1. पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य विजन और 4 प्रमुख लाभ
भारत की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था में सदियों से अपने हाथों और औजारों के कौशल से जीवनयापन करने वाले पारंपरिक कारीगरों (विश्वकर्माओं) को आधुनिक बाजार की प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने के लिए 17 सितंबर 2023 को पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकर्मियों को गुरु-शिष्य परंपरा के तहत सम्मान देना, उनकी उत्पादकता बढ़ाना और उनके उत्पादों को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखला से जोड़ना है।
इस योजना के चार प्रमुख आधार स्तंभ हैं:
- पहचान एवं सम्मान: प्रत्येक पंजीकृत कारीगर को विशिष्ट 'पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र' और डिजिटल आईडी कार्ड दिया जाता है जो उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिल्पकार का दर्जा देता है।
- कौशल उन्नयन (Skill Upgradation): बुनियादी और उन्नत कौशल प्रशिक्षण के साथ आधुनिक औजारों का उपयोग सिखाया जाता है।
- टूलकिट प्रोत्साहन: आधुनिक औजारों की किट खरीदने हेतु ₹15,000 का अनुदान।
- सस्ता व्यापार ऋण: बिना किसी गारंटर या बंधक के 5% ब्याज दर पर पूंजी सहायता।
2. योजना में शामिल 18 पारंपरिक व्यवसायों की पूरी सूची (Eligible Trades)
केंद्र सरकार ने प्रारंभिक चरण में निम्नलिखित 18 पारंपरिक व्यवसायों में अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले कामगारों को योजना में शामिल किया है:
| क्षेत्र / सामग्री | शिल्पकार वर्ग (Eligible Trades) | कार्य की प्रकृति |
|---|---|---|
| लकड़ी आधारित | बढ़ई (Suthar / Carpenter), नाव निर्माता (Boat Maker) | फर्नीचर, लकड़ी के कृषि यंत्र और नौका निर्माण। |
| लोहा व धातु आधारित | लोहार (Blacksmith), ताला बनाने वाले (Locksmith), हथौड़ा व टूलकिट निर्माता | लोहे के पारंपरिक औजार, ताले, चाबियां और बर्तन निर्माण। |
| पत्थर व शिल्प आधारित | मूर्तिकार (Sculptor / Stone Carver), पत्थर तराशने वाले | मूर्तियां, कलाकृतियां और शिला नक्काशी। |
| चर्म व जूता आधारित | मोची (Cobbler / Leather Worker / Footwear Artisan) | चमड़े के जूते, चप्पल और पारंपरिक साज-सामान। |
| मिट्टी आधारित | कुम्हार (Potter) | मिट्टी के बर्तन, दीये, खिलौने और कुल्हड़ निर्माण। |
| निर्माण आधारित | राजमिस्त्री (Mason) | पारंपरिक भवन, ईंट-गारे का निर्माण कार्य। |
| कपड़ा व परिधान | दर्जी (Tailor), धोबी (Washerman) | कपड़ों की सिलाई, परिधान निर्माण और धुलाई कार्य। |
| व्यक्तिगत व सौंदर्य सेवा | नाई (Barber / Hairdresser) | पारंपरिक बाल कटाई और हजामत सेवा। |
| अन्य पारंपरिक शिल्प | सुनार (Goldsmith), अस्त्रकार (Armourer), टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता, गुड़िया व खिलौना निर्माता, मालाकार (Garland Maker), मछली पकड़ने का जाल बुनने वाले | हस्तशिल्प, आभूषण, सजावटी मालाएं और मछली पकड़ने के उपकरण। |
3. पात्रता मानदंड एवं एक परिवार एक लाभार्थी का नियम
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को निम्नलिखित पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी:
- न्यूनतम आयु: आवेदन की तारीख को कारीगर की आयु कम से कम 18 वर्ष पूर्ण होनी चाहिए।
- पारंपरिक कार्य में संलग्न: आवेदक असंगठित क्षेत्र में हाथों और पारंपरिक औजारों से ऊपर वर्णित 18 व्यवसायों में से किसी एक में सक्रिय रूप से कार्यरत होना चाहिए।
- परिवार में एक लाभार्थी: योजना के सभी वित्तीय लाभ (टूलकिट और लोन) एक राशन कार्ड या परिवार में केवल एक ही सदस्य को मिलेंगे। परिवार में पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल हैं।
- सरकारी सेवा अपात्रता: परिवार का कोई भी सदस्य केंद्र या राज्य सरकार, निगम या स्वायत्त संस्था में सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
- क्रेडिट योजना का बकाया न हो: आवेदक ने पिछले 5 वर्षों में पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi), मुद्रा लोन (PMMY) या पीएमईजीपी (PMEGP) के तहत कोई डिफॉल्ट न किया हो। यदि पहले लिया गया लोन पूरी तरह चुकता हो चुका है, तो वे पात्र हैं।
4. आवश्यक दस्तावेज़ चेकलिस्ट
ऑनलाइन आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है:
- आधार कार्ड: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण हेतु मूल आधार कार्ड।
- मोबाइल नंबर: आधार से जुड़ा सक्रिय मोबाइल नंबर।
- बैंक खाता पासबुक: बैंक खाता संख्या, बैंक शाखा का नाम और IFSC कोड (खाता आधार से सीडेड होना चाहिए)।
- राशन कार्ड: पारिवारिक पहचान सत्यापन हेतु राशन कार्ड (यदि उपलब्ध हो)।
5. CSC सेंटर से बायोमेट्रिक ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया
