ठहराया गया हो, उसके खिलाफ कोई गैर-जमानती वारंट या शांतिभंग की धाराएं (जैसे सीआरपीसी 107/116) लंबित न हों।
- सुरक्षित अभिरक्षा (Safe Custody): आवेदक के घर पर हथियार रखने के लिए स्टील का सुरक्षित गन लॉकर (Tethered Gun Safe) उपलब्ध होना चाहिए।
2. आवेदन के 3 मुख्य कानूनी आधार (Need Assessment):
- आत्मरक्षा व निजी सुरक्षा (Self-Defence / Threat Perception): आवेदक को साबित करना होता है कि उसके व्यवसाय (जैसे बड़ा व्यापारी, पेट्रोल पंप मालिक, आभूषण विक्रेता, बिल्डर), सामाजिक स्थिति या किसी पुरानी व्यक्तिगत रंजिश के कारण उसकी जान को वास्तविक खतरा (Grave Threat to Life) है।
- फसल सुरक्षा (Crop Protection): ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को जंगली सुअर, नीलगाय या अन्य जंगली जानवरों से अपनी फसलों की रक्षा के लिए 12-बोर डीबीबीएल/एसबीबीएल बंदूक का लाइसेंस दिया जाता है। इसके लिए भूमि के स्वामित्व का खतौनी/जमाबंदी रिकॉर्ड लगाना होता है।
- खेल निशानेबाजी (Target Practice / Sports Shooting): राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) या राज्य राइफल एसोसिएशन से संबद्ध पंजीकृत निशानेबाजों को अभ्यास व प्रतियोगिताओं के लिए हथियार का लाइसेंस दिया जाता है।
शस्त्रों की श्रेणियां, लाइसेंसिंग नियम व प्राधिकारी
भारत में हथियारों के वर्गीकरण और उनके लाइसेंसिंग नियमों का विवरण नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में देखें:
| शस्त्र की श्रेणी | लागू प्रावधान व परिभाषा | अनुमति प्राप्त हथियार | लाइसेंसिंग प्राधिकारी | काम की व्यावहारिक सलाह |
|---|---|---|---|---|
| NPB (Non-Prohibited Bore) | आम नागरिकों के लिए अनुमत गैर-प्रतिबंधित बोर के हथियार | .32 पिस्टल/रिवाल्वर, .22 राइफल, 12-बोर बंदूक | जिलाधिकारी (DM) / पुलिस कमिश्नर | 99% नागरिक लाइसेंस इसी श्रेणी के अंतर्गत जारी होते हैं। |
| PB (Prohibited Bore) | केवल सेना, अर्धसैनिक बलों व विशेष खतरे वाले व्यक्तियों हेतु | 9mm पिस्टल, .380, 7.62mm, ऑटोमैटिक राइफल | केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA नई दिल्ली) | सामान्य नागरिकों को इस श्रेणी का लाइसेंस नहीं दिया जाता। |
| फसल सुरक्षा (Crop Protection) | कृषि भूमि की वन्यजीवों से रक्षा हेतु जारी सीमित लाइसेंस | 12-बोर SBBL या DBBL शॉटगन | उपजिलाधिकारी (SDM) / डीएम | यह लाइसेंस केवल संबंधित कृषि क्षेत्र सीमा में ही प्रभावी होता है। |
| स्पोर्ट्स शूटिंग (Renowned Shot) | राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रमाणित निशानेबाजों हेतु | .22 स्पोर्ट्स पिस्टल, एयर राइफल, स्कीट गन | डीएम / राज्य गृह विभाग | विख्यात निशानेबाजों को 2 हथियारों की सामान्य सीमा से छूट मिलती है। |
| विरासत लाइसेंस (Family Heirloom) | माता-पिता या पूर्वजों के लाइसेंसी हथियार का कानूनी वारिस को हस्तांतरण | पूर्वज के नाम पंजीकृत वैध हथियार | जिलाधिकारी (DM) न्यायालय | लाइसेंसधारक के जीवनकाल में या मृत्यु के बाद एनओसी देकर ट्रांसफर होता है। |
आवश्यक दस्तावेज, फॉर्म S-3 मेडिकल फिटनेस व सुरक्षित गन लॉकर नियम
शस्त्र लाइसेंस के आवेदन हेतु आवश्यक प्रमुख दस्तावेजों और तकनीकी औपचारिकताओं का विवरण इस प्रकार है:
