documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

राष्ट्रीय SC/ST हब (NSSH) व GeM वेंडर पंजीकरण: सरकारी खरीद में 4% अनिवार्य कोटा, सब्सिडी व पूरी गाइड

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

एससी/एसटी उद्यमी बनने और सरकारी टेंडरों में 4% कोटे का लाभ लेने के लिए सर्वप्रथम <strong>udyamregistration.gov.in</strong> पर उद्यम एमएसएमई पंजीकरण कराते समय अपनी सामाजिक श्रेणी में 'SC' या 'ST' का चयन करें। इसके बाद राष्ट्रीय एससी-एसटी हब के पोर्टल <strong>scsthub.in</strong> अथवा नजदीकी एनएसआईसी (NSIC) कार्यालय में अपना उद्यम नंबर, सक्षम प्राधिकारी (तहसीलदार/एसडीएम) द्वारा जारी वैध जाति प्रमाण पत्र और बैंक खाता दर्ज कर NSSH वेंडर डेटाबेस में जुड़ें। इसके साथ ही <strong>gem.gov.in</strong> पर सेलर (Seller) के रूप में खाता बनाएं और अपनी प्रोफाइल में 'SC/ST MSME' विकल्प को प्रमाणित करें। पंजीकरण होते ही उद्यमी को सरकारी टेंडरों में अग्रिम धरोहर राशि (EMD / Tender Fee) से 100% छूट, निविदा में प्राथमिकता और उत्पादों की सीधी बिक्री का अधिकार मिल जाता है।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
योजना का नामराष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हब (National SC-ST Hub - NSSH)
नोडल मंत्रालयसूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME), भारत सरकार
कार्यान्वयन एजेंसीराष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लिमिटेड (NSIC - National Small Industries Corporation)
आधिकारिक पोर्टलscsthub.in एवं सरकारी खरीद पोर्टल gem.gov.in
अनिवार्य सरकारी कोटाकेंद्रीय मंत्रालयों व पीएसयू की कुल खरीद में 4% विशेष आरक्षित कोटा
सरकारी शुल्कNSSH वेंडर पंजीकरण: ₹0 (पूर्णतः निःशुल्क) \GeM वेंडर रजिस्ट्रेशन: फ्री
विशेष वित्तीय सब्सिडीटेस्टिंग फीस प्रतिपूर्ति (100%), ट्रेड फेयर व प्रदर्शनी शुल्क प्रतिपूर्ति, बारकोड सब्सिडी
पात्रता स्वामित्व शर्तउद्यम में SC/ST उद्यमी की हिस्सेदारी न्यूनतम 51% (या 100% एकल स्वामित्व) होनी अनिवार्य

📑 विषय सूची (Table of Contents)

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MoMSME) सार्वजनिक खरीद नीति: केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs—जैसे BHEL, ONGC, NTPC, रेलवे, रक्षा आदि) द्वारा की जाने वाली वार्षिक खरीद में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु 'राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH - National SC-ST Hub)' योजना संचालित की जा रही है। सार्वजनिक खरीद नीति (Public Procurement Policy) के अनुसार, प्रत्येक केंद्रीय सरकारी विभाग और पीएसयू के लिए अपनी कुल वार्षिक खरीद का न्यूनतम 25% एमएसएमई से और उसमें से अनिवार्य रूप से 4% केवल एससी/एसटी उद्यमियों से खरीदना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस कोटे का लाभ उठाने के लिए एससी/एसटी उद्यमियों को NSSH और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM - gem.gov.in) पर वेंडर के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य है।

1. राष्ट्रीय SC/ST हब (NSSH) क्या है और इसकी पृष्ठभूमि](#1-क्या-है-nssh)

राष्ट्रीय SC/ST हब (NSSH) व GeM वेंडर पंजीकरण: सरकारी खरीद में 4% अनिवार्य कोटा, सब्सिडी व पूरी गाइड
चित्र: राष्ट्रीय SC/ST हब (NSSH) व GeM वेंडर पंजीकरण: सरकारी खरीद में 4% अनिवार्य कोटा, सब्सिडी व पूरी गाइड बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय एससी-एसटी हब दलित और आदिवासी उद्यमियों को केवल नौकरी खोजने वाले के बजाय 'नौकरी प्रदाता (Job Giver)' बनाने की एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल है:

  • उद्देश्य: एससी/एसटी सूक्ष्म और लघु उद्यमियों (MSEs) को आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में शामिल करना, प्रौद्योगिकी उन्नयन में सहायता देना और सरकारी खरीद में उनकी भागीदारी बढ़ाना।
  • कार्यान्वयन: यह योजना केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम एनएसआईसी (NSIC) के माध्यम से देश भर में संचालित की जाती है।

2. सार्वजनिक खरीद नीति का 4% अनिवार्य कोटा कैसे काम करता है? {#2-अनिवार्य-4-प्रतिशत-कोटा}

