documents ⏱️ 8 मिनट 📅 7 अक्टूबर 2026

धारा 143 लैंड कन्वर्जन (धारा 80): खेती की ज़मीन को आवासीय या दुकान में बदलने के नियम, SDM आवेदन व सर्किल रेट फीस

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रविंद्र सिंह चौहान
वरिष्ठ राजस्व व दस्तावेज़ सलाहकार

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, भू-अभिलेख, खतौनी 143 घोषणा व गैर-कृषि भूमि रूपांतरण पर 14 वर्षों का कानूनी अनुभव।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

राजस्व संहिता की धारा 143 (वर्तमान में धारा 80) के तहत कृषि भूमि पर मकान, दुकान या फैक्ट्री बनाने से पहले उपजिलाधिकारी (SDM) न्यायालय से भूमि उपयोग परिवर्तन की विधिवत अनुमति लेनी होती है। गैर-कृषि घोषित होने के बाद ज़मीन पर सीलिंग कानून नहीं लगता और बैंक से आसानी से निर्माण लोन मिल जाता है।

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📌 मुख्य विशेषताएं व आवश्यक बिंदु

  • खेती की ज़मीन पर बिना 143 (धारा 80) कराए मकान या दुकान बनाना राजस्व कानून के तहत गैर-कानूनी है।
  • एसडीएम कोर्ट से 143 का आदेश मिलने के बाद ज़मीन कृषि श्रेणी से हटकर "गैर-कृषि (Non-Agricultural)" दर्ज हो जाती है।
  • 143 होने के बाद ज़मीन पर किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक से होम लोन या कमर्शियल प्रोजेक्ट लोन आसानी से मंजूर होता है।
  • उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत पुरानी धारा 143 को अब **धारा 80** के नाम से जाना जाता है।
  • तहसीलदार और लेखपाल की मौका मुआयना रिपोर्ट के बाद सर्किल रेट का 1% से 2% सरकारी शुल्क जमा कर आदेश जारी होता है।
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किसके लिए काम की है यह गाइड: उन सभी नागरिकों, किसानों, प्लॉट खरीदारों और बिल्डर्स के लिए जो कृषि भूमि पर मकान, दुकान, मैरिज हॉल, स्कूल या फैक्ट्री बनाना चाहते हैं या प्लॉटिंग कर रहे हैं।

काम की बात (Quick Summary):

  • खतौनी में जो जमीन "कृषि भूमि" दर्ज है, उस पर कानूनी रूप से केवल खेती ही की जा सकती है।
  • यदि आप उस पर पक्का मकान, गोदाम या दुकान बनाना चाहते हैं, तो उपजिलाधिकारी (SDM) से भूमि उपयोग परिवर्तन कराना अनिवार्य है।
  • उत्तर प्रदेश में पुराने जमींदारी विनाश अधिनियम की धारा 143 को अब नए राजस्व संहिता (Revenue Code) में धारा 80 कहा जाता है।

आधिकारिक पोर्टल व राजस्व परिषद:

उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद: bor.up.nic.in | भूलेख खतौनी पोर्टल: upbhulekh.gov.in

धारा 143 (धारा 80) लैंड कन्वर्जन क्या होता है और इसे कराना क्यों जरूरी है?

जब कोई व्यक्ति किसी कृषि भूमि (खेती की ज़मीन) को खेती के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य (जैसे आवासीय मकान, दुकान, होटल, स्कूल, पेट्रोल पंप या फैक्ट्री) के लिए उपयोग में लाता है, तो राजस्व कानून के अनुसार उसे उस भूमि का कानूनी स्वरूप बदलना पड़ता है। इसी प्रक्रिया को बोलचाल में **धारा 143 की घोषणा** या **लैंड कन्वर्जन (Land Conversion)** कहा जाता है।

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 (UP Revenue Code 2006) लागू होने के बाद पुरानी धारा 143 को अब **धारा 80** में समाहित कर दिया गया है। जब एसडीएम न्यायालय धारा 80/143 का आदेश पारित कर देता है, तो उस जमीन पर कृषि जोत से जुड़े नियम (जैसे सीलिंग कानून, धारा 168A का चकबंदी बंटवारा, और विरासत के कृषि नियम) लागू होना बंद हो जाते हैं और वह संपत्ति सामान्य अचल संपत्ति (आवासीय/व्यावसायिक) बन जाती है।

