काम की बात (Quick Summary):
- अब दिव्यांग यात्रियों को रियायती टिकट के लिए रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर धक्का-मुक्की खाने की जरूरत नहीं है।
- अपने नजदीकी DRM Office (Commercial Branch) से एक बार Divyangjan Photo Identity Card बनवा लें।
- इस कार्ड नंबर की मदद से आप अपने घर बैठे IRCTC ऐप से सीधे रियायती ई-टिकट बुक कर सकते हैं।
आधिकारिक पोर्टल व संपर्क सूत्र:
रेलवे बुकिंग पोर्टल: irctc.co.in | यूडीआईडी पोर्टल: swavlambancard.gov.in
रेलवे में दिव्यांग रियायत के नियम और छूट का प्रतिशत
भारतीय रेलवे दिव्यांग यात्रियों को यात्रा में आर्थिक और शारीरिक सुगमता प्रदान करने के लिए किराए में भारी छूट प्रदान करता है। यह रियायत रेलवे के नियमों के तहत चार मुख्य श्रेणियों में आने वाले दिव्यांगजनों को दी जाती है:
- अस्थि दिव्यांग (Orthopaedically Handicapped / Paraplegic): जो बिना किसी की सहायता के स्वयं यात्रा करने में असमर्थ हों।
- पूर्ण दृष्टिहीन (Totally Blind): जो दोनों आंखों से देखने में पूर्णतः असमर्थ हों।
- मानसिक दिव्यांग (Mentally Retarded): जिन्हें किसी सहायक के बिना यात्रा करने की अनुमति नहीं होती।
- मूक और बधिर (Completely Deaf & Dumb): जो बोलने और सुनने दोनों में पूर्णतः अक्षम हों (दोनों अक्षमताएं एक साथ होना जरूरी)।
दिव्यांगता श्रेणी, ट्रेन क्लास और सहायक की छूट का विवरण
नीचे दी गई तालिका में विभिन्न श्रेणियों के अनुसार रेलवे और बस रियायत के नियमों की स्पष्ट जानकारी दी गई है:
| मापदंड / श्रेणी | सरकारी नियम | आवश्यक दस्तावेज़ / पात्रता | शुल्क / समय-सीमा | काम की टिप |
|---|---|---|---|---|
| ऑर्थोपेडिक / पैराप्लेजिक | Sleeper, 3AC, 2AC में 75% छूट, 1AC में 50% छूट | सरकारी अस्पताल का निर्धारित फॉर्मेट में सर्टिफिकेट + UDID कार्ड | निःशुल्क कार्ड / DRM से 10-15 दिन में जारी | साथ चलने वाले एक एस्कॉर्ट को भी समान 75% छूट मिलती है। |
| पूर्ण दृष्टिहीन (Blind) | Sleeper, 3AC, 2AC में 75% छूट, राजधानी 3AC में 50% | नेत्र रोग विशेषज्ञ/सीएमओ द्वारा जारी 100% दृष्टिहीनता प्रमाण पत्र | निःशुल्क / जीवनकाल या 5 वर्ष हेतु मान्य | अकेले यात्रा करने पर या एस्कॉर्ट के साथ, दोनों स्थितियों में रियायत लागू। |
| मानसिक दिव्यांग (Mentally Retarded) | Sleeper व 3AC में 75% छूट, राजधानी चेयर कार में 25% | सिविल सर्जन/सीएमओ का प्रमाण पत्र, अभिभावक का घोषणा पत्र | निःशुल्क / डॉक्टर द्वारा अनुशंसित अवधि तक | मानसिक दिव्यांग यात्री के साथ एक वयस्क सहायक अनिवार्य है। |
| मूक व बधिर (Deaf & Dumb) | Sleeper और सेकंड क्लास में 50% की रियायत | दोनों अक्षमताएं प्रमाणित करने वाला मेडिकल बोर्ड सर्टिफिकेट | निःशुल्क कार्ड / सामान्य ट्रेनों में लागू | यदि केवल मूक या केवल बधिर हैं तो यह रियायत नहीं मिलती। |
| राज्य रोडवेज बस रियायत | राज्य सीमा के भीतर 50% से 100% तक मुफ्त सफर | UDID कार्ड या जिला समाज कल्याण अधिकारी का पास | रोडवेज डिपो से पास / 7 दिन में तैयार | उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा आदि में परिचालक को UDID दिखाने पर सीधी छूट। |
यूनिक दिव्यांग रेलवे फोटो आईडी कार्ड (DRM कार्ड) कैसे बनवाएं?
ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए रेलवे फोटो आईडी कार्ड बनवाना अनिवार्य है। इसे बनवाने की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में होती है:
- फॉर्मेट डाउनलोड और मेडिकल सर्टिफिकेट: भारतीय रेलवे के आधिकारिक कंसेशन फॉर्मेट (Annexure 'A' / 'B') का प्रिंट निकालें। अपने जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) या सरकारी अस्पताल के अधिकृत मेडिकल बोर्ड से इस पर हस्ताक्षर और मुहर लगवाएं।
- आवेदन पत्र भरें: अपने नजदीकी रेलवे मंडल (DRM Office) के Senior Divisional Commercial Manager (Sr. DCM) के नाम आवेदन पत्र लिखें।
- जरूरी कागजात संलग्न करें:
- रेलवे डॉक्टर/सीएमओ का मूल कंसेशन सर्टिफिकेट और उसकी सत्यापित प्रतियां।
- UDID कार्ड की फोटोकॉपी और आधार कार्ड।
- जन्म प्रमाण पत्र / आयु प्रमाण।
- दिव्यांगता दर्शाती हुई पासपोर्ट साइज की 4 रंगीन फोटो।
- डीआरएम कार्यालय में जमा करें: सभी कागजात अपने नजदीकी DRM कार्यालय के कमर्शियल सेल में जमा करें। वहां से आपको एक रसीद दी जाएगी।
- सत्यापन और कार्ड प्राप्ति: रेलवे अधिकारी अस्पताल से आपके मेडिकल सर्टिफिकेट का सत्यापन करवाते हैं। सत्यापन पूरा होने पर आपको एक लैमिनेटेड Divyangjan Photo Identity Card मिल जाता है, जिस पर 10 अंकों का यूनिक कार्ड नंबर लिखा होता है।
IRCTC पोर्टल पर दिव्यांग कोटे से ऑनलाइन टिकट बुक करने का तरीका
एक बार जब आपको रेलवे फोटो पहचान पत्र मिल जाता है, तो IRCTC से टिकट बुक करने के आसान स्टेप्स देखें:
- IRCTC की वेबसाइट या IRCTC Rail Connect ऐप खोलें और लॉगिन करें।
- अपनी यात्रा का स्टेशन और तारीख चुनें। कोटा वाले ड्रॉपडाउन मेनू में "PERSON WITH DISABILITY" (दिव्यांग कोटा) सेलेक्ट करें।
- यात्री विवरण (Passenger Details) भरते समय अपना नाम, आयु और जेंडर डालें। नीचे "Divyang Passenger Card Details" का विकल्प आएगा।
- वहां अपना Card Number, Card Validity Date और Date of Birth दर्ज करें। यदि सहायक साथ जा रहा है, तो "Escort" वाले बॉक्स को टिक करें।
- सर्च करने पर ट्रेन में दिव्यांग कोटे की सीटें (लोअर बर्थ) दिखाई देंगी। भुगतान करें और रियायती ई-टिकट प्राप्त करें। यात्रा के दौरान मूल कार्ड साथ रखना अनिवार्य है।
राज्य रोडवेज बसों में मुफ्त या रियायती बस पास कैसे बनता है?
अधिकांश राज्य सरकारें (जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, दिल्ली) अपने राज्य परिवहन निगम की साधारण व एक्सप्रेस बसों में 40% या उससे अधिक दिव्यांगता वाले नागरिकों को मुफ्त यात्रा की सुविधा देती हैं:
- UDID कार्ड का उपयोग: अब अधिकांश राज्यों में अलग से बस पास बनवाने की जरूरत नहीं होती। बस में कंडक्टर को अपना मूल UDID स्वावलंबन कार्ड दिखाने पर वह शून्य रुपये (Zero Fare) का टिकट काट देता है।
- जिला रोडवेज डिपो से पास: यदि किसी राज्य में अलग पास मांगा जाता है, तो अपने जिले के केंद्रीय बस स्टैंड (ISBT) के पूछताछ काउंटर पर 2 फोटो, आधार कार्ड और UDID कार्ड की कॉपी जमा करके तुरंत मासिक या वार्षिक दिव्यांग बस पास प्राप्त किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या 40% से कम दिव्यांगता होने पर रेलवे या बस में रियायत मिलती है?
नहीं। भारत सरकार और रेलवे नियमों के अनुसार रियायत पाने के लिए दिव्यांगता का प्रतिशत कम से कम 40% (Benchmark Disability) होना अनिवार्य है। इससे कम दिव्यांगता होने पर सरकारी रियायत का लाभ नहीं दिया जाता।
Q2. क्या राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस में भी दिव्यांग रियायत मिलती है?
जी हाँ, राजधानी और शताब्दी ट्रेनों में 3AC और AC चेयर कार में दिव्यांग यात्रियों और उनके सहायक को 50% तक की किराए में रियायत मिलती है। हालांकि 1AC और एक्जीक्यूटिव क्लास में रियायत का प्रतिशत कम या शून्य होता है।
Q3. क्या यात्रा के दौरान मूल रेलवे पहचान पत्र साथ रखना जरूरी है?
जी हाँ, बिल्कुल अनिवार्य है। ट्रेन में टीटीई (TTE) द्वारा टिकट जांच के समय यात्री को अपना मूल रेलवे फोटो पहचान पत्र दिखाना होता है। मूल कार्ड न होने पर बिना टिकट (Without Ticket) माना जा सकता है और जुर्माना लगाया जा सकता है।