documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) कैसे बनवाएं: भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, कोर्ट प्रक्रिया व बैंक दावा पूरी गाइड

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र किसी मृत व्यक्ति की चल संपत्तियों (बैंक खाते, एफडी, शेयर, बीमा) पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने के लिए सिविल कोर्ट द्वारा जारी किया जाने वाला आधिकारिक न्यायिक आदेश है। इसे बनवाने के लिए मृतक के प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस (Class-I Legal Heirs) अपने सिविल अधिवक्ता के माध्यम से जिला अदालत में याचिका (Succession Petition) दाखिल करते हैं। याचिका के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिसों की सूची और बैंक खातों/शेयरों के विवरण संलग्न किए जाते हैं। न्यायालय द्वारा 30 से 45 दिनों का सार्वजनिक अखबार नोटिस (Public Notice) जारी कर आपत्तियां मांगी जाती हैं। कोई वैध आपत्ति न आने पर और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अदालत उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करती है, जिसे दिखाकर बैंक या वित्तीय संस्थान पूरा पैसा वारिस को सौंप देते हैं।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
दस्तावेज़ का नामउत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)
संबद्ध वैधानिक कानूनभारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 (Indian Succession Act 1925) की धारा 372
सक्षम प्राधिकारी न्यायालयजिला न्यायाधीश (District Judge) अथवा वरिष्ठ सिविल जज (Senior Civil Judge) न्यायालय
क्षेत्राधिकार (Jurisdiction)वह न्यायालय जिसके अधिकार क्षेत्र में मृतक सामान्यतः निवास करता था अथवा जहां संपत्ति स्थित है
लागू संपत्ति का प्रकारकेवल चल संपत्ति (Movable Properties): बैंक बैलेंस, शेयर, बॉन्ड, प्रोविडेंट फंड, एफडी आदि
अचल संपत्ति पर प्रभावअचल संपत्ति (मकान/जमीन) हेतु यह लागू नहीं होता; उसके लिए Letter of Administration / वरासत होती है
सरकारी कोर्ट फीस (Court Fee)कुल चल संपत्ति के मूल्यांकन का 2% से 3% (राज्यवार कोर्ट फीस अधिनियम के अनुसार)
निस्तारण समय सीमायाचिका दाखिल करने से प्रमाण पत्र जारी होने तक 5 से 8 महीने (अदालती प्रक्रिया अनुसार)

📑 विषय सूची (Table of Contents)

भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 कानूनी प्रावधान: जब किसी व्यक्ति का बिना कोई वैध वसीयत (Will) बनाए असामयिक निधन हो जाता है, और उसके पीछे बैंक खातों में जमा राशि, सावधि जमा (FD), शेयर, म्यूचुअल फंड, बीमा पॉलिसी (LIC), पीएफ या सरकारी प्रतिभूतियां (Securities) छूट जाती हैं—तथा उसमें कोई नामांकित व्यक्ति (Nominee) नहीं होता या वारिसों के बीच विवाद होता है—तब सक्षम दीवानी न्यायालय (Civil Court / District Judge) द्वारा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) जारी किया जाता है। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 की धारा 370 से 390 के तहत जारी यह प्रमाण पत्र उस व्यक्ति को मृतक की चल संपत्तियों और ऋणों (Debts & Securities) को वसूलने और हस्तांतरित करने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्रदान करता है।

1. उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और विधिक वारिस प्रमाण पत्र में क्या अंतर है? {#1-उत्तराधिकार-बनाम-वारिस}

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) कैसे बनवाएं: भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, कोर्ट प्रक्रिया व बैंक दावा पूरी गाइड
चित्र: उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) कैसे बनवाएं: भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, कोर्ट प्रक्रिया व बैंक दावा पूरी गाइड बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।

नागरिक अक्सर 'Legal Heir Certificate' और 'Succession Certificate' में भ्रमित होते हैं:

तुलनात्मक बिंदुविधिक वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)
जारीकर्ता प्राधिकारीराजस्व विभाग (तहसीलदार / एसडीएम / ई-डिस्ट्रिक्ट)दीवानी न्यायालय (Civil Court / District Judge)
कानूनी स्थितिकेवल पारिवारिक संबंध और वारिसों की पहचान का प्रशासनिक साक्ष्यन्यायालयीन न्यायिक डिक्री (Judicial Decree), पूर्ण कानूनी बाध्यता
वित्तीय सीमाबैंक सामान्यतः छोटे क्लेम (₹2 लाख से ₹5 लाख तक) में स्वीकार करते हैंअसीमित वित्तीय राशि (करोड़ों रुपये के शेयर, बैंक जमा, म्यूचुअल फंड हेतु)
विवाद की स्थितिवारिसों में विवाद होने पर तहसीलदार जारी नहीं कर सकतायदि वारिसों में विवाद हो, तब भी न्यायालय साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है
लागत व समय₹15-50 फीस, 15 से 30 दिन में जारीसंपत्ति का 2-3% कोर्ट फीस, 6 से 8 माह का समय

2. उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता कब और किन संपत्तियों पर पड़ती है? {#2-आवश्यकता-व-संपत्तियां}

निम्नलिखित परिस्थितियों में बैंक और वित्तीय संस्थान बिना कोर्ट के सक्सेशन सर्टिफिकेट के पैसा रिलीज नहीं करते:

  1. बड़ी बैंक जमा व एफडी (Bank Deposits & Fixed Deposits): जब बैंक में जमा राशि ₹5 लाख से अधिक हो और खाते में कोई वैध नॉमिनी पंजीकृत न हो।
  2. डीमैट खाते, शेयर व म्यूचुअल फंड (Shares & Demat Holdings): कंपनियों और रजिस्ट्रार (जैसे CAMS, KFintech) में शेयरों के कानूनी ट्रांसमिशन हेतु।
  3. कर्मचारी भविष्य निधि व ग्रेच्युटी (EPFO & Gratuity): यदि कर्मचारी ने सेवा पुस्तिका में किसी को नामित नहीं किया था।
  4. बीमा पॉलिसी दावे (Life Insurance Claims): जहां नॉमिनी की मृत्यु पॉलिसीधारक से पहले हो चुकी हो।
  5. सरकारी प्रतिभूतियां, किसान विकास पत्र (KVP) व राष्ट्रीय बचत पत्र (NSC)।
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3. अनिवार्य दस्तावेज चेकलिस्ट (Required Documents) {#3-आवश्यक-दस्तावेज}

याचिका के साथ सिविल कोर्ट में प्रस्तुत किए जाने वाले कागजात:

  1. मृतक का मूल डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र (Original Death Certificate)।
  2. मृतक के स्थायी निवास का साक्ष्य: पैन कार्ड, आधार कार्ड, बिजली बिल या पासपोर्ट।
  3. सभी कानूनी वारिसों के पहचान व पते के प्रमाण: पत्नी, बच्चों, और मां (यदि जीवित हों) के आधार कार्ड।
  4. चल संपत्तियों का सम्पूर्ण आधिकारिक विवरण:
  • बैंक पासबुक की सत्यापित प्रति अथवा बैंक मैनेजर द्वारा जारी बैलेंस सर्टिफिकेट।
  • डीमैट खाते का सीएएस (Consolidated Account Statement) जिसमें शेयरों की कुल वैल्यू दर्ज हो।
  • एफडी रसीदें, डाकघर बचत पासबुक, बीमा बॉन्ड की प्रतियां।
  1. तहसीलदार द्वारा जारी पारिवारिक सदस्य प्रमाण पत्र (Family Tree / Surviving Member Certificate)।
  2. अन्य वारिसों का अनापत्ति शपथ पत्र (NOC): यदि अन्य वारिस किसी एक मुख्य वारिस के पक्ष में अपना दावा छोड़ना चाहते हैं।

4. सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल करने से प्रमाण पत्र मिलने तक 6 चरण {#4-चरणबद्ध-अदालती-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[दीवानी अधिवक्ता द्वारा धारा 372 के तहत याचिका ड्राफ्टिंग] --> B[जिला न्यायालय में याचिका व संपत्ति मूल्यांकन दाखिल]

B --> C[न्यायालय द्वारा 2 प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में सार्वजनिक नोटिस]

C --> D[30 से 45 दिन तक किसी आपत्ति का इंतजार व गवाहों के बयान]

D --> E[न्यायालय द्वारा याचिका स्वीकार व निर्धारित कोर्ट फीस जमा आदेश]

E --> F[वारिस द्वारा कोर्ट फीस स्टाम्प व स्योरिटी बॉन्ड जमा]