कृषि से गैर-कृषि भूमि परिवर्तन के नियम व सर्किल रेट फीस

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भूमि का उपयोग किस कार्य के लिए बदला जा रहा है, उसके आधार पर सरकारी शुल्क और नियम निर्धारित होते हैं:

मापदंड / श्रेणी सरकारी नियम आवश्यक दस्तावेज़ / पात्रता शुल्क / समय-सीमा काम की टिप
आवासीय उपयोग (Residential) व्यक्तिगत मकान, विला या आवासीय कॉलोनी निर्माण हेतु नवीनतम खतौनी नकल, खसरा, आधार, नक्शा नजरी कृषि सर्किल रेट का 1% सरकारी शुल्क / 45-60 दिन आवासीय 143 होने के बाद ही बैंक से 8.5% पर सस्ता होम लोन स्वीकृत होता है।
व्यावसायिक उपयोग (Commercial) दुकान, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मैरिज होम, होटल निर्माण हेतु खतौनी, प्रस्तावित प्रोजेक्ट रिपोर्ट, चौहद्दी प्रमाण कृषि सर्किल रेट का 2% सरकारी शुल्क / 60 दिन व्यावसायिक निर्माण से पहले विकास प्राधिकरण (Development Authority) का लेआउट भी जरूरी।
औद्योगिक उपयोग (Industrial) फैक्ट्री, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज या मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खतौनी, उद्योग आधार, प्रदूषण नियंत्रण अनापत्ति (NOC) सर्किल रेट का 1% से 1.5% / 45 दिन औद्योगिक क्लस्टर या मास्टर प्लान में लैंड-यूज की पुष्टि पहले कर लें।
संस्थागत उपयोग (Institutional) स्कूल, कॉलेज, धर्मार्थ अस्पताल या ट्रस्ट भवन ट्रस्ट/सोसाइटी रजिस्ट्रेशन डीड, खतौनी, नक्शा सर्किल रेट का 1% / 45-60 दिन ट्रस्ट के उद्देश्यों में संबंधित कार्य का उल्लेख होना आवश्यक है।
धारा 80 पुनः कृषि में वापसी यदि गैर-कृषि उपयोग बंद हो गया हो और पुनः खेती करनी हो एसडीएम कोर्ट का पुराना आदेश, खतौनी, नया आवेदन नाममात्र कोर्ट फीस / 30 दिन पुनः कृषि भूमि दर्ज होने पर कृषि ऋण व केसीसी (KCC) का लाभ मिलने लगता है।

SDM न्यायालय में 143 घोषणा पत्र आवेदन का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

ज़मीन का 143 करवाने की कानूनी प्रक्रिया निम्न 5 चरणों में पूरी होती है:

  1. दस्तावेज़ तैयार करें: अपनी संबंधित भूमि की हालिया प्रमाणित खतौनी, खसरा, ज़मीन का प्रमाणित भू-नक्शा और प्रस्तावित स्थल का नज़री नक्शा (Site Plan) तैयार करें।
  2. एसडीएम न्यायालय में वाद दायर करें: संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) न्यायालय में राजस्व संहिता की धारा 80 के अंतर्गत घोषणा हेतु प्रार्थना पत्र (वाद पत्र) दाखिल करें। इसमें भूमि का गाटा संख्या, रकबा और उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट लिखें।
  3. तहसीलदार व लेखपाल की जांच रिपोर्ट: एसडीएम वाद दर्ज करने के बाद संबंधित तहसीलदार को स्थलीय जांच का आदेश देते हैं। हल्का लेखपाल और राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) मौके पर जाकर देखते हैं कि क्या वास्तव में ज़मीन पर खेती बंद हो चुकी है या निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। लेखपाल अपनी आख्या न्यायालय में प्रस्तुत करता है।
  4. सरकारी शुल्क (Court Fee / Challan) जमा करना: यदि आख्या सकारात्मक होती है और ज़मीन पर कोई कानूनी विवाद या सरकारी सीलिंग नहीं होती, तो न्यायालय संबंधित सर्किल रेट के आधार पर निर्धारित शुल्क का चालान बैंक/कोषागार में जमा करने का आदेश देता है।
  5. अंतिम न्यायिक आदेश (Order): चालान जमा होने के बाद एसडीएम औपचारिक रूप से आदेश पारित करते हैं कि संबंधित गाटे का अमुक रकबा गैर-कृषि घोषित किया जाता है। इस आदेश की एक प्रति आवेदक को दी जाती है।

