documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Surviving Member / Survivor Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं: ई-डिस्ट्रिक्ट, बैंक व पेंशन दावा पूरी गाइड

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

सर्वाइवर प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपने राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल (जैसे दिल्ली में <strong>edistrict.delhigovt.nic.in</strong>) पर नागरिक लॉगिन करें। 'Revenue Services' मेनू में <strong>'Issuance of Surviving Member Certificate'</strong> पर क्लिक करें। मृतक का विवरण—नाम, मृत्यु की तिथि, मृत्यु का स्थान और मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या दर्ज करें। इसके बाद परिवार के सभी जीवित सदस्यों (पत्नी, पुत्र, पुत्रियों, माता) के नाम, संबंध, आयु और आधार नंबर दर्ज करें। मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी जीवित सदस्यों के पहचान व निवास प्रमाण (आधार कार्ड), और ₹10 के ई-स्टाम्प पर नोटरीकृत संयुक्त शपथ पत्र अपलोड करें। आवेदन सबमिट होने के बाद पटवारी/लेखपाल घर आकर जीवित सदस्यों का भौतिक सत्यापन करता है। रिपोर्ट स्वीकृत होते ही एसडीएम के डिजिटल हस्ताक्षर युक्त 'Surviving Member Certificate' ऑनलाइन डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाता है।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
दस्तावेज़ का नामउत्तरजीवी सदस्य प्रमाण पत्र (Surviving Member / Survivor Certificate)
जारीकर्ता विभागराजस्व विभाग (Department of Revenue), जिला प्रशासन
सक्षम प्राधिकारीउपजिलाधिकारी (SDM) / तहसीलदार
आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टलedistrict.delhigovt.nic.in एवं संबंधित राज्य ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल
सरकारी शुल्क₹0 से ₹20 (पोर्टल यूजर चार्ज)
समय सीमा (RTS कानून)आवेदन के बाद पुलिस/राजस्व स्थलीय जांच सहित 14 से 21 कार्य दिवस
प्राथमिक अनिवार्य दस्तावेजमृतक का आधिकारिक डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
शामिल सदस्यमृतक की विधवा पत्नी/पति, सभी पुत्र, अविवाहित/विवाहित पुत्रियां और जीवित माता
मुख्य उपयोगबैंक क्लेम, पेंशन ट्रांसफर, म्यूचुअल फंड/शेयर ट्रांसमिशन, अनुकंपा नियुक्ति

📑 विषय सूची (Table of Contents)

राजस्व विभाग एवं दिल्ली/राज्य सरकार ई-गवर्नेंस दिशा-निर्देश: जब किसी परिवार के मुखिया या कमाने वाले सदस्य का आकस्मिक निधन हो जाता है, तो बैंक खातों में जमा राशि प्राप्त करने, सावधि जमा (FD), जीवन बीमा (LIC/Insurance) पॉलिसियों के क्लेम, और सरकारी पारिवारिक पेंशन (Family Pension) चालू कराने के लिए सबसे त्वरित और आधिकारिक दस्तावेज 'उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Surviving Member Certificate / Survivor Certificate)' होता है। दिल्ली (Revenue Department GNCTD) और कई अन्य प्रगतिशील राज्यों में पारंपरिक 'विधिक वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)' के स्थान पर डिजिटल सर्वाइवर प्रमाण पत्र ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से उपजिलाधिकारी (SDM) / तहसीलदार द्वारा जारी किया जाता है। यह प्रमाण पत्र आधिकारिक रूप से यह प्रमाणित करता है कि मृतक के पीछे परिवार में कुल कितने जीवित सदस्य (Surviving Family Members) शेष हैं।

1. उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Survivor Certificate) क्या है और इसकी महत्ता {#1-क्या-है-सर्वाइवर-सर्टिफिकेट}

उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Surviving Member / Survivor Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं: ई-डिस्ट्रिक्ट, बैंक व पेंशन दावा पूरी गाइड
चित्र: उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Surviving Member / Survivor Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं: ई-डिस्ट्रिक्ट, बैंक व पेंशन दावा पूरी गाइड बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।
  • मृत्यु के बाद की कानूनी आवश्यकता: जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तो वित्तीय संस्थान और सरकारी विभाग यह जानने की मांग करते हैं कि मृतक का कोई अन्य अज्ञात वारिस तो नहीं है जो बाद में आकर दावेदारी करे।
  • प्रशासनिक पुष्टि: सर्वाइवर प्रमाण पत्र राजस्व अधिकारियों द्वारा स्थलीय जांच के बाद जारी किया गया वह आधिकारिक घोषणा पत्र है जो सभी जीवित कानूनी उत्तराधिकारियों की सूची को एक जगह सील-मुहर के साथ संकलित करता है।
  • विवाद रहित निपटारा: यदि बैंक खाते में नॉमिनी नहीं था, तो सभी जीवित सदस्य इस प्रमाण पत्र के आधार पर किसी एक सदस्य को अनापत्ति (NOC) देकर बैंक से सारा पैसा आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

