documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

जमीन का दाखिल-खारिज (Property Mutation / नामांतरण) ऑनलाइन कैसे कराएं: 35 दिन का नियम, तहसीलदार कोर्ट व पूरी प्रक्रिया

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

वर्तमान में अधिकांश राज्यों में सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से बैनामा होते ही <strong>ऑटो-म्यूटेशन (Auto-Mutation)</strong> की प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। रजिस्ट्री का डेटा सीधे संबंधित तहसील के तहसीलदार कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक रूप से स्थानांतरित हो जाता है और वाद संख्या (Case Number) दर्ज हो जाती है। इसके बाद तहसीलदार न्यायालय द्वारा 35 दिनों का सार्वजनिक इश्तहार (Notice) जारी किया जाता है। यदि 35 दिनों के भीतर किसी भी व्यक्ति या सह-खातेदार द्वारा कोई कानूनी आपत्ति दर्ज नहीं कराई जाती है, और लेखपाल की स्थलीय आख्या विक्रेता के हक व कब्जे की पुष्टि करती है, तो तहसीलदार द्वारा दाखिल-खारिज आदेश पारित कर दिया जाता है। इस आदेश के आधार पर खतौनी में विक्रेता का नाम हटाकर खरीदार का नाम आधिकारिक रूप से दर्ज कर दिया जाता है।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
प्रक्रिया का नामनामांतरण / दाखिल-खारिज (Property Mutation / Dakhil Kharij)
संबद्ध वैधानिक कानूनराज्य राजस्व संहिता (जैसे उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 34 एवं 35)
सक्षम न्यायालयतहसीलदार / नायब तहसीलदार राजस्व न्यायालय (Revenue Court)
आवेदन माध्यमरजिस्ट्री के समय स्वतः (Auto-Mutation) अथवा राजस्व ई-डिस्ट्रिक्ट / भूलेख पोर्टल
सार्वजनिक आपत्ति नोटिस35 दिन (Statutory 35-Day Objection Period) की सार्वजनिक उद्घोषणा
सरकारी शुल्कसामान्य नामांतरण: ₹50 से ₹150 (शासकीय कोर्ट फीस)
निस्तारण समय सीमाअविवादित मामलों में 35 से 45 कार्य दिवस \विवादित मामलों में 90 दिन
अंतिम परिणामखतौनी / जमाबंदी में विक्रेता का नाम खारिज (हटाना) और क्रेता का नाम दाखिल (जोड़ना)

📑 विषय सूची (Table of Contents)

राजस्व परिषद एवं सर्वोच्च न्यायालय कानूनी व्यवस्था: किसी भी अचल संपत्ति (कृषि भूमि, भूखंड या मकान) का केवल सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में बैनामा (Sale Deed Registry) करा लेना ही स्वामित्व का पूर्ण प्रमाण नहीं होता। रजिस्ट्री केवल यह सिद्ध करती है कि आपने जमीन का सौदा किया है, लेकिन जब तक राजस्व अभिलेखों (खतौनी / जमाबंदी / 7/12) में पुराने मालिक का नाम काटकर नए खरीदार का नाम दर्ज नहीं होता, तब तक संपत्ति का कानूनी स्वामित्व अधूरा रहता है। इस प्रक्रिया को राजस्व कानून में दाखिल-खारिज (Dakhil Kharij / Mutation / नामांतरण) कहा जाता है। बिना दाखिल-खारिज के पुराना मालिक उसी जमीन को दोबारा किसी अन्य व्यक्ति को बेच सकता है या उस पर बैंक से केसीसी/लोन निकाल सकता है।

1. दाखिल-खारिज (Mutation) क्या है और यह रजिस्ट्री से क्यों अधिक महत्वपूर्ण है? {#1-क्या-है-दाखिल-खारिज}

जमीन का दाखिल-खारिज (Property Mutation / नामांतरण) ऑनलाइन कैसे कराएं: 35 दिन का नियम, तहसीलदार कोर्ट व पूरी प्रक्रिया
चित्र: जमीन का दाखिल-खारिज (Property Mutation / नामांतरण) ऑनलाइन कैसे कराएं: 35 दिन का नियम, तहसीलदार कोर्ट व पूरी प्रक्रिया बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।
  • दाखिल (Dakhil): राजस्व रिकॉर्ड (सरकारी खतौनी) में नए मालिक का नाम प्रवेश (Enter) कराना।
  • खारिज (Kharij): पूर्व मालिक (विक्रेता) का नाम सरकारी रिकॉर्ड से निरस्त (Delete) करना।
  • रजिस्ट्री बनाम दाखिल-खारिज:
  • बैनामा (Sale Deed) केवल क्रेता और विक्रेता के बीच एक निजी अनुबंध (Civil Contract) है।
  • दाखिल-खारिज राज्य सरकार के भू-अभिलेखों में उस संव्यवहार की आधिकारिक मान्यता (Fiscal Entry) है।
  • जब तक दाखिल-खारिज नहीं होता, सरकार की नजर में जमीन का मालिक पुराना व्यक्ति ही बना रहता है और सरकारी मुआवजा या किसान सम्मान निधि पुराने व्यक्ति को ही मिलती रहती है।