- पहचान व पते का प्रमाण: आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और पैन कार्ड की सत्यापित प्रतियां।
- निवास प्रमाण व राशन कार्ड: पिछले 5 वर्षों के स्थायी व वर्तमान पते का प्रमाण (बिजली बिल, टेलीफोन बिल या जल कर रसीद)।
- आयु व जन्म तिथि का प्रमाण: 10वीं का बोर्ड प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट।
- फॉर्म S-3 मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र (Form S-3 Medical Certificate): आयुध नियम 2016 की अनुसूची-III के तहत किसी सरकारी जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या सरकारी एमबीबीएस डॉक्टर द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित मेडिकल जांच रिपोर्ट। इसमें विशेष रूप से आंखों की रोशनी (Visual Acuity 6/12), सुनने की क्षमता, शारीरिक गतिशीलता और मानसिक स्वास्थ्य (मनोवैज्ञानिक स्थिरता व डिप्रेशन मुक्त) की स्पष्ट रिपोर्ट होनी चाहिए।
- शस्त्र संचालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (Safe Handling Training): आयुध नियम 2016 के नियम 10 के अनुसार गृह मंत्रालय द्वारा अधिकृत किसी शूटिंग रेंज, राइफल एसोसिएशन या पूर्व अर्धसैनिक बल प्रशिक्षण केंद्र से जारी बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जिसमें हथियार पकड़ने, कॉक करने, अनलोड करने और ट्रिगर अनुशासन की परीक्षा पास की गई हो।
- आय का साक्ष्य व आयकर रिटर्न (ITR): पिछले 3 वर्षों की आईटीआर की प्रतियां, बैंक स्टेटमेंट या वेतन पर्ची (यह साबित करने के लिए कि आवेदक हथियार के रखरखाव और कारतूस का खर्च उठाने में सक्षम है)।
- खतरे का साक्ष्य (Threat Perception Proof): यदि किसी आपराधिक धमकी या पुरानी रंजिश के कारण आवेदन कर रहे हैं, तो दर्ज एफआईआर (FIR) की प्रति, कोर्ट केस के कागजात या पुलिस कंप्लेंट की रिसीविंग।
- सुरक्षित गन सेफ का प्रमाण: घर पर स्थापित मजबूत स्टील की तिजोरी (Gun Safe) का फोटो व बिल।
NDAL-ALIS पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने की 6-चरणीय प्रक्रिया
गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल से शस्त्र लाइसेंस आवेदन के 6 स्पष्ट चरण निम्नलिखित हैं:
- NDAL-ALIS पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक वेबसाइट ndal-alis.gov.in पर जाएं और 'Apply Online' पर क्लिक करें। अपने राज्य और जिले का चयन करें।
- लाइसेंस श्रेणी व फॉर्म A-1 का चयन करें: 'Apply for New License' विकल्प चुनें। फॉर्म A-1 (Form A-1: Application Form for Grant of Individual Arms License) का चयन करें।
- व्यक्तिगत व व्यावसायिक विवरण भरें: अपना पूरा नाम, पिता का नाम, लिंग, जन्म तिथि, आधार नंबर, पैन नंबर, स्थायी व वर्तमान पता और पिछले 5 वर्षों के आवास का विवरण दर्ज करें। अपने व्यवसाय, वार्षिक आय और हथियार रखने के कानूनी कारण (आत्मरक्षा/फसल सुरक्षा) का स्पष्ट विवरण दें।
- हथियार का प्रकार व क्षेत्र सीमा चुनें: आप किस बोर का हथियार लेना चाहते हैं (जैसे .32 बोर पिस्टल/रिवाल्वर या 12-बोर शॉटगन)। इसके बाद लाइसेंस का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction Area) चुनें—जैसे केवल जिला (District), संपूर्ण राज्य (State) या अखिल भारतीय (All India - PB/विशेष अनुमति)।