2. सर्वाइवर प्रमाण पत्र, लीगल हायर और सक्सेशन सर्टिफिकेट में अंतर {#2-तीनों-में-अंतर}

नागरिकों को इन तीनों दस्तावेजों के उपयोग क्षेत्र को समझना आवश्यक है:

प्रमाण पत्रजारीकर्ता प्राधिकारीमुख्य उद्देश्यसमय व लागत
सर्वाइवर प्रमाण पत्र (Surviving Member Certificate)एसडीएम / तहसीलदार (राजस्व विभाग)जीवित पारिवारिक सदस्यों की सूची (बैंक क्लेम, पेंशन, बीमा हेतु)15 से 21 दिन, ₹0-₹20 शुल्क
विधिक वारिस प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)तहसीलदार कोर्ट / ई-डिस्ट्रिक्टराजस्व जमीन, वरासत, अनुकंपा नौकरी और सरकारी लाभ हेतु15 से 30 दिन, ₹50 शुल्क
उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate)दीवानी न्यायालय (Civil Court / District Judge)करोड़ों रुपये के शेयर, बड़े बैंक विवाद, जहां वसीयत पर झगड़ा हो6 से 8 माह, 2-3% कोर्ट फीस
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3. परिवार के किन-किन सदस्यों का नाम दर्ज कराना अनिवार्य है? {#3-अनिवार्य-सदस्य}

हिंदू उत्तराधिकार कानून और भारतीय उत्तराधिकार नियमों के अनुसार प्रथम श्रेणी के सभी जीवित सदस्यों का नाम दर्ज होना अनिवार्य है:

  1. जीवित जीवनसाथी (Surviving Spouse): मृतक की पत्नी अथवा पति।
  2. सभी जैविक व दत्तक संतानें (All Children):
  • सभी पुत्र (विवाहित या अविवाहित)।
  • सभी पुत्रियां (अविवाहित, विवाहित अथवा विधवा बेटियां)।
  1. मृतक की माता (Mother of the Deceased): यदि मां जीवित हैं, तो उनका नाम अनिवार्य रूप से शामिल होता है (पिता प्रथम श्रेणी वारिस नहीं होते, अतः पिता का नाम सामान्यतः शामिल नहीं होता)।
  2. चेतावनी: यदि किसी जीवित बेटी या बेटे का नाम जानबूझकर छिपाया जाता है, तो प्रमाण पत्र धोखाधड़ी का शिकार मानकर रद्द कर दिया जाता है और आवेदक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है।

4. अनिवार्य दस्तावेज और शपथ पत्र चेकलिस्ट {#4-आवश्यक-दस्तावेज}

आवेदन के समय अपलोड करने हेतु आवश्यक स्कैन दस्तावेज:

  1. मृतक का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र (Original Death Certificate)।
  2. मृतक का पहचान व अंतिम निवास प्रमाण: आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट।
  3. सभी जीवित सदस्यों के पहचान व पते के प्रमाण: प्रत्येक सदस्य का आधार कार्ड।
  4. पारिवारिक संबंध का साक्ष्य (Relationship Proof):
  • राशन कार्ड (जिसमें सभी सदस्यों के नाम दर्ज हों)।
  • अथवा बच्चों के 10वीं के प्रमाण पत्र (जिसमें माता-पिता का नाम हो)।
  1. ₹10 के ई-स्टाम्प पर नोटरीकृत शपथ पत्र (Affidavit):
  • इसमें परिवार के सभी जीवित सदस्यों के नाम, उम्र और संबंध लिखे होने चाहिए।
  • यह घोषणा होनी चाहिए कि इनके अलावा मृतक का कोई अन्य वैध या नाजायज जीवित वारिस नहीं है।
  1. सभी जीवित सदस्यों की व्यक्तिगत व संयुक्त फोटो।

5. e-District पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया {#5-ऑनलाइन-आवेदन-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[edistrict.delhigovt.nic.in पर नागरिक लॉगिन] --> B[Apply for Surviving Member Certificate का चयन]

B --> C[मृतक का नाम, मृत्यु तिथि व मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या दर्ज करना]

C --> D[सभी जीवित पारिवारिक सदस्यों पत्नी/बच्चों/माता के नाम व आधार भरना]

D --> E[मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड व नोटरी हलफनामा अपलोड करना]