2. दाखिल-खारिज के 3 मुख्य प्रकार (बैनामा, वरासत व वसीयत) {#2-नामांतरण-के-प्रकार}

  1. बैनामा आधारित नामांतरण (Mutation by Sale Deed): जब जमीन खरीद-बिक्री के माध्यम से खरीदी जाती है (धारा 34 के तहत)।
  2. वरासत आधारित नामांतरण (Succession / Varasat Mutation): जब पंजीकृत खातेदार की मृत्यु हो जाती है और उसके स्वाभाविक कानूनी वारिसों (पुत्र, पुत्री, पत्नी) का नाम खतौनी में दर्ज कराया जाता है (धारा 33 के तहत - यह पूर्णतः निःशुल्क होती है)।
  3. वसीयत / दान आधारित नामांतरण (Mutation by Will or Gift Deed): जब कोई व्यक्ति रजिस्टर्ड वसीयत (Will) या दान पत्र (Gift Deed) के आधार पर जमीन पर दावा करता है।
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3. 35 दिनों का अनिवार्य सार्वजनिक नोटिस नियम (The 35-Day Rule) {#3-सार्वजनिक-नोटिस-नियम}

राजस्व संहिता के अनुसार किसी भी व्यक्ति की जमीन से उसका नाम बिना उसे सुने नहीं काटा जा सकता:

  • जैसे ही म्यूटेशन केस दर्ज होता है, तहसीलदार कोर्ट एक सार्वजनिक प्रपत्र (Form R-9 / Notice) जारी करता है।
  • यह नोटिस गांव के सार्वजनिक स्थल, पंचायत भवन और विक्रेता के पते पर भेजा जाता है।
  • 35 दिनों की वैधानिक अवधि: कानूनन 35 दिनों का समय दिया जाता है ताकि यदि विक्रेता को कोई आपत्ति हो (जैसे चेक बाउंस होना, पूरी कीमत न मिलना, या जाली बैनामा होना), तो वह कोर्ट में आकर अपनी आपत्ति (Objection) दाखिल कर सके।
  • यदि 35 दिन पूरे होने तक कोई आपत्ति नहीं आती, तो मामला 'अविवादित' मान लिया जाता है।

4. अनिवार्य दस्तावेज चेकलिस्ट {#4-आवश्यक-दस्तावेज}

आवेदन के समय निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  1. पंजीकृत बैनामा (Registered Sale Deed) की प्रमाणित प्रति।
  2. वर्तमान वर्ष की मूल प्रमाणित खतौनी (RoR Copy)।
  3. क्रेता व विक्रेता के आधार कार्ड व पैन कार्ड।
  4. शपथ पत्र (Affidavit): आवेदक का हलफनामा कि उसने निर्धारित सीलिंग सीमा (जैसे 12.5 एकड़) से अधिक भूमि नहीं खरीदी है और वह अनुसूचित जाति की भूमि को बिना डीएम की पूर्व अनुमति के नहीं खरीद रहा है।
  5. भू-नक्शा / चौहद्दी का विवरण: यदि गाटे का कोई विशिष्ट हिस्सा खरीदा गया है।

5. ऑनलाइन दाखिल-खारिज आवेदन की चरणबद्ध प्रक्रिया {#5-ऑनलाइन-आवेदन-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[उपनिबंधक कार्यालय में बैनामा रजिस्ट्री] --> B[राजस्व परिषद पोर्टल पर ऑटो-म्यूटेशन वाद संख्या दर्ज]

B --> C[तहसीलदार कोर्ट द्वारा 35 दिनों का सार्वजनिक नोटिस जारी]

C --> D[क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा स्थलीय भौतिक जांच व कब्जा रिपोर्ट]

D --> E[कोई आपत्ति न आने पर तहसीलदार द्वारा नामांतरण आदेश]