- दस्तावेज अपलोड करें: फॉर्म S-3 मेडिकल सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, निवास प्रमाण, ट्रेनिंग सर्टिफिकेट, फोटो और हस्ताक्षर पीडीएफ व जेपीईजी फॉर्मेट में अपलोड करें।
- सरकारी आवेदन फीस जमा करें और प्रिंट निकालें: निर्धारित सरकारी फीस का ऑनलाइन भुगतान करें। जनरेट हुए आवेदन फॉर्म और रसीद का प्रिंट आउट लें। ऑनलाइन आवेदन के 7 दिनों के भीतर सभी मूल दस्तावेजों और फॉर्म की हार्ड कॉपी अपने जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 'शस्त्र अनुभाग' (Arms Section / DM Office) में भौतिक रूप से जमा कराएं।
आवेदन से लेकर UIN जारी होने तक का चरणवार वर्कफ्लो
शस्त्र लाइसेंस की प्रशासनिक प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों की भूमिका को नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में समझें:
| चरण संख्या | प्रक्रिया का नाम | जिम्मेदार अधिकारी / एजेंसी | समय सीमा (चार्टर) | नागरिक के लिए व्यावहारिक सावधानी |
|---|---|---|---|---|
| चरण 1 | ऑनलाइन फॉर्म व फाइल सबमिशन | कलेक्ट्रेट शस्त्र अनुभाग (DM Office) | 1 से 3 दिन | फाइल जमा करते समय मुहर लगी पावती रसीद अवश्य प्राप्त करें। |
| चरण 2 | स्थानीय थाना भौतिक सत्यापन | थानाध्यक्ष (SHO) / बीट सिपाही | 15 दिन | पड़ोसियों से सकारात्मक गवाही और गन लॉकर का भौतिक निरीक्षण कराएं। |
| चरण 3 | खुफिया रिपोर्ट (LIU / CID) | स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) | 15 दिन | राजनीतिक गतिविधियों या दंगों में किसी संलिप्तता की जांच की जाती है। |
| चरण 4 | पुलिस अधीक्षक (SP) संस्तुति | जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय | 7 दिन | थाना और एलआईयू की दोनों रिपोर्ट मिलने पर एसपी अंतिम संस्तुति भेजते हैं। |
| चरण 5 | डीएम साक्षात्कार व निर्णय | जिला मजिस्ट्रेट (DM / Collector) | 15 दिन | साक्षात्कार के दौरान हथियार की आवश्यकता को स्पष्ट व तार्किक ढंग से बताएं। |
| चरण 6 | UIN सृजन व लाइसेंस जारी होना | NDAL-ALIS पोर्टल सिस्टम | 5 दिन | लाइसेंस मिलने के 2 वर्ष के भीतर अधिकृत डीलर से हथियार खरीदना अनिवार्य है। |
स्थानीय थाना और खुफिया इकाई (LIU) द्वारा पुलिस वेरिफिकेशन के नियम
शस्त्र लाइसेंस की प्रक्रिया में पुलिस वेरिफिकेशन सबसे संवेदनशील और निर्णायक चरण होता है। इस चरण में निम्नलिखित जांच बिंदु शामिल होते हैं:
- आपराधिक इतिहास का मिलान (Criminal Antecedents): बीट प्रभारी पुलिस स्टेशन के अपराध रजिस्टर (Register No. 8) और सीसीटीएनएस (CCTNS) डेटाबेस में आवेदक के नाम और फिंगरप्रिंट की जांच करता है कि क्या आवेदक कभी किसी मामले में नामजद रहा है।
- स्थानीय प्रतिष्ठा व विवाद: बीट सिपाही मोहल्ले या गांव के कम से कम दो संभ्रांत व्यक्तियों (जैसे पार्षद, प्रधान, सेवानिवृत्त अधिकारी) से पूछताछ करता है कि क्या आवेदक क्रोधी स्वभाव का है, क्या उसका शराब पीकर झगड़ा करने का इतिहास है, या क्या पड़ोसियों से कोई भूमि विवाद चल रहा है।