E --> F[सबमिशन पावती पर्ची Application Acknowledgment प्राप्त होना]

F --> G[क्षेत्रीय पटवारी / लेखपाल द्वारा घर आकर स्थलीय पड़ताल]

G --> H[तहसीलदार / SDM द्वारा डिजिटल हस्ताक्षरित Surviving Certificate जारी]

```

  1. पोर्टल खोलें: edistrict.delhigovt.nic.in पर जाएं और सिटीजन लॉगिन करें।
  2. सेवा का चयन: 'Services' मेनू में 'Revenue Department' ➔ 'Issuance of Surviving Member Certificate' पर क्लिक करें।
  3. मृतक का विवरण भरें:
  • मृतक का नाम और मृत्यु की सटीक तारीख।
  • मृत्यु का स्थान (घर अथवा अस्पताल का नाम)।
  • जन्म-मृत्यु पंजीयक द्वारा जारी Death Certificate Registration Number।
  1. जीवित सदस्यों का इंद्राज: 'Add Member' पर क्लिक कर एक-एक करके पत्नी, पुत्र, पुत्रियों और मां के नाम, उम्र और संबंध दर्ज करें।
  2. दस्तावेज अपलोड करें: निर्धारित साइज (PDF/JPG, अधिकतम 100KB) में मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी के आधार कार्ड और नोटरी हलफनामा अपलोड करें।
  3. फाइनल सबमिट: ओटीपी सत्यापित कर फॉर्म सबमिट करें। स्क्रीन पर 14 अंकों का Application Tracking Number प्रदर्शित होगा।

6. राजस्व विभाग द्वारा स्थलीय भौतिक जांच (Field Inquiry Flow) {#6-स्थलीय-जांच}

आवेदन सबमिट होने के बाद एसडीएम कार्यालय पत्रावली को क्षेत्रीय तहसीलदार और पटवारी/लेखपाल को भेजता है:

  • पटवारी आवेदक के घर आता है या आवेदक को संबंधित तहसील बुलाता है।
  • पटवारी सभी मूल दस्तावेजों (मृत्यु प्रमाण पत्र और सभी सदस्यों के आधार कार्ड) का भौतिक मिलान करता है।
  • मोहल्ले के 2 पड़ोसियों के बयान लिए जाते हैं कि क्या परिवार में वास्तव में केवल यही सदस्य हैं।
  • पटवारी अपनी अनुकूल रिपोर्ट (Inquiry Report) तहसीलदार को भेजता है, और तहसीलदार के अनुमोदन के बाद एसडीएम डिजिटल हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं।
  • पोर्टल के 'Download Certificate' विकल्प में जाकर इसे तुरंत प्रिंट किया जा सकता है।

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  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), राजस्व विभाग का आधिकारिक डिजिटल प्रमाण पत्र, परिवार का पारिवारिक ट्री (Family Tree) चार्ट, और बैंक क्लेम ट्रांसफर का आधिकारिक दृश्य।

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```

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या विवाहित पुत्रियों (शादीशुदा बेटियों) का नाम भी सर्वाइवर प्रमाण पत्र में जुड़वाना जरूरी है?

A. हाँ, 100% अनिवार्य है। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 के अनुसार, विवाहित पुत्रियां भी पुत्रों के समान ही पिता की प्रथम श्रेणी की पूर्ण विधिक उत्तराधिकारी हैं। यदि किसी विवाहित बेटी का नाम आवेदन में छोड़ दिया जाता है, तो न केवल आवेदन खारिज हो जाएगा बल्कि बैंक भी उस प्रमाण पत्र को अधूरा मानकर आपत्ति लगा सकता है।

Q. यदि कोई वारिस विदेश में रहता हो, तो क्या उसका नाम दर्ज हो सकता है?

A. हाँ, विदेश में रह रहे सदस्य का नाम भी दर्ज होगा। उसके प्रमाण के रूप में उसके भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड की प्रति अपलोड की जाती है। यदि भौतिक सत्यापन के समय वह उपस्थित नहीं हो सकता, तो उसका अधिकृत ईमेल या नोटरी हलफनामा स्वीकार किया जाता है।

Q. सर्वाइवर प्रमाण पत्र की वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. उत्तरजीवी सदस्य प्रमाण पत्र की कोई समाप्ति तिथि (Expiry Date) नहीं होती; यह आजीवन (Lifetime) वैध रहता है। क्योंकि यह उस विशिष्ट समय पर मृतक के जीवित सदस्यों की स्थिति को प्रमाणित करता है जिस समय उसका निधन हुआ था।

Q. क्या उत्तरजीवी प्रमाण पत्र (Surviving Member / Survivor Certificate) कैसे बनवाएं को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।