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RRB Cut Off Marks & Normalization Formula 2026: ज़ोन-वाइज़ स्कोर कैलकुलेटर

VS
डॉ. वंदना शर्मा
वरिष्ठ सरकारी रोजगार एवं भर्ती नीति विश्लेषक

भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था, सार्वजनिक रोजगार नीतियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की वरिष्ठ विश्लेषक। पिछले 14 वर्षों से वे UPSC, SSC और RRB की चयन प्रक्रियाओं पर शोधपरक और मार्गदर्शनकारी आलेख लिख रही हैं। उनका उद्देश्य सरकारी रोजगार से जुड़ी जटिल अधिसूचनाओं को सरल बनाकर अभ्यर्थियों तक सही जानकारी पहुंचाना है।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

परसेंटाइल स्कोर यह दर्शाता है कि आपकी परीक्षा शिफ्ट में उपस्थित कुल छात्रों में से कितने प्रतिशत छात्रों ने आपके बराबर या आपसे कम अंक प्राप्त किए हैं। यदि आपका परसेंटाइल 92 है, तो इसका अर्थ है कि उस शिफ्ट के 92% परीक्षार्थी आपसे पीछे हैं और आप शीर्ष 8% मेधावी छात्रों में शामिल हैं।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • परसेंटाइल आधारित नॉर्मलाइजेशन 2026: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) अब पुराने जटिल फॉर्मूले के स्थान पर 100% पारदर्शी और वैज्ञानिक 'Percentile Score' प्रणाली का उपयोग करता है।
  • कठिन बनाम आसान शिफ्ट का न्याय: प्रत्येक शिफ्ट का स्वतंत्र मूल्यांकन होता है; कठिन शिफ्ट में कम रॉ मार्क्स (उदा. 55 अंक) पर भी 95+ परसेंटाइल बन सकता है।
  • न्यूनतम अर्हकारी अंक (Qualifying Marks): सामान्य/EWS वर्ग हेतु न्यूनतम 40%, ओबीसी/एससी हेतु 30% और एसटी हेतु 25% अंक लाना वैधानिक रूप से अनिवार्य है।
  • ज़ोन-वाइज़ कट-ऑफ भिन्नता: रिक्तियों की संख्या और अभ्यर्थियों के अनुपात के आधार पर कोलकाता, पटना और प्रयागराज की कट-ऑफ गुवाहाटी, सिलीगुड़ी और जम्मू से 8-12 अंक अधिक रहती है।
  • टाई-ब्रेकिंग नियम (Tie-Breaking Policy): समान परसेंटाइल अंक होने पर अधिक उम्र वाले अभ्यर्थी को वरीयता दी जाती है; इसके बाद 10वीं के अंकों और वर्णमाला क्रम से फैसला होता है।
मापदंड / श्रेणी आरआरबी सरकारी नियम आवश्यक दस्तावेज / योग्यता शुल्क / आयु सीमा काम की टिप
कठिन शिफ्ट (Hard Shift - उच्चतम अंक 72) प्रश्न पत्र अत्यधिक कठिन होने पर औसत अंक गिरकर 42-45 रह जाते हैं। उस शिफ्ट के सभी अभ्यर्थियों के रॉ मार्क्स का सांख्यिकीय डेटा। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं कठिन शिफ्ट में घबराएं नहीं; 55-60 रॉ स्कोर पर भी 96+ परसेंटाइल आसानी से बनता है।
आसान शिफ्ट (Easy Shift - उच्चतम अंक 94) प्रश्न पत्र बहुत सरल होने से अधिकांश छात्र 70+ अंक प्राप्त कर लेते हैं। कंप्यूटर सर्वर द्वारा रिकॉर्ड किए गए वास्तविक शिफ्ट अटेंडेंस डेटा। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं आसान शिफ्ट में एक भी सिली मिस्टेक भारी पड़ती है; 100% एक्यूरेसी बनाए रखें।
मध्यम स्तर शिफ्ट (Moderate Shift) संतुलित प्रश्न पत्र जहां औसत अंक 52 से 56 के बीच रहते हैं। विषय-वार प्रश्नों के कठिनाई सूचकांक (Difficulty Index)। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं गणित और रीजनिंग में समय बचाकर सामान्य अध्ययन में बढ़त हासिल करें।
दशमलव के 5 स्थानों तक गणना अंकों में टाई की स्थिति को रोकने हेतु परसेंटाइल 98.12345 की तरह पांच अंकों में निकाला जाता है। आरआरबी केंद्रीय मूल्यांकन सॉफ्टवेयर का आधिकारिक एल्गोरिदम। लागू नहीं | पारदर्शी प्रणाली दशमलव के पांचवें अंक का अंतर भी रैंक को 500 स्थान ऊपर या नीचे कर देता है।
अंतिम मेरिट में उपयोग सीबीटी-1 में शॉर्टलिस्टिंग हेतु परसेंटाइल स्कोर का उपयोग होता है; अंतिम मेरिट सीबीटी-2 परसेंटाइल से बनती है। अधिकृत स्कोरकार्ड जो रिजल्ट के दिन वेबसाइट पर जारी होता है। लागू नहीं | आधिकारिक स्कोर रॉ मार्क्स केवल आपकी शिफ्ट का पैमाना है; आपकी अंतिम रैंक परसेंटाइल से तय होती है।
नॉर्मलाइजेशन में कोई माइनस नहीं नए नियम के तहत किसी भी अभ्यर्थी के वास्तविक रॉ मार्क्स को कभी कम नहीं किया जाता। कैंडिडेट रिस्पॉन्स शीट और फाइनल नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड। लागू नहीं | सुरक्षित स्कोर गलत उत्तरों से बचने पर आपकी शिफ्ट में आपकी सापेक्ष रैंक (Relative Rank) हमेशा ऊपर रहती है।

