1. न्यू टैक्स रिजीम बनाम ओल्ड टैक्स रिजीम: 2025-26 का परिदृश्य
आयकर विभाग ने आयकर अधिनियम की धारा 115BAC के तहत नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को देश की डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था बना दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना, कागजी सबूतों (बीमा प्रीमियम रसीदें, होम लोन सर्टिफिकेट, ट्यूशन फीस रसीद) के झंझट को समाप्त करना और कम कर दरों के साथ जनता के हाथों में अधिक डिस्पोजेबल आय छोड़ना है।
हालिया संशोधनों के तहत सरकार ने नई कर व्यवस्था को और अधिक आकर्षक बनाया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है और टैक्स स्लैब में ₹25,000 तक की अतिरिक्त राहत दी गई है। इसके विपरीत, पुरानी कर व्यवस्था में कई वर्षों से कोई बदलाव नहीं हुआ है।
2. नई कर व्यवस्था (New Regime) की संशोधित स्लैब दरें
वित्त वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए नई कर व्यवस्था की संशोधित स्लैब दरें निम्नलिखित हैं:
| कुल कर योग्य आय (Taxable Income) | आयकर दर (Tax Rate) |
|---|---|
| ₹0 से ₹3,00,000 तक | शून्य (NIL) |
| ₹3,00,001 से ₹7,00,000 तक | 5% |
| ₹7,00,001 से ₹10,00,000 तक | 10% |
| ₹10,00,001 से ₹12,00,000 तक | 15% |
| ₹12,00,001 से ₹15,00,000 तक | 20% |
| ₹15,00,000 से अधिक | 30% |
3. ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन और ₹7.75 लाख तक शून्य टैक्स का गणित
बहुत से करदाता यह समझने में भ्रमित होते हैं कि ₹7.75 लाख तक टैक्स शून्य कैसे होता है:
- मान लीजिए किसी कर्मचारी का वार्षिक ग्रॉस वेतन (Gross Salary) ₹7,75,000 है।
- वेतनभोगियों को धारा 16(ia) के तहत फ्लैट ₹75,000 की मानक कटौती (Standard Deduction) मिलती है।
- कटौती के बाद कर योग्य आय रह जाती है:
₹7,75,000 - ₹75,000 = ₹7,00,000। - स्लैब के अनुसार ₹3 लाख तक टैक्स शून्य और ₹3 से ₹7 लाख पर 5% की दर से ₹20,000 टैक्स बनता है।
- नई कर व्यवस्था में धारा 87A के तहत ₹25,000 तक की पूरी टैक्स छूट (Rebate) मिलती है यदि कर योग्य आय ₹7,00,000 से अधिक न हो।
- अतः आपका शुद्ध देय टैक्स हो जाता है: ₹0 (बिल्कुल शून्य)।
4. पुरानी कर व्यवस्था (Old Regime) की स्लैब दरें और प्रमुख कटौतियां
पुरानी कर व्यवस्था में स्लैब दरें अधिक हैं लेकिन इसमें कई प्रकार की कटौतियों की अनुमति होती है:
- स्लैब दरें: ₹2.5 लाख तक 0%, ₹2.5 से ₹5 लाख तक 5%, ₹5 से ₹10 लाख तक 20%, और ₹10 लाख से ऊपर 30%।
- धारा 80C: ईपीएफ, पीपीएफ, ईएलएसएस म्यूचुअल फंड, जीवन बीमा और 1.5 लाख रुपये तक बच्चों की ट्यूशन फीस।
- धारा 80D: स्वयं और परिवार के स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर ₹25,000 तथा वरिष्ठ नागरिक माता-पिता के लिए ₹50,000 तक छूट।
- धारा 24(b): स्वयं के कब्जे वाले मकान के होम लोन ब्याज पर ₹2,00,000 तक की छूट।
- धारा 10(13A): किराए के मकान में रहने पर वास्तविक चुकाए गए किराए पर मकान किराया भत्ता (HRA) छूट।
5. ब्रेक-ईवन पॉइंट: कितनी छूट होने पर पुरानी व्यवस्था चुननी चाहिए?
