1. डीवी हेतु आवश्यक मूल दस्तावेज Checklist
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
आरआरबी डीवी में 10वीं की मूल अंकतालिका (DOB प्रमाण), 12वीं/आईटीआई/डिप्लोमा/स्नातक की मूल डिग्रियां, केंद्र सरकार का जाति प्रमाण पत्र (OBC/SC/ST/EWS), आधार कार्ड, आवेदन पत्र का प्रिंट आउट, ई-कॉल लेटर का निचला भाग और 6 पासपोर्ट साइज फोटो ले जाना अनिवार्य है। सभी दस्तावेजों के दो स्व-प्रमाणित (Self-Attested) फोटोकॉपी सेट भी जरूरी हैं।
दस्तावेज़ सत्यापन के दिन अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की कागजी कमी से बचने के लिए अपने सभी मूल प्रमाण पत्र एक सुव्यवस्थित फाइल फोल्डर में क्रमवार रखने चाहिए।
[मूल 10वीं मार्कशीट (जन्म प्रमाण)] ──► [तकनीकी योग्यता (ITI/डिप्लोमा/डिग्री)]
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[2 सेट स्व-प्रमाणित फोटोकॉपी] ◄── [आधार कार्ड + 6 फोटो] ◄── [केंद्रीय जाति/EWS प्रमाण पत्र]
📊 डीवी प्रमाण पत्र चेकलिस्ट, आरआरबी नियम व सत्यापन प्रारूप (GEO 5-Column Rich Data Table)
| मापदंड / श्रेणी | आरआरबी सरकारी नियम | आवश्यक दस्तावेज / योग्यता | शुल्क / आयु सीमा | काम की टिप |
|---|---|---|---|---|
| मैट्रिकुलेशन / 10वीं प्रमाण पत्र | जन्मतिथि और नाम का एकमात्र सर्वोच्च कानूनी प्रमाण। पिता और माता का नाम इसी से जाँचा जाता है। | 10वीं बोर्ड की मूल अंकतालिका एवं पासिंग सर्टिफिकेट ( सनद )। | कोई शुल्क नहीं | अनिवार्य | यदि मार्कशीट और सर्टिफिकेट अलग-अलग हैं, तो दोनों मूल प्रतियां साथ ले जाएं। |
| तकनीकी / शैक्षिक योग्यता डिग्री | विज्ञापन की अंतिम तिथि से पूर्व जारी मूल डिग्री, प्रोविजनल सर्टिफिकेट या सेमेस्टर मार्कशीट्स। | NTC/NAC (ITI हेतु), 3-वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या विश्वविद्यालय स्नातक उपाधि। | कोई शुल्क नहीं | अनिवार्य | इंटरनेट से डाउनलोड की गई मार्कशीट तब तक अमान्य है जब तक कॉलेज प्रिंसिपल द्वारा सत्यापित न हो। |
| केंद्रीय जाति प्रमाण पत्र (SC / ST) | संविधान (अनुसूचित जाति/जनजाति) आदेश के तहत केंद्रीय प्रारूप (Annexure-I) में जारी डिजिटल प्रमाण पत्र। | सक्षम राजस्व अधिकारी (Tehsildar / SDO / DM) द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र। | कोई शुल्क नहीं | आजीवन मान्य | राज्य फॉर्मेट का जाति प्रमाण पत्र डीवी में स्वीकार नहीं किया जाता; सेंट्रल प्रोफॉर्मा ले जाएं। |
| ओबीसी-नॉन क्रीमी लेयर (OBC-NCL) | भारत सरकार की केंद्रीय सूची (Central OBC List) में शामिल जाति और चालू वित्तीय वर्ष का NCL प्रमाण। | सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी Annexure-II प्रारूप में OBC-NCL प्रमाण पत्र। | वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु वैध | प्रमाण पत्र 1 वर्ष से पुराना नहीं होना चाहिए; नॉन-क्रीमी लेयर डिक्लेरेशन भी देना होगा। |
| आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) | पारिवारिक वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होने का प्रमाण पत्र जो वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मान्य हो। | Annexure-III प्रारूप में तहसीलदार या समकक्ष अधिकारी द्वारा जारी ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र। | चालू वित्तीय वर्ष में वैध | आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) अलग होता है; ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र अलग होता है। |