F --> G[न्यायालय द्वारा आधिकारिक मुहर युक्त Succession Certificate जारी]

```

  1. याचिका तैयार करना (Filing of Petition): अधिवक्ता द्वारा धारा 372 के तहत विस्तृत याचिका तैयार की जाती है, जिसमें मृतक की मृत्यु का समय, स्थान, सभी वारिसों के विवरण और चल संपत्तियों की सटीक सूची दी जाती है।
  2. प्रारंभिक सुनवाई (Preliminary Hearing): न्यायाधीश दस्तावेजों का अवलोकन कर याचिका को पंजीकृत करते हैं।
  3. सार्वजनिक उद्घोषणा (Public Notice / Citation): अदालत आम जनता को सूचित करने के लिए एक प्रमुख स्थानीय भाषा और एक अंग्रेजी अखबार में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराने का आदेश देती है।
  4. गवाही और साक्ष्य (Evidence Stage): मुख्य याचिकाकर्ता और गवाह अदालत में हाजिर होकर हलफनामे पर अपनी गवाही दर्ज कराते हैं और मृत्यु प्रमाण पत्र व बैंक कागजात का मूल प्रदर्शन (Exhibiting Documents) करते हैं।
  5. अंतिम निर्णय (Judgment): यदि 45 दिनों में कोई तृतीय पक्ष आपत्ति दर्ज नहीं कराता, तो अदालत याचिकाकर्ता के पक्ष में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने का निर्णय सुनाती है।

5. अखबार में सार्वजनिक नोटिस और आपत्ति नियम {#5-अखबार-नोटिस-नियम}

अदालत अखबार में नोटिस इसलिए छपवाती है ताकि मृतक का कोई अज्ञात लेनदार (Creditor), गुप्त वसीयतदार (Will Beneficiary) या कोई अन्य उत्तराधिकारी छूट न जाए:

  • नोटिस में स्पष्ट लिखा होता है कि यदि किसी व्यक्ति को इस संपत्ति पर कोई आपत्ति या अधिकार हो, तो वह निर्धारित तिथि तक न्यायालय के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराए।
  • यदि कोई आपत्ति आती है (जैसे कोई अन्य व्यक्ति आकर मृतक की नई वसीयत प्रस्तुत कर दे), तो अदालत मामले को 'विवादित वाद (Contested Suit)' में बदल देती है और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद गुण-दोष पर फैसला करती है।

6. न्यायालयीन कोर्ट फीस और क्षतिपूर्ति बॉन्ड (Indemnity Bond) {#6-कोर्ट-फीस-व-बॉन्ड}

  • कोर्ट फीस (Court Fee Stamps): उत्तराधिकार प्रमाण पत्र पर संबंधित राज्य के 'कोर्ट फीस एक्ट' के तहत स्टाम्प शुल्क लगता है। सामान्यतः यह कुल चल संपत्ति के मूल्य का 2% से 3% (अधिकतम सीमा कई राज्यों में ₹50,000 से ₹1,00,000) होता है। यह शुल्क निर्णय होने के बाद ज्यूडिशियल स्टाम्प के रूप में अदालत में जमा करना होता है।
  • श्योरिटी बॉन्ड (Surety / Indemnity Bond): न्यायालय प्रमाण पत्र सौंपने से पहले याचिकाकर्ता से एक ज़मानतदार (Surety) और क्षतिपूर्ति बॉन्ड मांगता है, ताकि यदि भविष्य में कोई वास्तविक हकदार सामने आए, तो याचिकाकर्ता उस राशि को लौटाने के लिए कानूनन जिम्मेदार रहे।

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  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), भारतीय न्यायालय की न्याय तुला, जिला जज कोर्ट का आधिकारिक आदेश पत्र, बैंक पासबुक और शेयर प्रमाण पत्रों का संयोजन।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या जमीन या मकान (अचल संपत्ति) के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी हो सकता है?

A. नहीं। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 370 के अनुसार, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र केवल 'ऋणों और प्रतिभूतियों (Debts and Securities)' यानी चल संपत्ति के लिए ही जारी किया जाता है। कृषि भूमि, आवासीय मकान, दुकान या फ्लैट हेतु राजस्व विभाग में वरासत (म्यूटेशन) कराई जाती है या यदि वसीयत है तो न्यायालय से 'प्रोबेट (Probate)' या 'लेटर ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (Letter of Administration)' प्राप्त किया जाता है।

Q. यदि बैंक खाते में नॉमिनी (Nominee) दर्ज है, तो क्या तब भी कोर्ट जाना जरूरी है?

A. नहीं। भारतीय बैंकिंग नियम और आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि खाते में वैध नॉमिनी पंजीकृत है, तो बैंक केवल मृत्यु प्रमाण पत्र और नॉमिनी के केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर पूरा पैसा नॉमिनी को सौंपने के लिए बाध्य है। नॉमिनी को कोर्ट से सक्सेशन सर्टिफिकेट लाने की कोई आवश्यकता नहीं होती।

Q. उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मिलने के बाद बैंक से पैसा कैसे निकलता है?

A. अदालत द्वारा जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) लेकर संबंधित बैंक शाखा में जाएं। इसके साथ अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और क्लेम फॉर्म जमा करें। बैंक प्रबंधक अपने कानूनी विभाग (Legal Cell) से सत्यापन कराकर 7 से 14 दिनों के भीतर पूरी जमा राशि आपके खाते में ट्रांसफर कर देता है।

Q. क्या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) कैसे बनवाएं को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।