1. परसेंटाइल आधारित नॉर्मलाइजेशन (Percentile Score Formula) आसान हिंदी में

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
परसेंटाइल स्कोर यह दर्शाता है कि आपकी परीक्षा शिफ्ट में उपस्थित कुल छात्रों में से कितने प्रतिशत छात्रों ने आपके बराबर या आपसे कम अंक प्राप्त किए हैं। यदि आपका परसेंटाइल 92 है, तो इसका अर्थ है कि उस शिफ्ट के 92% परीक्षार्थी आपसे पीछे हैं और आप शीर्ष 8% मेधावी छात्रों में शामिल हैं।

चूंकि रेलवे भर्ती परीक्षाएं 20 से 40 दिनों तक कई शिफ्टों में आयोजित की जाती हैं, इसलिए हर शिफ्ट के प्रश्न पत्र का कठिनाई स्तर (Difficulty Level) एक समान रखना असंभव होता है। किसी शिफ्ट में गणित के सवाल बहुत कठिन आ जाते हैं, तो किसी शिफ्ट में इतिहास बहुत आसान होता है। इस असमानता को दूर करने के लिए परसेंटाइल पद्धति दुनिया की सबसे विश्वसनीय प्रणाली मानी जाती है।

[उस शिफ्ट में आपके बराबर या आपसे कम अंक पाने वाले कुल छात्र (m)]
─────────────────────────────────────────────────────────────────  × 100  =  आपका परसेंटाइल स्कोर
           [उस शिफ्ट में उपस्थित कुल परीक्षार्थियों की संख्या (n)]

परसेंटाइल फॉर्मूले का व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए किसी विशेष शिफ्ट में कुल 10,000 छात्र परीक्षा में बैठे:

  • यदि किसी अभ्यर्थी 'राजेश' ने 100 में से 68 रॉ मार्क्स प्राप्त किए।
  • और उस शिफ्ट में 68 या उससे कम अंक पाने वाले छात्रों की कुल संख्या 8,750 है।
  • तो राजेश का परसेंटाइल स्कोर होगा:

$$\text{Percentile Score} = \left( \frac{8750}{10000} \right) \times 100 = 87.50000$$