| पूर्व सैनिक डिस्चार्ज बुक (Ex-SM) | रक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्ति का आधिकारिक प्रमाण और अनापत्ति प्रमाण पत्र। | सशस्त्र बलों की मूल डिस्चार्ज बुक, पेंशन भुगतान आदेश (PPO) और पहचान पत्र। | लागू नहीं | मूल प्रति अनिवार्य | सैनिक कल्याण बोर्ड द्वारा जारी सिविल रोजगार पंजीकरण कार्ड भी साथ रखें। |
| दिव्यांग प्रमाण पत्र (PwBD Certificate) | 40% या उससे अधिक स्थायी दिव्यांगता की पुष्टि करने वाला सरकारी मेडिकल बोर्ड कार्ड। | सक्षम मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO / Civil Surgeon) द्वारा जारी Annexure-V प्रमाण पत्र। | यूडीआईडी (UDID) कार्ड मान्य | यूडीआईडी डिजिटल कार्ड होने पर सत्यापन प्रक्रिया अत्यंत तीव्र और सुगम हो जाती है। |
2. ओबीसी-एनसीएल (OBC-NCL) व ईडब्ल्यूएस (EWS) वित्तीय वर्ष प्रमाण पत्र नियम
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
ओबीसी-एनसीएल प्रमाण पत्र विज्ञापन जारी होने के वित्तीय वर्ष (2025-26) का होना चाहिए और स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए कि अभ्यर्थी क्रीमी लेयर के दायरे में नहीं आता। ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र भी उसी वित्तीय वर्ष की आय (Income Assessment Year) के आधार पर जारी होना चाहिए; पुराने वित्तीय वर्ष के प्रमाण पत्र पर आरक्षण का लाभ निरस्त हो जाता है।
लाखों अभ्यर्थी केवल इसलिए सामान्य श्रेणी (UR) में डाल दिए जाते हैं क्योंकि उनके पास राज्य सरकार का जाति प्रमाण पत्र होता है, जिस पर लिखा होता है "राज्य की सेवाओं के लिए"।
ओबीसी-एनसीएल के 3 महत्वपूर्ण नियम
- केंद्रीय सूची में जाति का नाम (National OBC Commission): आपकी जाति केंद्र सरकार की 'Central List of Other Backward Classes' में अधिसूचित होनी चाहिए। यदि आपकी जाति राज्य में ओबीसी है लेकिन केंद्र में नहीं, तो आपको आरक्षण नहीं मिलेगा।
- नॉन-क्रीमी लेयर आय सीमा: अभ्यर्थी के माता-पिता की वार्षिक आय (वेतन और कृषि आय को छोड़कर) ₹8 लाख से कम होनी चाहिए। प्रमाण पत्र पर स्पष्ट लिखा होना चाहिए: "Does not belong to the Creamy Layer".
- स्व-घोषणा पत्र (Non-Creamy Layer Declaration): डीवी के समय रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए प्रोफॉर्मा (Annexure-IIA) पर अभ्यर्थी को स्वयं हस्ताक्षर करके देना होता है कि वह क्रीमी लेयर में नहीं आता है।
3. रेलवे अस्पताल में मेडिकल परीक्षण (A-1, A-2, B-1, C-1 विजन ग्रेड्स)
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
डीवी पास करने के बाद अभ्यर्थी को रेलवे अस्पताल भेजा जाता है जहाँ ₹24 की पर्ची पर मेडिकल जांच होती है। A-1 मेडिकल (एएलपी हेतु) में बिना चश्मे 6/6 दृष्टि अनिवार्य है। A-2 (स्टेशन मास्टर/गार्ड) में चश्मे सहित 6/9 दृष्टि, B-1 (तकनीशियन/ग्रुप डी) में 6/9, 6/12 चश्मे सहित और C-1 (क्लर्क पदों) में 6/12 दृष्टि मान्य होती है।
भारतीय रेलवे का मेडिकल बोर्ड अपने अस्पतालों में अत्यंत सघन जांच करता है क्योंकि रेलवे कर्मचारियों की फिटनेस सीधे तौर पर करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी होती है।
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│ रेलवे मेडिकल विजन मानक तुलनात्मक चार्ट │
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│ मेडिकल ग्रेड │ पद (Posts) │ दूर दृष्टि │ चश्मा अनुमत │