बिना 143 कराए प्लॉट खरीदने या मकान बनाने के 4 बड़े कानूनी खतरे

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यदि कोई व्यक्ति बिना 143 कराए खेती की जमीन पर प्लॉट काटकर बेचता है या मकान बना लेता है, तो उसे इन भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है:

  • बैंक से लोन नहीं मिलेगा: कोई भी सरकारी या प्राइवेट बैंक कृषि भूमि पर मकान निर्माण के लिए होम लोन नहीं देता। बैंक सबसे पहले खतौनी में 143/80 का आदेश मांगता है।
  • तहसील प्रशासन द्वारा सीलिंग या जब्ती का खतरा: राजस्व संहिता के अनुसार यदि कृषि भूमि का गैर-कानूनी व्यावसायिक उपयोग पाया जाता है, तो प्रशासन भारी जुर्माना लगा सकता है।
  • विरासत का विवाद: कृषि भूमि में उत्तराधिकार के नियम अलग होते हैं (जिसमें बेटियों को पहले सीमित अधिकार थे), जबकि गैर-कृषि भूमि पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के सामान्य नियम लागू होते हैं। 143 न होने पर पारिवारिक विवाद में मकान फंस सकता है।
  • रेजिडेंशियल नक्शा पास न होना: नगर निगम या विकास प्राधिकरण तब तक किसी भवन का नक्शा पास नहीं करता जब तक ज़मीन का गैर-कृषि लैंड-यूज राजस्व अभिलेखों में दर्ज न हो।

143 आदेश की प्रति खतौनी में कैसे दर्ज कराएं?

केवल एसडीएम का आदेश हाथ में होना काफी नहीं है, उस आदेश का राजस्व खतौनी में अमलदार (Parwana Amal-Daramad) होना सबसे महत्वपूर्ण है:

  1. एसडीएम कोर्ट से आदेश की प्रमाणित नकल और परवाना अमलदार प्राप्त करें।
  2. तहसील के राजस्व अभिलेखागार (Record Room) और रजिस्ट्रार कानूनगो के पास इस आदेश को दर्ज कराएं।
  3. इसके बाद जब आप upbhulekh.gov.in पर अपनी नई खतौनी निकालेंगे, तो खतौनी के श्रेणी कालम में वह भूमि "अकृषिक (Non-Agricultural)" के रूप में दर्ज दिखेगी। यह आपकी संपत्ति का पक्का कानूनी प्रमाण है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. धारा 143 का आदेश आने में कितना समय लगता है?

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अनुसार यदि ज़मीन पर कोई कानूनी विवाद या सह-खातेदारों का झगड़ा नहीं है, तो आवेदन की तारीख से 45 दिनों के भीतर एसडीएम को निस्तारण करना होता है। व्यावहारिक रूप से लेखपाल जांच और चालान प्रक्रिया में 60 दिन तक का समय लग जाता है।

Q2. क्या यदि पूरे खेत में से केवल एक हिस्से (जैसे 200 वर्ग गज) पर मकान बनाना हो, तो भी 143 हो सकता है?

जी हाँ, बिल्कुल। इसे आंशिक 143 (Partial Conversion) कहा जाता है। एसडीएम न्यायालय पूरे गाटे में से जितने रकबे पर मकान बन रहा है, केवल उतने हिस्से को गैर-कृषि घोषित कर देता है और बाकी जमीन कृषि भूमि के रूप में खतौनी में दर्ज रहती है।

Q3. क्या 143 होने के बाद ज़मीन पर नगर पालिका टैक्स या हाउस टैक्स लगने लगता है?

यदि ज़मीन नगर निगम या नगर पालिका की सीमा में आती है, तो गैर-कृषि घोषित होते ही और निर्माण शुरू होते ही उस पर स्थानीय निकाय के गृहकर (House Tax) नियम लागू हो जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत का कोई बड़ा टैक्स नहीं होता।

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