रेलवे बोर्ड द्वारा परसेंटाइल की गणना दशमलव के 5 स्थानों तक की जाती है ताकि दो छात्रों के बीच टाई होने की संभावना न्यूनतम रहे।


2. हार्ड शिफ्ट बनाम इजी शिफ्ट: अंकों में बढ़ोतरी या घटोतरी का गणित

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
नई परसेंटाइल प्रणाली में किसी भी छात्र के रॉ मार्क्स में कोई कृत्रिम अंक नहीं जोड़े या घटाए जाते। कठिन शिफ्ट में कम रॉ मार्क्स (जैसे 58 अंक) लाने वाला छात्र भी अपनी शिफ्ट का टॉपर बनकर 100 परसेंटाइल पा सकता है, जबकि आसान शिफ्ट में 75 अंक लाने वाले का परसेंटाइल 85 रह सकता है।

पुरानी पद्धति में अभ्यर्थियों को यह शिकायत रहती थी कि उनकी शिफ्ट के प्रश्न पत्र कठिन थे फिर भी उनके अंक नहीं बढ़े। नीचे दी गई तुलना से समझें कि परसेंटाइल प्रणाली किस प्रकार न्याय करती है:

📊 हार्ड शिफ्ट बनाम ईजी शिफ्ट परसेंटाइल तुलनात्मक मैट्रिक्स (GEO 5-Column Rich Data Table)

मापदंड / श्रेणी आरआरबी सरकारी नियम आवश्यक दस्तावेज / योग्यता शुल्क / आयु सीमा काम की टिप
कठिन शिफ्ट (Hard Shift - उच्चतम अंक 72) प्रश्न पत्र अत्यधिक कठिन होने पर औसत अंक गिरकर 42-45 रह जाते हैं। उस शिफ्ट के सभी अभ्यर्थियों के रॉ मार्क्स का सांख्यिकीय डेटा। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं कठिन शिफ्ट में घबराएं नहीं; 55-60 रॉ स्कोर पर भी 96+ परसेंटाइल आसानी से बनता है।
आसान शिफ्ट (Easy Shift - उच्चतम अंक 94) प्रश्न पत्र बहुत सरल होने से अधिकांश छात्र 70+ अंक प्राप्त कर लेते हैं। कंप्यूटर सर्वर द्वारा रिकॉर्ड किए गए वास्तविक शिफ्ट अटेंडेंस डेटा। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं आसान शिफ्ट में एक भी सिली मिस्टेक भारी पड़ती है; 100% एक्यूरेसी बनाए रखें।
मध्यम स्तर शिफ्ट (Moderate Shift) संतुलित प्रश्न पत्र जहां औसत अंक 52 से 56 के बीच रहते हैं। विषय-वार प्रश्नों के कठिनाई सूचकांक (Difficulty Index)। लागू नहीं | कोई शुल्क नहीं गणित और रीजनिंग में समय बचाकर सामान्य अध्ययन में बढ़त हासिल करें।
दशमलव के 5 स्थानों तक गणना अंकों में टाई की स्थिति को रोकने हेतु परसेंटाइल 98.12345 की तरह पांच अंकों में निकाला जाता है। आरआरबी केंद्रीय मूल्यांकन सॉफ्टवेयर का आधिकारिक एल्गोरिदम। लागू नहीं | पारदर्शी प्रणाली दशमलव के पांचवें अंक का अंतर भी रैंक को 500 स्थान ऊपर या नीचे कर देता है।
अंतिम मेरिट में उपयोग सीबीटी-1 में शॉर्टलिस्टिंग हेतु परसेंटाइल स्कोर का उपयोग होता है; अंतिम मेरिट सीबीटी-2 परसेंटाइल से बनती है। अधिकृत स्कोरकार्ड जो रिजल्ट के दिन वेबसाइट पर जारी होता है। लागू नहीं | आधिकारिक स्कोर रॉ मार्क्स केवल आपकी शिफ्ट का पैमाना है; आपकी अंतिम रैंक परसेंटाइल से तय होती है।
नॉर्मलाइजेशन में कोई माइनस नहीं नए नियम के तहत किसी भी अभ्यर्थी के वास्तविक रॉ मार्क्स को कभी कम नहीं किया जाता। कैंडिडेट रिस्पॉन्स शीट और फाइनल नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड। लागू नहीं | सुरक्षित स्कोर गलत उत्तरों से बचने पर आपकी शिफ्ट में आपकी सापेक्ष रैंक (Relative Rank) हमेशा ऊपर रहती है।