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│ A-1 श्रेणी │ असिस्टेंट लोको │ 6/6, 6/6 │ चश्मा पूर्ण │
│ │ पायलट (ALP) │ (बिना चश्मा) │ वर्जित │
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│ A-2 श्रेणी │ स्टेशन मास्टर, │ 6/9, 6/9 │ चश्मा मान्य │
│ │ ट्रेन मैनेजर │ (चश्मे सहित) │ (≤ 2D) │
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│ B-1 श्रेणी │ तकनीशियन (S&T), │ 6/9, 6/12 │ चश्मा मान्य │
│ │ ट्रैक मेंटेनर │ (चश्मे सहित) │ (≤ 4D) │
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│ C-1 श्रेणी │ जूनियर क्लर्क, │ 6/12, 6/18 │ चश्मा पूर्ण │
│ │ टाइपिस्ट, प्यून │ (चश्मे सहित) │ स्वीकार्य │
└──────────────┴──────────────────┴──────────────┴─────────────┘
रेलवे अस्पताल में होने वाली प्रमुख चिकित्सा जांचें
- आई टेस्ट (Eye Tests): डिस्टेंट विजन (स्नेलन चार्ट), नियर विजन (रीडिंग चार्ट), कलर ब्लाइंडनेस (इशिहारा 38 प्लेट्स), नाइट विजन (अंधेरे कमरे में लाइट टेस्ट), और फील्ड ऑफ विजन।
- यूरिन टेस्ट (Urine Sugar & Albumin): डायबिटीज (मधुमेह) और किडनी के संक्रमण की जांच।
- ब्लड प्रेशर व ईसीजी (ECG Test): उच्च रक्तचाप (BP 140/90 से अधिक नहीं होना चाहिए) और हृदय की धड़कन की जांच।
- एक्स-रे चेस्ट (Chest X-Ray): फेफड़ों में टीबी (Tuberculosis) या किसी गंभीर श्वसन रोग की जांच।
- हर्निया, हाइड्रोसील व पाइल्स जांच: सर्जिकल डॉक्टर द्वारा शारीरिक विकृतियों की भौतिक जांच की जाती है।
4. शरीर पर टैटू (Tattoo) व सर्जरी के निशानों पर रेलवे बोर्ड नियम
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
रेलवे में भारतीय सेना या अर्धसैनिक बलों की तरह टैटू पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है; धार्मिक टैटू या हाथ के भीतरी हिस्से पर सामान्य टैटू पूरी तरह मान्य हैं। अपेंडिक्स, पथरी या हर्निया की पुरानी सफल सर्जरी मान्य है, लेकिन आंखों की लेसिक (LASIK) सर्जरी सुरक्षा पदों (A-1 व A-2) पर पूर्णतः प्रतिबंधित है।
लाखों युवा अपने शरीर पर बने टैटू या बचपन में लगी चोट/सर्जरी के निशानों को लेकर भारी तनाव में रहते हैं। रेलवे बोर्ड की आधिकारिक स्थिति निम्नलिखित है:
टैटू और पूर्व सर्जरी के आधिकारिक दिशानिर्देश
- टैटू की स्वीकार्यता (Tattoo Policy):
- रेलवे कोई रक्षा बल (Army) नहीं है, बल्कि एक नागरिक परिवहन सेवा है।
- हाथ की कलाई के अंदरूनी हिस्से पर नाम, धार्मिक चिन्ह (उदा. 'ॐ' या 'क्रॉस') बने होने पर कोई आपत्ति नहीं की जाती।
- केवल ऐसे टैटू जो अश्लील, भड़काऊ या राष्ट्रविरोधी हों, आपत्तिजनक माने जाते हैं।
- सामान्य सर्जरी के निशान (Surgical Scars):
- यदि किसी अभ्यर्थी का अपेंडिक्स (Appendix), पित्त की थैली की पथरी (Gallbladder Stones), या हर्निया का ऑपरेशन हुआ है और वह पूरी तरह ठीक हो चुका है, तो वह 100% फिट माना जाता है। बस अपने साथ उस ऑपरेशन की पुरानी डिस्चार्ज समरी (Discharge Summary) अवश्य रखें।
- लेसिक सर्जरी (LASIK Prohibited):
- एएलपी (A-1) और स्टेशन मास्टर (A-2) के लिए लेसिक सर्जरी 100% प्रतिबंधित है।
- हालांकि, क्लर्क (C-1) और कुछ तकनीशियन पदों (B-2/C-1) के लिए लेसिक वाले अभ्यर्थी पात्र माने जाते हैं।
5. री-मेडिकल (Re-Medical Appeal) प्रक्रिया और ₹50 फीस नियम
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
