documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

विवाह विच्छेद (तलाक की डिक्री) व विवाह शून्यता प्रमाण पत्र: हिंदू विवाह अधिनियम 1955, फैमिली कोर्ट व पुनर्विवाह पूरी गाइड

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

कानूनी रूप से तलाक लेने के लिए पति और पत्नी को अपने जिले के <strong>पारिवारिक न्यायालय (Family Court)</strong> में पारिवारिक अधिवक्ता के माध्यम से याचिका दाखिल करनी होती है। आपसी सहमति (Mutual Divorce - Section 13B) के मामले में दोनों पक्ष संयुक्त रूप से याचिका दायर करते हैं जिसमें भरण-पोषण (Alimony), बच्चों की कस्टडी (Child Custody) और स्त्रीधन की वापसी की शर्तें तय होती हैं। प्रथम प्रस्ताव (First Motion) पर बयान दर्ज होने के बाद अदालत 6 माह का कूलिंग-ऑफ पीरियड देती है। 6 माह बाद द्वितीय प्रस्ताव (Second Motion) पर अंतिम बयान होते हैं और जज औपचारिक 'तलाक की डिक्री (Divorce Decree)' का निर्णय सुनाते हैं। इस निर्णय की न्यायालय द्वारा जारी 'प्रमाणित प्रति (Certified Copy)' ही आधिकारिक तलाक प्रमाण पत्र होती है।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
दस्तावेज़ का नामविवाह विच्छेद की प्रमाणित न्यायिक डिक्री (Certified Copy of Divorce Decree)
संबद्ध वैधानिक कानूनहिंदू विवाह अधिनियम 1955 (धारा 13, 13B) / विशेष विवाह अधिनियम 1954 (धारा 28)
सक्षम न्यायालयप्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय (Principal Judge, Family Court) / जिला न्यायालय
प्रकार 1: आपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent)धारा 13B - दोनों पति-पत्नी की रजामंदी, न्यूनतम 6 माह अलग रहने के बाद, 2 गतियां (First & Second Motion)
प्रकार 2: विवादित तलाक (Contested Divorce)धारा 13(1) - क्रूरता (Cruelty), परित्याग (Desertion 2+ वर्ष), व्यभिचार (Adultery), मानसिक अस्वस्थता
प्रकार 3: विवाह शून्यता (Annulment)धारा 11 व 12 - नपुंसकता, धोखाधड़ी/जबरन विवाह, पूर्व पति/पत्नी का जीवित होना (विवाह कभी अस्तित्व में नहीं माना जाता)
निस्तारण समय सीमाआपसी सहमति: 6 से 18 महीने (सुप्रीम कोर्ट नियम अनुसार 6 माह की छूट संभव) \विवादित: 2 से 5 वर्ष
पुनर्विवाह की कानूनी मियादडिक्री पारित होने के 90 दिन (अपील अवधि) समाप्त होने के बाद ही दूसरा विवाह कानूनी रूप से वैध

📑 विषय सूची (Table of Contents)

भारतीय पारिवारिक कानून एवं सर्वोच्च न्यायालय न्यायिक व्यवस्था: भारत में विवाह को केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार माना गया है, इसलिए इसे समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया अत्यंत सख्त है। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 (HMA) के तहत किसी भी वैवाहिक संबंध को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए सक्षम पारिवारिक न्यायालय (Family Court / Principal Judge) द्वारा जारी 'विवाह विच्छेद की डिक्री (Divorce Decree)' अथवा विवाह को अमान्य घोषित करने वाली 'शून्यता की डिक्री (Decree of Nullity / Annulment)' ही एकमात्र कानूनी साक्ष्य है। किसी भी पंचायत, खाप, समाज के पंचों या ₹100 के स्टाम्प पेपर पर लिखा गया 'तलाकनामा' भारतीय कानून की नज़र में 100% गैरकानूनी और शून्य (Void) है। बिना अदालत की वैध तलाक डिक्री के दूसरा विवाह करना आईपीसी/बीएनएस के तहत बहुविवाह (Bigamy) का गंभीर गैर-जमानती अपराध है।

1. आपसी सहमति तलाक (Section 13B) बनाम विवादित तलाक (Section 13) {#1-तलाक-के-प्रकार}

विवाह विच्छेद (तलाक की डिक्री) व विवाह शून्यता प्रमाण पत्र: हिंदू विवाह अधिनियम 1955, फैमिली कोर्ट व पुनर्विवाह पूरी गाइड
चित्र: विवाह विच्छेद (तलाक की डिक्री) व विवाह शून्यता प्रमाण पत्र: हिंदू विवाह अधिनियम 1955, फैमिली कोर्ट व पुनर्विवाह पूरी गाइड बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।

भारतीय पारिवारिक कानून में तलाक के दो अलग-अलग मार्ग हैं:

तुलनात्मक बिंदुआपसी सहमति से तलाक (Mutual Consent - 13B)विवादित तलाक (Contested Divorce - 13)
प्रकृतिदोनों पक्षों की शांतिपूर्ण रजामंदीएक पक्ष तलाक चाहता है और दूसरा विरोध करता है
शर्तकम से कम 1 वर्ष से पति-पत्नी अलग-अलग रह रहे होंकिसी एक विधिक आधार (क्रूरता, धोखा, परित्याग) को साबित करना होता है
समय सीमा6 से 18 महीने (अत्यंत त्वरित व गरिमापूर्ण)3 से 7 वर्ष (लंबी अदालती जिरह व गवाही)
लागत व मानसिक तनावन्यूनतम खर्च, कोई आरोप-प्रत्यारोप नहींअत्यधिक अदालती खर्च और भारी मानसिक प्रताड़ना

2. विवाह विच्छेद (Divorce) और विवाह शून्यता (Annulment) में क्या अंतर है? {#2-तलाक-बनाम-शून्यता}

  • विवाह विच्छेद (Divorce): इसमें यह माना जाता है कि विवाह कानूनी रूप से वैध था, परंतु बाद में वैचारिक मतभेद या परिस्थितियों के कारण उसे अब समाप्त (Dissolved) किया जा रहा है।
  • विवाह शून्यता / अकृतता (Annulment / Nullity of Marriage - Section 11 & 12):
  • अदालत यह घोषणा करती है कि विवाह कानूनी रूप से कभी हुआ ही नहीं था (Marriage is Void ab initio)
  • आधार: विवाह के समय किसी एक का पूर्व जीवनसाथी जीवित होना (सपिंड संबंध), नपुंसकता (Impotency/Inability to consummate), या मानसिक बीमारी अथवा पहचान छिपाकर जबरन विवाह कराना।
  • शून्यता की डिक्री मिलने पर व्यक्ति को कानूनी रूप से 'तलाकशुदा (Divorcee)' नहीं बल्कि 'अविवाहित (Never Married / Single)' माना जाता है।
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3. आपसी सहमति से तलाक के अनिवार्य चरण और कूलिंग-ऑफ वेवर {#3-आपसी-तलाक-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[पति-पत्नी द्वारा संयुक्त समझौता पत्र MoU तैयार करना] --> B[फैमिली कोर्ट में धारा 13B 1 संयुक्त याचिका दाखिल]

B --> C[First Motion: दोनों के बयान दर्ज व सुलह का प्रयास]

C --> D[6 माह का वैधानिक कूलिंग-ऑफ पीरियड Statutory Cooling-off]

D -->|यदि सुलह न हो सके| E[Second Motion: अंतिम बयान व संयुक्त सहमति की पुष्टि]

E --> F[पारिवारिक न्यायालय द्वारा विवाह विच्छेद की डिक्री पारित होना]