भारत सरकार के नियमों के अनुसार देश के सभी 250+ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (जैसे रेलवे, रक्षा, कोल इंडिया, गेल, बीपीसीएल) के लिए खरीद लक्ष्य तय हैं:

  • प्रत्येक पीएसयू को अपने कुल वार्षिक बजट का कम से कम 25% एमएसएमई से खरीदना अनिवार्य है।
  • इस 25% के भीतर, 4% का उप-लक्ष्य (Sub-target) विशेष रूप से SC/ST उद्यमियों के लिए आरक्षित है।
  • टेंडर में मूल्य प्राथमिकता (L1 + 15% Rule): यदि किसी टेंडर में कोई बड़ी कंपनी सबसे कम बोलीदाता (L1) आती है और कोई एससी/एसटी उद्यमी L1+15% के दायरे में है, तो एससी/एसटी उद्यमी को L1 के बराबर भाव पर आकर कम से कम 25% ऑर्डर लेने का पहला कानूनी अधिकार दिया जाता है।
  • टेंडर फीस व ईएमडी से मुक्ति: सरकारी टेंडर फॉर्म की फीस और लाखों रुपये की बयाना धरोहर राशि (Earnest Money Deposit - EMD) जमा करने से 100% छूट मिलती है।
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3. NSSH योजना के तहत मिलने वाली 6 विशेष वित्तीय सब्सिडी {#3-वित्तीय-सब्सिडी}

NSSH पंजीकृत इकाइयों को सरकार सीधे नकद प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रदान करती है:

सब्सिडी का प्रकारसहायता की सीमाक्या लाभ मिलता है?
सरकारी लैब टेस्टिंग फीस (Testing Fee Reimbursement)100% प्रतिपूर्ति (अधिकतम ₹1 लाख)बीआईएस, एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में उत्पादों की गुणवत्ता जांच की पूरी फीस सरकार भरती है।
घरेलू व्यापार मेला व प्रदर्शनी (Domestic Exhibitions)100% स्टाल किराया (अधिकतम ₹3 लाख)राष्ट्रीय स्तर के एक्सपो और व्यापार मेलों में अपने स्टाल लगाने का पूरा किराया माफ।
अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी (International Trade Fairs)100% स्टाल + 100% हवाई टिकटविदेश में व्यापार मेले में जाने का हवाई किराया और स्टाल किराया सरकार देती है।
जीएस1 बारकोड पंजीकरण (Bar Code Assistance)80% सब्सिडीउत्पादों पर अंतरराष्ट्रीय बारकोड लगाने की पंजीकरण फीस में 80% छूट।
क्रेडिट रेटिंग व बैंक प्रोसेसिंग फीस80% प्रतिपूर्तिबैंक से बिजनेस लोन लेने पर लगने वाली प्रोसेसिंग फीस का 80% सरकार वापस करती है।
आईएसओ / बीआईएस प्रमाणन सब्सिडी100% तक प्रतिपूर्तिगुणवत्ता मानक प्रमाणन हासिल करने पर संपूर्ण शुल्क का पुनर्भुगतान।

4. पात्रता मापदंड और 51% शेयरधारिता का नियम {#4-पात्रता-व-स्वामित्व-नियम}

खरीद नियमों के तहत केवल उन्हीं उपक्रमों को 'एससी/एसटी उद्यम' माना जाता है जो निम्नलिखित स्वामित्व शर्तों को पूरा करते हैं:

  1. एकल स्वामित्व (Proprietorship): फर्म का एकमात्र स्वामी (100%) अनिवार्य रूप से अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) का होना चाहिए।
  2. साझेदारी फर्म (Partnership Firm): फर्म में एससी/एसटी साझेदारों की संयुक्त हिस्सेदारी न्यूनतम 51% होनी चाहिए।
  3. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (Pvt Ltd Company): कंपनी के कुल पेड-अप शेयर कैपिटल में कम से कम 51% शेयर एससी/एसटी व्यक्तियों के पास होने चाहिए।
  4. जाति प्रमाण पत्र की अनिवार्यता: सभी हिस्सेदारों का डिजिटल जाति प्रमाण पत्र सक्षम राज्य राजस्व प्राधिकारी (तहसीलदार/एसडीएम) द्वारा जारी होना चाहिए।

5. GeM पोर्टल पर SC/ST सेलर के रूप में पंजीकरण की चरणबद्ध प्रक्रिया {#5-gem-पंजीकरण-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[gem.gov.in पर Seller Registration प्रारंभ करना] --> B[आधार, पैन व चालू बैंक खाता विवरण सत्यापित करना]

B --> C[उद्यम Udyam Registration Number को GeM प्रोफाइल से लिंक करना]

C --> D[सामाजिक श्रेणी Social Category में SC या ST का चयन]

D --> E[राजस्व डिजिटल जाति प्रमाण पत्र अपलोड कर ई-साइन]

E --> F[GeM द्वारा प्रोफ़ाइल में SC/ST MSE Badge सक्रिय होना]