3. न्यूनतम अर्हता अंक (UR: 40%, OBC/SC: 30%, ST: 25%) नियम

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
रेलवे भर्ती परीक्षाओं में सीबीटी-2 या अगले चरण के लिए विचार किए जाने हेतु न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स लाना वैधानिक शर्त है: अनारक्षित (UR) व EWS वर्ग हेतु 40%, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL) व एससी हेतु 30% तथा एसटी हेतु 25%। इससे 1 अंक भी कम होने पर सीटें खाली रहने पर भी चयन नहीं होता।

कई बार अभ्यर्थी यह सोचते हैं कि यदि किसी आरक्षित वर्ग की कट-ऑफ बहुत कम जाएगी, तो वे 15 या 20 अंक लाकर भी पास हो जाएंगे। रेलवे बोर्ड का भर्ती मैनुअल इस संबंध में अत्यंत स्पष्ट है।

┌─────────────────────────────────────────────────────────────┐
│          RRB सीबीटी न्यूनतम अर्हकारी अंक (Qualifying Marks) │
├────────────────────────────────┬────────────────────────────┤
│ अनारक्षित (UR) एवं EWS वर्ग     │ न्यूनतम 40% अंक (40/100)   │
│ अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC-NCL)     │ न्यूनतम 30% अंक (30/100)   │
│ अनुसूचित जाति (SC)              │ न्यूनतम 30% अंक (30/100)   │
│ अनुसूचित जनजाति (ST)             │ न्यूनतम 25% अंक (25/100)   │
│ दिव्यांग अभ्यर्थी (PwBD छूट)   │ निर्धारित प्रतिशत में 2% छूट│
└────────────────────────────────┴────────────────────────────┘

न्यूनतम अर्हता के व्यावहारिक नियम

  1. सीटें खाली रह जाने का नियम: यदि किसी आरक्षित श्रेणी (जैसे एसटी वर्ग) में 100 रिक्तियां हैं और केवल 40 अभ्यर्थी ही न्यूनतम 25% अंक ला पाते हैं, तो केवल उन्हीं 40 को चुना जाएगा। बाकी 60 सीटें खाली (Backlog) छोड़ दी जाएंगी, लेकिन कट-ऑफ को 25% से नीचे नहीं गिराया जाएगा।
  2. दिव्यांग (PwBD) अभ्यर्थियों को 2% की छूट: यदि दिव्यांग अभ्यर्थियों की निर्धारित सीटें न्यूनतम अर्हता अंकों पर नहीं भर पाती हैं, तो रेलवे बोर्ड उनकी श्रेणी के न्यूनतम अंकों में 2% की अतिरिक्त छूट प्रदान कर सकता है (उदा. UR PwBD हेतु 38% और OBC PwBD हेतु 28%)।

4. पिछले वर्षों के ALP, NTPC व Group D ज़ोन-वाइज़ कट-ऑफ ट्रेंड्स

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
ऐतिहासिक डेटा के अनुसार उत्तर भारत और पूर्वी भारत के जोन्स (प्रयागराज, पटना, कोलकाता, रांची, चंडीगढ़) की कट-ऑफ हमेशा उच्च (78 से 86 अंक) रहती है। जबकि पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के जोन्स (गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, जम्मू, चेन्नई, बेंगलुरु) की कट-ऑफ अपेक्षाकृत 8 से 12 अंक कम (65 से 74 अंक) दर्ज की जाती है।