वित्तीय गणनाओं के अनुसार विभिन्न आय स्तरों पर ब्रेक-ईवन डिडक्शन (Breakeven Deductions) निम्नलिखित है:
- ₹8 लाख से ₹10 लाख की आय पर: यदि आपके पास कुल कटौतियां (80C + 80D + HRA + Home Loan) ₹2,50,000 से कम हैं, तो नई व्यवस्था में कम टैक्स लगेगा।
- ₹10 लाख से ₹15 लाख की आय पर: यदि आपकी कुल कटौतियां ₹3,75,000 से अधिक हैं, तभी पुरानी व्यवस्था बेहतर है; अन्यथा नई व्यवस्था में अधिक बचत होगी।
- ₹15 लाख से अधिक की आय पर: यदि आपकी कुल कटौतियां ₹4,25,000 से अधिक हैं (जैसे भारी होम लोन ब्याज ₹2 लाख + HRA ₹1.5 लाख + 80C ₹1.5 लाख), तभी पुरानी व्यवस्था फायदेमंद रहती है।
6. विभिन्न आय स्तरों पर टैक्स तुलना (₹8 लाख, ₹10 लाख, ₹15 लाख, ₹20 लाख)
| सकल वेतन (Gross Salary) | न्यू रिजीम टैक्स (Std Ded ₹75k) | ओल्ड रिजीम टैक्स (सामान्य छूट ₹2.5L) | ओल्ड रिजीम टैक्स (भारी छूट ₹4.25L) |
|---|---|---|---|
| ₹7,75,000 | ₹0 | ₹28,600 | ₹0 |
| ₹10,00,000 | ₹44,200 | ₹75,400 | ₹41,600 |
| ₹12,50,000 | ₹80,600 | ₹1,27,400 | ₹85,800 |
| ₹15,00,000 | ₹1,30,000 | ₹1,95,000 | ₹1,43,000 |
| ₹20,00,000 | ₹2,73,000 | ₹3,51,000 | ₹2,99,000 |
7. होम लोन (Section 24b) और एचआरए (HRA) वालों के लिए क्या बेहतर है?
यदि कोई कर्मचारी किराए के घर में रहता है और भारी किराया चुकाता है (उदा. मेट्रो शहर में ₹30,000 प्रति माह), अथवा जिसने नया घर खरीदा है और सालाना ₹2 लाख से अधिक होम लोन ब्याज भर रहा है, तो ऐसे कर्मचारियों के लिए पुरानी कर व्यवस्था अभी भी अधिक कर बचत दे सकती है। लेकिन यदि आपका अपना मकान है या कोई लोन नहीं चल रहा, तो बिना सोचे नई कर व्यवस्था अपनाना समझदारी है।
8. वरिष्ठ नागरिकों (Senior Citizens) और पेंशनर्स के लिए विशेष नियम
पेंशनभोगियों को भी नई कर व्यवस्था में ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। पारिवारिक पेंशन (Family Pension) पाने वाले आश्रितों के लिए धारा 57(iia) के तहत छूट को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। 60 वर्ष से अधिक के वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक ब्याज छूट (धारा 80TTB - ₹50,000) केवल पुरानी व्यवस्था में मिलती है।
9. आईटीआर में न्यू और ओल्ड रिजीम कैसे चुनें? (Form 10-IEA नियम)
- सैलरीड प्रोफेशनल्स (ITR-1 / ITR-2): वेतनभोगियों को कोई अतिरिक्त फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है। आप प्रत्येक वर्ष जुलाई में अपना आईटीआर दाखिल करते समय न्यू या ओल्ड रिजीम का चयन कर सकते हैं।
- कारोबारी या पेशेवर (ITR-3 / ITR-4): जिन करदाताओं की व्यावसायिक आय (Business/Professional Income) है, उन्हें पुरानी व्यवस्था चुनने के लिए नियत तिथि से पहले Form 10-IEA भरना अनिवार्य होता है। वे जीवनकाल में केवल एक बार ही पुरानी व्यवस्था से बाहर आ सकते हैं।
10. वित्तीय विशेषज्ञ की अंतिम सलाह
यदि आपकी आय ₹12 लाख तक है और आप केवल 80C के ₹1.5 लाख में निवेश करते हैं, तो आँख बंद करके नई कर व्यवस्था चुनें। इससे न केवल आपका टैक्स कम होगा, बल्कि आपको टैक्स बचाने के लिए बेकार की बीमा पॉलिसियों या लॉक्ड-इन योजनाओं में जबरन पैसे फंसाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उस पैसे को आप बिना किसी लॉक-इन के उच्च-रिटर्न वाले म्यूचुअल फंड्स या इक्विटी में निवेश कर सकते हैं।