चूंकि पीएम विश्वकर्मा योजना में बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या आइरिस प्रमाणीकरण अनिवार्य है, इसलिए इसका पंजीकरण नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से निशुल्क किया जाता है:
- कारीगर अपने मूल आधार कार्ड और बैंक पासबुक के साथ नजदीकी सीएससी केंद्र पर जाएं।
- सीएससी संचालक (VLE) आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर लॉगिन करेगा।
- कारीगर का आधार नंबर दर्ज कर बायोमेट्रिक मशीन (फिंगरप्रिंट स्कैनर) पर अंगूठा लगवाकर पहचान सत्यापित की जाएगी।
- कारीगर के 18 व्यवसायों में से उसके विशिष्ट ट्रेड (जैसे दर्जी, बढ़ई या राजमिस्त्री) का चयन किया जाएगा।
- बैंक खाते का विवरण और कौशल अनुभव दर्ज कर आवेदन सबमिट किया जाएगा।
- सबमिट होते ही एक Application Reference Number प्राप्त होगा, जिसकी रसीद सीएससी संचालक से निशुल्क प्राप्त करें।
6. तीन-स्तरीय सत्यापन व्यवस्था (3-Tier Verification Process)
फर्जी आवेदनों को रोकने के लिए सरकार ने त्रिस्तरीय पारदर्शी सत्यापन प्रणाली बनाई है:
- स्तर 1 (ग्राम पंचायत / शहरी निकाय सत्यापन): ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम प्रधान/मुखिया और पंचायत सचिव तथा शहरी क्षेत्र में वार्ड पार्षद और अधिशासी अधिकारी द्वारा यह सत्यापित किया जाता है कि आवेदक वास्तव में उसी पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ा है।
- स्तर 2 (जिला क्रियान्वयन समिति - DII): जिला स्तर पर जिला मजिस्ट्रेट (DM) या महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र (GM DIC) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा आवेदनों की समीक्षा और स्क्रूटनी की जाती है।
- स्तर 3 (राज्य स्क्रीनिंग समिति): राज्य स्तर पर अंतिम अनुमोदन होते ही कारीगर को 'पंजीकृत पीएम विश्वकर्मा' घोषित कर दिया जाता है और डिजिटल प्रमाणपत्र जारी हो जाता है।
7. कौशल प्रशिक्षण और ₹500 प्रतिदिन स्टाइपेंड के नियम
पंजीकरण स्वीकृत होने के बाद कारीगर को कौशल विकास मंत्रालय के मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण केंद्र (MSDE Training Centre) में बुलाया जाता है:
- बेसिक स्किल ट्रेनिंग (5 से 7 दिन - 40 घंटे): आधुनिक मशीनों, सुरक्षा उपकरणों और व्यावसायिक डिजाइनिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
- दैनिक स्टाइपेंड: प्रशिक्षण के दौरान कारीगर की दैनिक मजदूरी का नुकसान न हो, इसलिए सरकार द्वारा ₹500 प्रतिदिन का नकद स्टाइपेंड सीधे उनके बैंक खाते में दिया जाता है।
- एडवांस ट्रेनिंग (वैकल्पिक - 15 दिन): जो कारीगर बड़े पैमाने पर व्यापार बढ़ाना चाहते हैं, वे 15 दिनों का उन्नत प्रशिक्षण भी ले सकते हैं जिसमें भी ₹500 प्रतिदिन स्टाइपेंड मिलता है।
8. ₹15,000 टूलकिट ई-वाउचर (e-RUPI) भुनाने की विधि
बेसिक ट्रेनिंग सफलतापूर्क पूरी होते ही कारीगर के मोबाइल पर ₹15,000 का डिजिटल ई-वाउचर (e-RUPI QR Code / SMS String) भेजा जाता है:
- यह कोई नकद राशि नहीं है, बल्कि एक उद्देश्य-विशिष्ट डिजिटल वाउचर है जो केवल अधिकृत टूलकिट विक्रेताओं पर ही भुनाया जा सकता है।
- कारीगर अपने ट्रेड से संबंधित आधुनिक गुणवत्तापूर्ण टूल्स (जैसे दर्जी के लिए मोटरयुक्त सिलाई मशीन व कटिंग टूल्स, बढ़ई के लिए इलेक्ट्रिक कटर व रंदा, राजमिस्त्री के लिए वाइब्रेटर व लेवलर) खरीद सकते हैं।
9. 5% ब्याज पर ₹3 लाख का कोलैटरल-फ्री लोन कैसे प्राप्त करें?
टूलकिट मिलने के बाद अपने व्यवसाय का विस्तार करने और कच्चा माल खरीदने के लिए दो चरणों में लोन दिया जाता है:
| लोन का चरण | ऋण राशि | चुकौती अवधि (Tenure) | पात्रता की शर्त |
|---|---|---|---|
| प्रथम चरण (Tranche 1) | ₹1,00,000 | 18 महीने | बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद बिना किसी गारंटी के बैंक से स्वीकृत। |
| द्वितीय चरण (Tranche 2) | ₹2,00,000 | 30 महीने | पहले लोन की किस्तों का समय पर भुगतान और डिजिटल लेनदेन अपनाने पर। |
इस लोन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बैंक की सामान्य ब्याज दर लगभग 13% होती है, जिसमें से 8% ब्याज सब्सिडी केंद्र सरकार वहन करती है, जिससे कारीगर को केवल 5% वार्षिक साधारण ब्याज देना होता है। लोन के लिए किसी गारंटी या प्रॉपर्टी बंधक रखने की जरूरत नहीं होती।
10. डिजिटल लेनदेन प्रोत्साहन और हेल्पलाइन
कारीगरों को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने के लिए सरकार प्रति डिजिटल लेनदेन पर ₹1 का प्रोत्साहन (कैशबैक) देती है, जो प्रति माह अधिकतम 100 लेनदेन (₹100) तक सीधे खाते में आता है।
किसी भी सहायता या शिकायत के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-267-7777 या 17923 पर कॉल किया जा सकता है।