F --> G[केंद्रीय सरकारी विभागों के टेंडरों में 4% आरक्षित खरीद भागीदारी]

```

  1. पोर्टल खोलें: gem.gov.in पर जाएं और 'Sign Up' ➔ 'Seller' पर क्लिक करें।
  2. आधार व पैन सत्यापन: व्यवसाय के अधिकृत प्रतिनिधि का आधार नंबर और व्यवसाय का पैन दर्ज कर ओटीपी से सत्यापित करें।
  3. उद्यम एमएसएमई लिंक करें: अपनी प्रोफाइल में 'My Company' ➔ 'MSME' सेक्शन में जाएं और अपना 19-अंकों का Udyam Number दर्ज करें।
  4. एससी/एसटी श्रेणी चुनें: सोशल कैटेगरी में अपनी जाति वर्ग (SC या ST) पर टिक करें और जाति प्रमाण पत्र संख्या व जारीकर्ता राज्य दर्ज करें।
  5. कैटलॉग तैयार करें: अपने उत्पाद (जैसे स्टेशनरी, फर्नीचर, कंप्यूटर, केबल, यूनिफॉर्म) या सेवाएं (जैसे कैटरिंग, मैनपावर, सुरक्षा, हाउसकीपिंग) GeM कैटलॉग में लिस्ट करें।
  6. टेंडर में भाग लें: GeM पर 'Bids' सेक्शन में जाकर 'Custom Bids' और 'Direct Purchases' में 4% कोटे का लाभ लेकर सीधे सप्लाई ऑर्डर हासिल करें।

6. एमएसएमई संबंध पोर्टल (MSME Sambandh): टेंडर व खरीद ट्रैकिंग {#6-संबंध-पोर्टल-ट्रैकिंग}

केंद्र सरकार पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक विशेष सार्वजनिक निगरानी पोर्टल sambandh.msme.gov.in संचालित करती है:

  • इस पोर्टल पर देश का कोई भी नागरिक लाइव देख सकता है कि किस सरकारी मंत्रालय या किस पीएसयू (जैसे रेलवे या ओएनजीसी) ने चालू वित्तीय वर्ष में एससी/एसटी उद्यमियों से कितना माल खरीदा।
  • यदि कोई पीएसयू 4% का न्यूनतम कोटा पूरा नहीं करता है, तो एमएसएमई मंत्रालय सीधे उस विभाग के सचिव और सीएमडी से जवाब तलब करता है।

Google Discover & Meta Optimization Data

  • Primary Focus Keyword: national sc st hub nssh registration gem portal
  • Secondary Keywords: sc st msme vendor registration public procurement 4 percent, gem sc st seller benefits emd exemption, nssh testing fee reimbursement scheme, msme sambandh portal tracking
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  • Meta Description: दलित व आदिवासी उद्यमियों हेतु National SC-ST Hub (NSSH) व GeM सेलर रजिस्ट्रेशन कैसे करें? सरकारी खरीद में 4% अनिवार्य कोटा, 100% टेस्टिंग सब्सिडी और टेंडर लाभ की पूरी जानकारी।
  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) और GeM का आधिकारिक लोगो, विनिर्माण वर्कशॉप और भारत सरकार के सार्वजनिक खरीद अनुबंध का दृश्य।

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```

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या NSSH से जुड़ने के लिए कोई नया अलग रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है?

A. नहीं। केंद्र सरकार ने पूरी व्यवस्था को उद्यम (Udyam) से जोड़ दिया है। आपका उद्यम पंजीकरण नंबर ही आपकी प्राथमिक NSSH पहचान है। जब आप उद्यम पोर्टल पर अपनी सामाजिक श्रेणी 'SC' या 'ST' दर्ज करते हैं, तो आपका डेटा सीधे NSSH और GeM के एससी-एसटी डेटाबेस में स्वतः सिंक हो जाता है।

Q. क्या एससी/एसटी महिलाओं के लिए कोई अतिरिक्त कोटा है?

A. हाँ। सार्वजनिक खरीद नीति के तहत कुल 25% एमएसएमई खरीद में से 3% कोटा विशेष रूप से महिला उद्यमियों (Women MSEs) के लिए आरक्षित है। यदि कोई महिला अनुसूचित जाति या जनजाति से संबंधित है, तो वह इन दोनों विशेष लाभों और NSSH की विशेष वित्तीय सब्सिडी की संयुक्त हकदार बनती है।

Q. परीक्षण शुल्क (Testing Fee) सब्सिडी का पैसा कितने दिनों में वापस मिलता है?

A. सरकारी प्रयोगशाला (जैसे NABL Lab) से अपने उत्पाद की गुणवत्ता जांच कराकर बिल और रसीद NSSH पोर्टल (<code>scsthub.in</code>) पर अपलोड करने के 30 दिनों के भीतर एनएसआईसी द्वारा पूरी 100% परीक्षण राशि सीधे उद्यमी के बैंक खाते में डीबीटी द्वारा रिफंड कर दी जाती है।

Q. क्या राष्ट्रीय SC/ST हब (NSSH) व GeM वेंडर पंजीकरण को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।