- सुरक्षित गन सेफ का भौतिक निरीक्षण: आयुध नियम 2016 के तहत पुलिस अधिकारी आवेदक के घर जाकर यह देखता है कि क्या हथियार को बच्चों और अजनबियों की पहुंच से दूर सुरक्षित रखने के लिए दीवार या फर्श से फिक्स मजबूत अलमारी/सेफ मौजूद है।
- एलआईयू (LIU) की स्वतंत्र जांच: लोकल इंटेलिजेंस यूनिट यह सुनिश्चित करती है कि आवेदक किसी प्रतिबंधित संगठन, असामाजिक तत्व या सांप्रदायिक उपद्रव में सक्रिय तो नहीं है।
विभिन्न शस्त्रों का सरकारी आवेदन शुल्क, नवीनीकरण व कारतूस कोटा
आयुध नियम 2016 के तहत विभिन्न प्रकार के हथियारों के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क और कारतूस नियमों का विवरण नीचे दी गई 5-कॉलम तालिका में देखें:
| शस्त्र का प्रकार | नया लाइसेंस आवेदन शुल्क | 5-वर्षीय नवीनीकरण शुल्क | वार्षिक कारतूस कोटा | महत्वपूर्ण नियम व शर्तें |
|---|---|---|---|---|
| पिस्तौल / रिवाल्वर (.32 बोर) | ₹1,000 | ₹500 (प्रत्येक 5 वर्ष पर) | अधिकतम 200 राउंड प्रति वर्ष (एक समय में 50) | पुराने खोखे (Fired Shells) डीलर को लौटाने पर ही नए कारतूस मिलते हैं। |
| राइफल (.22 या .315 बोर) | ₹1,000 | ₹500 | 100 राउंड प्रति वर्ष | निशानेबाजी या लंबी दूरी की आत्मरक्षा के लिए उपयुक्त। |
| 12-बोर शॉटगन (SBBL/DBBL) | ₹500 | ₹250 | 50 राउंड प्रति वर्ष | किसानों और संपत्ति सुरक्षा के लिए सबसे लोकप्रिय हथियार। |
| एयर वेपन (.177 से अधिक) | ₹500 | ₹250 | नियमों के अनुसार | 20 जूल से अधिक ऊर्जा वाले एयर वेपन्स के लिए अब लाइसेंस जरूरी है। |
| लेट फीस (विलंब शुल्क) | लाइसेंस समाप्ति के बाद | ₹500 प्रति वर्ष अतिरिक्त जुर्माना | - | समाप्ति के 6 महीने बाद तक नवीनीकरण न कराने पर लाइसेंस रद्द हो सकता है। |
यदि डीएम लाइसेंस आवेदन निरस्त कर दे तो धारा 18 के तहत अपील कैसे करें?
यदि जिलाधिकारी (DM) आपके शस्त्र लाइसेंस आवेदन को निरस्त (Reject) कर देते हैं, तो कानून आपको इसके खिलाफ अपील करने का पूरा अधिकार देता है:
- रिजेक्शन आर्डर की प्रमाणित प्रति प्राप्त करें: आयुध अधिनियम की धारा 14(3) के अनुसार लाइसेंसिंग प्राधिकारी के लिए यह कानूनी रूप से बाध्यकारी है कि वह निरस्तीकरण का लिखित कारण (Speaking Order) दर्ज करे। आप कलेक्ट्रेट से इस आदेश की प्रमाणित नकल निकालें।
- धारा 18 के तहत अपीलीय प्राधिकारी: आयुध अधिनियम की धारा 18 के अनुसार डीएम के आदेश के खिलाफ अपील मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) के समक्ष की जाती है। यदि आदेश पुलिस कमिश्नर द्वारा दिया गया है, तो अपील राज्य के गृह सचिव के समक्ष होती है।
- अपील दायर करने की समय सीमा: आदेश की प्रति मिलने की तारीख से 30 दिनों के भीतर अपील याचिका दाखिल करना अनिवार्य है।
- उच्च न्यायालय में रिट याचिका: यदि कमिश्नर भी बिना किसी ठोस आधार के अपील खारिज कर देते हैं, तो आवेदक भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) में रिट याचिका दायर कर सकता है। अदालतों ने कई ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट किया है कि केवल अस्पष्ट पुलिस आख्या के आधार पर किसी भी नागरिक का शस्त्र आवेदन मनमाने ढंग से खारिज नहीं किया जा सकता।
अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1. क्या शस्त्र लाइसेंस मिलने के बाद मैं पूरे भारत में हथियार ले जा सकता हूं?