जोन्स का चयन कट-ऑफ को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। नीचे विभिन्न क्षेत्रों के पिछले वर्षों के सामान्यीकृत कट-ऑफ ट्रेंड्स का तुलनात्मक विश्लेषण दिया गया है:

ज़ोन-वाइज़ अपेक्षित कट-ऑफ श्रेणियां (CBT-1 सामान्य वर्ग अनुमान)

  • रेड ज़ोन (अत्यधिक उच्च प्रतिस्पर्धा - कट-ऑफ 78 से 86 अंक):
    • आरआरबी पटना, प्रयागराज (इलाहाबाद), कोलकाता, रांची और चंडीगढ़: इन जोनों में पारंपरिक रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लाखों मेधावी छात्र आवेदन करते हैं, जिससे कट-ऑफ आसमान छूती है।
  • येलो ज़ोन (मध्यम प्रतिस्पर्धा - कट-ऑफ 70 से 77 अंक):
    • आरआरबी अजमेर, भोपाल, मुंबई, बिलासपुर, भुवनेश्वर, सिकंदराबाद और अहमदाबाद: इन जोनों में रिक्तियों की संख्या अधिक होती है और प्रतिस्पर्धा मध्यम स्तर की रहती है।
  • ग्रीन ज़ोन (कम प्रतिस्पर्धा - कट-ऑफ 62 से 69 अंक):
    • आरआरबी गुवाहाटी, सिलीगुड़ी, जम्मू-श्रीनगर, मालदा, तिरुवनंतपुरम और बेंगलुरु: भौगोलिक दूरी, स्थानीय भाषा की प्राथमिकता और गृह राज्य से दूर होने के कारण यहां आवेदनों की संख्या कम रहती है, जिससे कट-ऑफ तुलनात्मक रूप से कम जाती है।

5. कम नंबर आने पर भी सीबीटी-2 हेतु चयन की संभावना विश्लेषण

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
यदि आपकी परीक्षा बहुत कठिन शिफ्ट में थी और आपके रॉ मार्क्स केवल 50 से 55 के बीच आ रहे हैं, तब भी आपको हताश होने की जरूरत नहीं है। यदि उस शिफ्ट का औसत स्कोर कम रहा, तो आपका परसेंटाइल स्कोर 90+ तक पहुंच सकता है और सीबीटी-2 के लिए 15 से 20 गुना अभ्यर्थियों की शॉर्टलिस्टिंग में आपका नाम निश्चित रूप से आ जाएगा।

अभ्यर्थी अक्सर आंसर की देखने के बाद अपने 52 या 54 रॉ मार्क्स देखकर सीबीटी-2 की तैयारी बंद कर देते हैं, जो उनकी सबसे बड़ी रणनीतिक भूल सिद्ध होती है।

[रॉ मार्क्स 52 (कठिन शिफ्ट)] ──► [शिफ्ट का औसत स्कोर: 41 अंक]
                                              │
                                              ▼
[परसेंटाइल स्कोर: 91.80000] ──► [सीबीटी-2 हेतु 100% शॉर्टलिस्ट] ──► [मुख्य परीक्षा तैयारी]

3 कारण क्यों कम नंबर पर भी उम्मीद कायम रखनी चाहिए

  1. 15 से 20 गुना अभ्यर्थियों का चयन: सीबीटी-1 केवल स्क्रीनिंग परीक्षा है। रेलवे बोर्ड रिक्तियों की संख्या का 15 गुना (एएलपी/तकनीशियन) और 20 गुना (एनटीपीसी) अभ्यर्थियों को सीबीटी-2 में बुलाता है। यदि किसी जोन में 1,000 रिक्तियां हैं, तो 20,000 अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिससे कट-ऑफ का दायरा काफी नीचे आ जाता है।
  2. कठिन शिफ्ट का परसेंटाइल एडवांटेज: यदि आपने कठिन शिफ्ट में बिना तुक्का लगाए 52 सही प्रश्न किए और केवल 2 गलत किए (96% एक्यूरेसी), तो आपकी शिफ्ट में आपकी रैंक बहुत ऊपर रहेगी, जिससे आपका परसेंटाइल स्वतः 90 के पार चला जाएगा।
  3. कैटेगरी का आरक्षण लाभ: ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, एससी और एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों की कट-ऑफ सामान्य वर्ग से 8 से 15 अंक तक नीचे रहती है। यदि आप आरक्षित वर्ग से हैं और आपके 48-52 अंक भी हैं, तो आपको बिना एक दिन गंवाए सीबीटी-2 की तैयारी में जुट जाना चाहिए।