E --> F[भूलेख पोर्टल व खतौनी में अमलदरामद नया नाम दर्ज]

```

  1. पोर्टल पर जाएं: अपने राज्य के राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (जैसे UP में vaad.up.nic.in, बिहार में biharbhumi.bihar.gov.in, एमपी में rcms.mp.gov.in) पर जाएं।
  2. वाद की स्थिति जांचें: यदि आपकी रजिस्ट्री ऑटो-म्यूटेशन में दर्ज हो चुकी है, तो बैनामा संख्या या रजिस्ट्रेशन वर्ष डालकर अपना 'केस नंबर' खोजें।
  3. मैन्युअल आवेदन (यदि ऑटो-म्यूटेशन न हुआ हो): 'धारा 34 नामांतरण हेतु ऑनलाइन आवेदन' पर क्लिक करें।
  4. विवरण भरें: जिला, तहसील, परगना, गांव, गाटा संख्या, बैनामा की दिनांक, उपनिबंधक का नाम और बैनामा बुक नंबर दर्ज करें।
  5. दस्तावेज अपलोड करें: बैनामा की स्कैन पीडीएफ और खतौनी अपलोड करें तथा ₹50-100 का सरकारी चालान जमा करें।
  6. लेखपाल जांच: क्षेत्रीय लेखपाल अपनी रिपोर्ट लगाएगा कि जमीन पर वास्तव में खरीदार का कब्जा है या नहीं।
  7. अंतिम आदेश: नियत तारीख पर पेशी होकर तहसीलदार म्यूटेशन आदेश पारित कर देते हैं।

6. अविवादित बनाम विवादित नामांतरण (Uncontested vs Contested Mutation) {#6-विवादित-नामांतरण}

  • अविवादित नामांतरण (Uncontested): जब विक्रेता या सह-खातेदारों को कोई आपत्ति नहीं होती। यह प्रक्रिया सामान्यतः 35 से 45 दिनों में बिना किसी वकील के जिरह के स्वतः संपन्न हो जाती है।
  • विवादित नामांतरण (Contested Mutation): यदि 35 दिन के भीतर कोई आपत्ति (Objection) आ जाती है (जैसे परिवार का कोई सदस्य कहे कि जमीन संयुक्त थी और विक्रेता को पूरा बेचने का हक नहीं था):
  • तहसीलदार मामले को सामान्य पटल से हटाकर नियमित कोर्ट ट्रायल में भेज देता है।
  • दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा साक्ष्य, गवाही और बहस कराई जाती है।
  • विवादित मामलों में फैसला आने में 6 माह से 1 वर्ष तक का समय लग सकता है।

7. दाखिल-खारिज खारिज होने पर अपील (Appeal under Section 35(2)) {#7-अपील-प्रक्रिया}

यदि तहसीलदार द्वारा आपका दाखिल-खारिज आवेदन किसी तकनीकी कारण या विरोधी पक्ष के प्रभाव में गलत तरीके से निरस्त (Reject) कर दिया जाता है:

  • एसडीएम कोर्ट में अपील: राजस्व संहिता की धारा 35(2) के तहत आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर उपजिलाधिकारी (SDO / SDM Court) के समक्ष प्रथम अपील (First Appeal) दायर की जा सकती है।
  • एसडीएम दोनों पक्षों की पत्रावली तलब कर तहसीलदार के आदेश को रद्द कर म्यूटेशन का आदेश पारित कर सकते हैं।
  • एसडीएम के फैसले के विरुद्ध अगली अपील अपर आयुक्त (Additional Commissioner - Revenue) और अंतिम निगरानी राजस्व परिषद (Board of Revenue) में होती है।

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  • Meta Description: जमीन या मकान की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज (Dakhil Kharij / नामांतरण) कैसे कराएं? 35 दिन का सार्वजनिक नोटिस, तहसीलदार कोर्ट प्रक्रिया, फीस और खतौनी में नाम चढ़ाने के नियम।
  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), तहसीलदार राजस्व न्यायालय का दृश्य, बैनामा और खतौनी में नाम परिवर्तन का डिजिटल इन्फोग्राफिक प्रारूप।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या दाखिल-खारिज के बिना जमीन पर बैंक लोन मिल सकता है?

A. बिल्कुल नहीं। कोई भी राष्ट्रीयकृत या निजी बैंक केवल बैनामा देखकर कभी लोन नहीं देता। बैंक अनिवार्य रूप से उस खतौनी की मांग करता है जिसमें खरीदार का नाम आधिकारिक तौर पर दर्ज हो चुका हो। बिना दाखिल-खारिज के लोन आवेदन तुरंत खारिज कर दिया जाता है।

Q. रजिस्ट्री कराने के कितने दिन बाद तक दाखिल-खारिज करा सकते हैं?

A. कानूनन रजिस्ट्री होने के तुरंत बाद (30 से 90 दिन के भीतर) दाखिल-खारिज करा लेना चाहिए। यद्यपि पुराने मामलों में 5 या 10 साल बाद भी विलंब माफी प्रार्थना पत्र (Section 5 Limitation Act) देकर दाखिल-खारिज कराया जा सकता है, लेकिन इसमें जमीन के पुराने मालिक द्वारा धोखाधड़ी का अत्यधिक जोखिम रहता है।

Q. क्या शहरी क्षेत्रों में फ्लैट या मकान का भी दाखिल-खारिज होता है?

A. हाँ। शहरी क्षेत्रों में नगर निकाय (नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत) के गृहकर (House Tax) रजिस्टर में नामांतरण कराया जाता है। इसे 'म्युनिसिपल म्यूटेशन (Municipal Mutation)' कहते हैं। इसके बाद हाउस टैक्स का बिल नए खरीदार के नाम से आने लगता है।

Q. क्या जमीन का दाखिल-खारिज (Property Mutation / नामांतरण) कैसे कराएं को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।