यदि रेलवे मेडिकल बोर्ड आपको अनफिट (Unfit) घोषित करता है, तो आप 30 दिनों के भीतर जोनल रेलवे के प्रिंसिपल चीफ मेडिकल डायरेक्टर (PCMD) के समक्ष री-मेडिकल अपील दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए किसी सरकारी विशेषज्ञ डॉक्टर (MD/MS) से फिटनेस सर्टिफिकेट और ₹50 का डिमांड ड्राफ्ट (DD) जमा करना होता है।
यदि किसी अभ्यर्थी को लगता है कि रेलवे डॉक्टर ने उसे गलत तरीके से अनफिट किया है (जैसे तनाव के कारण बीपी बढ़ जाना या आंख की जांच में जल्दबाजी करना), तो रेलवे नियम उसे उच्चस्तरीय विशेषज्ञ बोर्ड के समक्ष अपील का वैधानिक अधिकार देते हैं।
[रेलवे अस्पताल में अनफिट घोषित] ──► [30 दिनों के भीतर री-मेडिकल अपील तैयार करें]
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[सरकारी विशेषज्ञ (MD/MS) का सर्टिफिकेट लें] ──► [₹50 का डिमांड ड्राफ्ट (FA&CAO नाम)]
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[PCMD जोनल ऑफिस में अपील सबमिट] ──► [3 डॉक्टरों के अपीलीय मेडिकल बोर्ड द्वारा पुनः जांच]
री-मेडिकल अपील दर्ज करने के 4 अनिवार्य चरण
- सरकारी स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जांच कराएं: अनफिट होने के बाद किसी प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष (HOD) या जिला अस्पताल के वरिष्ठ विशेषज्ञ (Civil Surgeon) के पास जाएं। उनसे अपनी उस बीमारी/विजन की जांच कराएं और स्पष्ट लिखवाएं: "I have examined this candidate and in my opinion, he is medically fit for Railway service."
- ₹50 का डिमांड ड्राफ्ट (DD) बनवाएं: किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक (SBI आदि) से "FA & CAO [संबंधित जोनल रेलवे]" के पक्ष में ₹50 का डिमांड ड्राफ्ट बनवाएं।
- अपील पत्र (Appeal Application) लिखें: संबंधित क्षेत्रीय आरआरबी के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए एक औपचारिक पत्र लिखें जिसमें अपना रोल नंबर, अनफिट किए जाने का कारण और सरकारी डॉक्टर के प्रमाण पत्र का हवाला दें।
- पंजीकृत डाक या व्यक्तिगत रूप से जमा करें: अपील पत्र, मूल मेडिकल सर्टिफिकेट और ₹50 का डीडी अनफिट मेमो मिलने की तारीख से ठीक 30 दिनों के भीतर संबंधित आरआरबी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से या रजिस्टर्ड डाक से पहुंचाएं। अपील स्वीकार होने पर 3 वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों (CMS) का उच्चस्तरीय बोर्ड आपकी पुनः जांच करता है और उनका निर्णय अंतिम होता है।
6. डीवी और मेडिकल आपातकालीन समाधान (Citizen Troubleshooting)
💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
यदि 10वीं मार्कशीट और आधार के नाम में स्पेलिंग अंतर है, तो ₹100 का नोटरी शपथ पत्र (Affidavit) डीवी में 100% मान्य होता है। यदि मेडिकल के दिन पीलिया या बुखार हो, तो 15 दिनों का मेडिकल एक्सटेंशन लिया जा सकता है। सरकारी कर्मचारियों को डीवी के समय मूल एनओसी (NOC) देना अनिवार्य है।
डीवी और मेडिकल के दौरान अभ्यर्थियों के सामने आने वाली 3 सबसे गंभीर आपातकालीन स्थितियां और उनके समाधान:
1. 10वीं मार्कशीट और डिग्री प्रमाण पत्रों में नाम की स्पेलिंग में अंतर (Minor Name Discrepancy)
- समस्या का कारण: मार्कशीट में 'Kumari' जुड़ा होना और डिग्री में न होना, या पिता के नाम में स्पेस की गलती होना।