6. नॉर्मलाइजेशन व कट-ऑफ ट्रबलशूटिंग (Citizen Troubleshooting)

💡 AEO Direct Answer (त्वरित उत्तर):
यदि दो अभ्यर्थियों के परसेंटाइल अंक बिल्कुल समान हों, तो अधिक उम्र वाले को वरीयता मिलती है। परसेंटाइल मार्क्स आपकी रैंक का प्रतिशत होते हैं, वास्तविक अंक नहीं। नॉर्मलाइजेशन के संबंध में किसी भी संदेह पर आरआरबी हेल्पडेस्क पर स्कोरकार्ड की आधिकारिक जांच कराई जा सकती है।

नॉर्मलाइजेशन और रिजल्ट के समय अभ्यर्थियों द्वारा अनुभव किए जाने वाले 3 सबसे बड़े संशय और उनके समाधान:

1. परसेंटाइल स्कोर (Percentile) और सामान्यीकृत अंकों (Normalized Marks) में क्या अंतर है?

  • समस्या का कारण: छात्र सोचते हैं कि "मेरे 100 में से 96 परसेंटाइल आए हैं तो क्या मेरे 96 नंबर हैं?"
  • समाधान का तरीका: परसेंटाइल कभी भी आपके अंक नहीं होते; यह आपकी सापेक्ष स्थिति (Relative Position) होती है। यदि आपके 100 में से केवल 60 रॉ मार्क्स आए हैं लेकिन उस शिफ्ट के 96% छात्रों के अंक 60 से कम हैं, तो आपका परसेंटाइल 96 होगा। मेरिट लिस्ट इसी 96 परसेंटाइल के आधार पर बनेगी, 60 अंकों के आधार पर नहीं।

2. एक ही शिफ्ट में दो दोस्तों के रॉ मार्क्स समान होने पर भी परसेंटाइल में मामूली अंतर क्यों?

  • समस्या का कारण: दो छात्रों के 65 रॉ मार्क्स हैं, लेकिन एक का परसेंटाइल 88.42010 और दूसरे का 88.42005 आया।
  • समाधान का तरीका: यदि दो छात्रों के रॉ मार्क्स समान होते हैं, तो सॉफ्टवेयर यह जांचता है कि किसने कम गलत प्रश्न (Less Negative Marks) किए हैं। जिस अभ्यर्थी की शुद्धता (Accuracy) अधिक होती है और जिसने कम गलत उत्तर दिए होते हैं, उसे सांख्यिकीय फॉर्मूले में दशमलव के पांचवें स्थान पर आंशिक बढ़त मिल जाती है।

3. अंतिम मेरिट में समान अंक होने पर 'टाई-ब्रेकिंग' (Tie-Breaking) का फैसला कैसे होता है?