F --> G[कोर्ट रिकॉर्ड से Certified Copy of Divorce Decree प्राप्त करना]

```

  1. समझौता ज्ञापन (MoU / Settlement Agreement): दोनों पक्ष एक विस्तृत अनुबंध बनाते हैं जिसमें तय होता है कि स्थायी गुजारा भत्ता कितना दिया जाएगा, साझा संपत्ति कैसे बंटेगी, और बच्चों से मिलने का अधिकार (Visitation Rights) कैसा रहेगा।
  2. प्रथम प्रस्ताव (First Motion - 13B(1)): दोनों पक्ष शपथ पत्र के साथ अदालत में पेश होते हैं और जज के सामने बयान देते हैं कि वे अपनी मर्जी से अलग हो रहे हैं।
  3. 6 माह का कूलिंग-ऑफ पीरियड (Cooling-off Period): कानून दोनों को दोबारा सोचने हेतु 6 महीने का समय देता है।
  • सर्वोच्च न्यायालय की विशेष छूट (Amardeep Singh v. Harveen Kaur): यदि दोनों पक्ष कई वर्षों से अलग रह रहे हैं और सुलह की कोई गुंजाइश नहीं बची है, तो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार फैमिली कोर्ट 6 माह की इस प्रतीक्षा अवधि को माफ (Waive off) करके 1 सप्ताह में भी अंतिम डिक्री दे सकता है।
  1. द्वितीय प्रस्ताव (Second Motion - 13B(2)): दोनों पक्ष पुनः उपस्थित होकर अंतिम पुष्टि करते हैं।
  2. अंतिम डिक्री: न्यायालय विवाह को कानूनी रूप से विच्छेदित करने का औपचारिक आदेश पारित करता है।

4. स्त्रीधन, स्थायी भरण-पोषण (Alimony) और बच्चे की कस्टडी के नियम {#4-भरण-पोषण-कस्टडी}

  • स्त्रीधन (Stridhan): विवाह के समय महिला को उसके मायके, ससुराल या रिश्तेदारों से मिले सभी गहने, नकदी, उपहार और कपड़े महिला की अनन्य निजी संपत्ति होते हैं। तलाक के समय ससुराल पक्ष को पाई-पाई स्त्रीधन वापस करना कानूनन अनिवार्य है।
  • स्थायी भरण-पोषण (Permanent Alimony): पति की वित्तीय स्थिति, संपत्ति, और पत्नी की आय क्षमता के आधार पर अदालत एकमुश्त (Lump-sum) अथवा मासिक गुजारा भत्ता तय करती है।
  • बच्चे का सर्वोत्तम हित (Best Interest of Child): 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी सामान्यतः मां को मिलती है, परंतु अंतिम निर्णय बच्चे की पढ़ाई, परवरिश और भविष्य के आधार पर होता है। दूसरे माता/पिता को वीकेंड या छुट्टियों में मिलने का विजिटेशन अधिकार अनिवार्य रूप से मिलता है।

5. तलाक डिक्री की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) कैसे निकालें? {#5-प्रमाणित-प्रति-डाउनलोड}

जज द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद:

  1. पारिवारिक न्यायालय के नकल अनुभाग (Copying Agency / Certified Section) में फॉर्म सीए (CA Form) भरकर आवेदन दें।
  2. केस नंबर, कोर्ट का नाम और निर्णय की तारीख दर्ज करें।
  3. नकल शुल्क (₹2 प्रति पेज) का ज्यूडिशियल टिकट लगाएं।
  4. 3 से 5 दिनों में न्यायालय के रीडर और अधिकृत अधिकारी की मुहर-दस्तखत युक्त 'Certified Copy of Judgment & Decree' प्राप्त कर लें। यही मूल कानूनी दस्तावेज है।

6. तलाक के बाद पुनर्विवाह (Second Marriage) और पासपोर्ट अपडेट नियम {#6-पुनर्विवाह-व-पासपोर्ट}

  • 90 दिनों का अपील प्रतिबंध (Section 15 HMA): विवादित तलाक के मामले में डिक्री पारित होने के 90 दिनों तक दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता, क्योंकि विपक्षी पक्ष के पास हाईकोर्ट में अपील करने का 90 दिन का समय होता है। आपसी सहमति (13B) के मामले में कोई अपील नहीं होती, अतः डिक्री जारी होते ही पुनर्विवाह किया जा सकता है।
  • पासपोर्ट व आधार में नाम सुधार: तलाक के बाद महिला यदि अपने पूर्व पति का सरनेम हटाना चाहती है या पासपोर्ट से पति का नाम हटाना चाहती है, तो उसे पासपोर्ट सेवा केंद्र में केवल अपनी तलाक डिक्री की प्रमाणित प्रति (Certified Divorce Decree) प्रस्तुत करनी होती है; किसी अन्य एनओसी की जरूरत नहीं होती।

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  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), पारिवारिक न्यायालय (Family Court) का आधिकारिक आदेश पत्र, न्याय की तुला, कानूनी दस्तावेज और विवाह विच्छेद की प्रमाणित प्रति।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या नोटरी के शपथ पत्र या स्टाम्प पेपर पर लिखा तलाक कानूनी रूप से मान्य है?

A. बिल्कुल नहीं। सर्वोच्च न्यायालय ने बार-बार स्पष्ट किया है कि केवल और केवल सक्षम पारिवारिक न्यायालय (Family Court) द्वारा पारित तलाक की डिक्री ही वैधानिक है। किसी भी नोटरी, वकील, ग्राम पंचायत या समाज के लेटरहेड पर किया गया तलाक शून्य और गैरकानूनी है। ऐसा करने वाले व्यक्ति को कानूनन अभी भी विवाहित माना जाएगा और वह दूसरा विवाह नहीं कर सकता।

Q. यदि शादी को अभी केवल 6 महीने हुए हों, तो क्या तलाक का केस दायर हो सकता है?

A. हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14 के अनुसार सामान्यतः विवाह के 1 वर्ष (12 महीने) बीतने से पहले तलाक की अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती। केवल असाधारण क्रूरता या अत्यधिक दुर्व्यवहार के विशेष मामलों में ही कोर्ट से पूर्व-अनुमति लेकर 1 वर्ष से पहले याचिका स्वीकार की जा सकती है।

Q. क्या विदेशी अदालत (Foreign Court) द्वारा दिया गया तलाक भारत में मान्य होता है?

A. सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 13 के अनुसार, विदेशी अदालत का तलाक भारत में तभी मान्य होता है जब दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से उस विदेशी अदालत के क्षेत्राधिकार को स्वीकार किया हो और दोनों ने मुकदमे में भाग लिया हो। यदि पति ने विदेश जाकर पत्नी की अनुपस्थिति में एकतरफा (Ex-parte Divorce) तलाक लिया है, तो वह भारत में पूरी तरह अमान्य होता है।

Q. क्या विवाह विच्छेद (तलाक की डिक्री) व विवाह शून्यता प्रमाण पत्र को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।