- समाधान का तरीका: इसके लिए विश्वविद्यालय के चक्कर काटने की तत्काल आवश्यकता नहीं है। प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) या नोटरी पब्लिक द्वारा जारी ₹100 के नॉन-ज्यूडिशियल स्टांप पेपर पर एक शपथ पत्र (Affidavit) बनवाएं। इसमें स्पष्ट लिखें कि "दस्तावेजों में दर्ज दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं"। आरआरबी डीवी कमेटी इस शपथ पत्र को जमा करके आपकी उम्मीदवारी को स्वीकार कर लेती है।
2. मेडिकल टेस्ट वाले दिन तेज बुखार, टाइफाइड या पीलिया (Jaundice) हो जाना
- समस्या का कारण: अस्वस्थ होने के कारण यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट या लिवर फंक्शन टेस्ट में खराबी आ जाना और डॉक्टर द्वारा अनफिट किए जाने का डर।
- समाधान का तरीका: बीमार होने की स्थिति में कभी भी मेडिकल टेस्ट में शामिल न हों। तुरंत रेलवे अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के समक्ष एक आवेदन पत्र प्रस्तुत करें जिसमें अपनी बीमारी की सरकारी डॉक्टर की पर्ची संलग्न करें और 'Medical Extension' (समय वृद्धि) का अनुरोध करें। रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार अभ्यर्थी को पूरी तरह ठीक होने के लिए 15 से 30 दिनों का अतिरिक्त समय सहर्ष प्रदान कर दिया जाता है।
3. राज्य सरकार या पीएसयू (PSU) में कार्यरत कर्मचारियों के लिए NOC न मिल पाना
- समस्या का कारण: वर्तमान विभाग द्वारा समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (No Objection Certificate) जारी न करना।
- समाधान का तरीका: यदि डीवी की तारीख तक आपके विभाग ने एनओसी जारी नहीं की है, तो फॉर्म भरते समय अपने विभाग को दी गई 'सूचना पत्र' (Intimation Copy / Receiving Copy) और एनओसी के लिए दिए गए आवेदन की पावती लेकर जाएं। डीवी कमेटी से एक निर्धारित समय (15 से 30 दिन) का अंडरटेकिंग फॉर्म मांगें। आपको समय दे दिया जाएगा, जिसके भीतर आपको मूल एनओसी या विभाग से त्यागपत्र की प्रति जमा करनी होगी।
🔗 पैरेंट मास्टर गाइड देखें: आरआरबी भर्ती 2026 की मास्टर गाइड देखें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (User FAQs)
प्र. 1: क्या रेलवे अस्पताल में मेडिकल टेस्ट के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: हाँ, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन सफल होने के बाद रेलवे भर्ती बोर्ड अभ्यर्थी को एक 'मेडिकल मेमो' (Medical Memo) जारी करता है, जिसके लिए रेलवे अस्पताल के काउंटर पर मात्र ₹24 का मामूली शुल्क नकद जमा करना होता है। इसके अलावा एक्सरे, ब्लड, यूरिन और आंखों के सभी आधुनिक परीक्षण पूरी तरह निःशुल्क किए जाते हैं।
प्र. 2: यदि किसी अभ्यर्थी के पास ग्रेजुएशन की मूल डिग्री नहीं है तो क्या प्रोविजनल मान्य होगी?
उत्तर: हाँ, यदि विश्वविद्यालय द्वारा अभी तक मूल दीक्षांत उपाधि (Original Degree) जारी नहीं की गई है, तो विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक (Controller of Examinations) या रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षरित मूल प्रोविजनल डिग्री प्रमाण पत्र (Provisional Certificate) डीवी में 100% कानूनी रूप से मान्य होता है।
प्र. 3: क्या री-मेडिकल में पास होने पर पहले का अनफिट फैसला रद्द हो जाता है?
उत्तर: हाँ, यदि तीन वरिष्ठ रेलवे डॉक्टरों का अपीलीय मेडिकल बोर्ड आपको री-मेडिकल में फिट घोषित कर देता है, तो पहले वाले डॉक्टर का अनफिट फैसला स्वतः शून्य (Null & Void) हो जाता है और अभ्यर्थी को तुरंत मेरिट के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाता है।