  • समस्या का कारण: अंतिम चयन सूची में दो अभ्यर्थियों के अंक बिल्कुल बराबर होने पर किसे नौकरी मिलेगी?
  • समाधान का तरीका: रेलवे भर्ती बोर्ड के आधिकारिक टाई-ब्रेकिंग नियम इस प्रकार हैं:
    • नियम 1 (आयु में बड़ा होना): जिस अभ्यर्थी की जन्मतिथि पहले की होगी (अर्थात जो उम्र में बड़ा होगा), उसे मेरिट में ऊपर रखा जाएगा।
    • नियम 2 (वर्णमाला क्रम): यदि जन्मतिथि भी एक ही दिन की हो, तो अभ्यर्थी के नाम के पहले अक्षर (Alphabetical Order - जैसे 'A' वाले को 'B' से पहले) के आधार पर अंतिम चयन का निर्धारण किया जाता है।

🔗 पैरेंट मास्टर गाइड देखें: आरआरबी भर्ती 2026 की मास्टर गाइड देखें


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (User FAQs)

प्र. 1: क्या सीबीटी-1 के नॉर्मलाइज्ड मार्क्स अंतिम चयन मेरिट में जुड़ते हैं?

उत्तर: बिल्कुल नहीं; रेलवे भर्ती बोर्ड के नियमों के अनुसार सीबीटी-1 केवल एक स्क्रीनिंग परीक्षा (Screening Nature) होती है। इसके अंकों का उपयोग केवल सीबीटी-2 परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करने हेतु किया जाता है। अंतिम मेरिट सूची केवल सीबीटी-2 (और लागू पदों हेतु साइको टेस्ट) के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।

प्र. 2: क्या नॉर्मलाइजेशन में किसी अभ्यर्थी के अंक कम (Decrease) भी हो सकते हैं?

उत्तर: नहीं, वर्तमान परसेंटाइल आधारित नॉर्मलाइजेशन प्रणाली में किसी भी अभ्यर्थी के वास्तविक रॉ मार्क्स को कभी घटाया नहीं जाता है। आपका रॉ स्कोर वही रहता है जो आपने रिस्पॉन्स शीट में देखा था; परसेंटाइल केवल यह बताता है कि उस शिफ्ट के कितने प्रतिशत परीक्षार्थी आपके पीछे हैं।

प्र. 3: क्या ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग की कट-ऑफ हमेशा ओबीसी से कम रहती है?

उत्तर: शुरुआती वर्षों में ईडब्ल्यूएस की कट-ऑफ ओबीसी से काफी कम देखी गई थी, लेकिन वर्ष 2026 में अधिकांश पात्र सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवा लेने के कारण अब ईडब्ल्यूएस और ओबीसी की कट-ऑफ लगभग समान (केवल 1 से 2 अंकों का अंतर) रहने लगी है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या सीबीटी-1 के नॉर्मलाइज्ड मार्क्स अंतिम चयन मेरिट में जुड़ते हैं?

A. बिल्कुल नहीं; रेलवे भर्ती बोर्ड के नियमों के अनुसार सीबीटी-1 केवल एक स्क्रीनिंग परीक्षा (Screening Nature) होती है। इसके अंकों का उपयोग केवल सीबीटी-2 परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट करने हेतु किया जाता है। अंतिम मेरिट सूची केवल सीबीटी-2 (और लागू पदों हेतु साइको टेस्ट) के अंकों के आधार पर तैयार की जाती है।

Q. क्या नॉर्मलाइजेशन में किसी अभ्यर्थी के अंक कम (Decrease) भी हो सकते हैं?

A. नहीं, वर्तमान परसेंटाइल आधारित नॉर्मलाइजेशन प्रणाली में किसी भी अभ्यर्थी के वास्तविक रॉ मार्क्स को कभी घटाया नहीं जाता है। आपका रॉ स्कोर वही रहता है जो आपने रिस्पॉन्स शीट में देखा था; परसेंटाइल केवल यह बताता है कि उस शिफ्ट के कितने प्रतिशत परीक्षार्थी आपके पीछे हैं।

Q. क्या ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग की कट-ऑफ हमेशा ओबीसी से कम रहती है?

A. शुरुआती वर्षों में ईडब्ल्यूएस की कट-ऑफ ओबीसी से काफी कम देखी गई थी, लेकिन वर्ष 2026 में अधिकांश पात्र सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवा लेने के कारण अब ईडब्ल्यूएस और ओबीसी की कट-ऑफ लगभग समान (केवल 1 से 2 अंकों का अंतर) रहने लगी है।

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