सामान्यतः जिलाधिकारी द्वारा जारी किया गया नया लाइसेंस केवल उसी जिले (District) या संबंधित राज्य (State Level) के लिए वैध होता है। यदि आप अखिल भारतीय (All India License) अधिकार क्षेत्र चाहते हैं, तो इसके लिए आपको राज्य के गृह विभाग या केंद्रीय गृह मंत्रालय से विशेष अनुमोदन प्राप्त करना होता है। इसके लिए आवेदक को यह प्रमाणित करना होता है कि उसका व्यवसाय या कार्य कई राज्यों में फैला हुआ है और वह नियमित रूप से अंतरराज्यीय यात्रा करता है।
Q2. लाइसेंस स्वीकृत होने के बाद हथियार खरीदने के लिए कितना समय मिलता है?
लाइसेंस जारी होने की तारीख से आवेदक को 2 वर्ष (2 Years) का समय दिया जाता है। इस अवधि के भीतर आपको किसी भी पंजीकृत सरकारी आर्डिनेंस फैक्ट्री डीलर या निजी लाइसेंसी गन डीलर से हथियार खरीदकर उसे अपने लाइसेंस और थाने के रजिस्टर में दर्ज कराना होता है। यदि 2 वर्ष में हथियार नहीं खरीदा जाता, तो लाइसेंस स्वतः समाप्त (Lapse) हो जाता है, जब तक कि डीएम द्वारा उचित कारण पर समय सीमा न बढ़ाई जाए।
Q3. क्या चुनाव के समय लाइसेंसी हथियार को पुलिस थाने में जमा करना अनिवार्य है?
माननीय सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रत्येक चुनाव के समय जिला स्क्रीनिंग कमेटी (Screening Committee) प्रत्येक लाइसेंसधारक के रिकॉर्ड की समीक्षा करती है। जिन व्यक्तियों के खिलाफ कोई आपराधिक विवाद या कानून-व्यवस्था का खतरा होता है, केवल उन्हें ही थाने या अधिकृत आर्म्स डीलर के पास हथियार जमा करने का नोटिस दिया जाता है। यदि किसी व्यक्ति को वास्तविक जान का खतरा है, तो वह स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष आवेदन देकर हथियार अपने पास रखने की अनुमति मांग सकता है।
Q4. क्या पिता के देहांत के बाद उनका लाइसेंसी हथियार बेटे या बेटी को मिल सकता है?
जी हाँ, इसे पारिवारिक विरासत नीति (Family Heirloom Policy) कहा जाता है। पिता के देहांत के बाद कानूनी वारिसों (अन्य पुत्र/पुत्रियों व पत्नी) के अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के साथ वारिस डीएम के समक्ष ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदक को आयु, चरित्र और मेडिकल फिटनेस की सभी सामान्य शर्तें पूरी करनी होती हैं। नए वारिस के नाम पर नया UIN जनरेट करके हथियार उसके नाम ट्रांसफर कर दिया जाता है।
Q5. क्या लाइसेंसी हथियार से आत्मरक्षा में गोली चलाने पर जेल हो सकती है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 34 से 44 (पूर्व में आईपीसी की धारा 96 से 106) के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने शरीर और संपत्ति की रक्षा के लिए 'निजी प्रतिरक्षा का अधिकार' (Right of Private Defence) प्राप्त है। यदि आपकी या किसी अन्य व्यक्ति की जान को प्रत्यक्ष और तत्काल गंभीर खतरा है, तो आत्मरक्षा में हथियार का उपयोग कानूनी रूप से मान्य है। हालांकि घटना के बाद तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में पूरी सूचना दर्ज करानी होती है और कोर्ट में यह साबित करना होता है कि गोली चलाना अंतिम उपाय था।
Q6. UIN नंबर क्या है और यह कहां से चेक किया जाता है?
UIN (Unique Identification Number) 18 अंकों का एक डिजिटल राष्ट्रीय पहचान नंबर है जो भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा प्रत्येक वैध शस्त्र लाइसेंसधारक को दिया जाता है। आप गृह मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल ndal-alis.gov.in पर जाकर 'Know Your UIN' विकल्प में अपना राज्य, जिला और नाम दर्ज करके अपने UIN की स्थिति की पुष्टि कर सकते हैं।