documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

डॉक्टर मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन (NMC / State Medical Council): MBBS के बाद स्थायी पंजीकरण व NMR पूरी गाइड

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

एमबीबीएस पूरा होने के बाद डॉक्टर सबसे पहले अपनी 1 वर्ष की अनिवार्य रोटेटिंग इंटर्नशिप हेतु राज्य मेडिकल काउंसिल से 'अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration)' प्राप्त करता है। 1 वर्ष की इंटर्नशिप सफलतापूर्वक पूरी होने पर अस्पताल से 'CRMI Completion Certificate' प्राप्त होता है। इसके बाद डॉक्टर NMC के केंद्रीयकृत <strong>NMR पोर्टल</strong> अथवा संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल (State Medical Council) की वेबसाइट पर 'Permanent Registration' हेतु ऑनलाइन आवेदन करता है। आवेदन में 10वीं मार्कशीट, 12वीं मार्कशीट, एमबीबीएस के सभी 4 प्रोफेशनल्स की अंकतालिकाएं, डिग्री/प्रोविजनल सर्टिफिकेट, इंटर्नशिप कंप्लीशन और कॉलेज मान्यता पत्र अपलोड किए जाते हैं। काउंसिल द्वारा दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के बाद डिजिटल हस्ताक्षरित <strong>Permanent Medical Registration Certificate</strong> और राष्ट्रीय UID जारी कर दिया जाता है।

पैरामीटरआधिकारिक विवरण
दस्तावेज़ का नामस्थायी चिकित्सा पंजीकरण प्रमाण पत्र (Permanent Medical Registration Certificate)
सर्वोच्च नियामक संस्थाराष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC)
राज्य स्तरीय प्राधिकारीसंबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल (जैसे Delhi Medical Council, UP Medical Council आदि)
आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टलnmc.org.in एवं नेशनल मेडिकल रजिस्टर पोर्टल (NMR Portal)
प्राथमिक शैक्षणिक अर्हतामान्यता प्राप्त संस्थान से 4.5 वर्षीय MBBS डिग्री + 12 माह की CRMI इंटर्नशिप
विशिष्ट पहचान कोडNMC UID (Unique Medical Identification Number) - आजीवन मान्य राष्ट्रीय कोड
पंजीकरण के चरण1. अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration - इंटर्नशिप हेतु) \2. स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration)
सरकारी पंजीकरण शुल्क₹5,000 से ₹15,000 (राज्य मेडिकल काउंसिल नियमावली अनुसार)
विदेशी स्नातकों (FMG) हेतुविदेश से पढ़ाई करने वालों हेतु FMGE (स्क्रीनिंग टेस्ट) / NExT परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) स्वास्थ्य मंत्रालय वैधानिक निर्देश: भारत या विदेश के किसी भी मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस (MBBS) अथवा समकक्ष चिकित्सा डिग्री उत्तीर्ण करने और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप (CRMI) पूरी करने के बाद कोई भी डॉक्टर बिना आधिकारिक पंजीकरण के एलोपैथिक चिकित्सा का अभ्यास या क्लीनिक नहीं चला सकता। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम 2019 (NMC Act) के अनुसार, प्रत्येक योग्य चिकित्सक का नाम संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल (State Medical Council - SMC) और राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (National Medical Register - NMR) में पंजीकृत होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। NMC पोर्टल पर पंजीकृत प्रत्येक डॉक्टर को एक विशिष्ट यूनिक डॉक्टर पहचान संख्या (UID - Unique Identifier) आवंटित की जाती है। बिना वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन के दवाएं लिखना या इलाज करना गैरकानूनी 'नीम-हकीम (Quackery)' माना जाता है, जिसमें 1 वर्ष तक का कारावास और ₹5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।

1. NMC और राज्य मेडिकल काउंसिल (SMC) की कानूनी भूमिका {#1-कानूनी-ढांचा}

डॉक्टर मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन (NMC / State Medical Council): MBBS के बाद स्थायी पंजीकरण व NMR पूरी गाइड
चित्र: डॉक्टर मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन (NMC / State Medical Council): MBBS के बाद स्थायी पंजीकरण व NMR पूरी गाइड बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।
  • पूर्ववर्ती मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) को भंग करके वर्ष 2020 में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) की स्थापना की गई।
  • दोहरा पंजीकरण ढांचा:
  • डॉक्टर प्राथमिक रूप से उस राज्य की मेडिकल काउंसिल (जैसे DMC, DCI, TCMC, UPMC) में पंजीकृत होता है जहां वह प्रैक्टिस करना चाहता है।
  • राज्य काउंसिल का डेटा सीधे केंद्रीय National Medical Register (NMR) में सिंक हो जाता है।
  • एनएमआर में नाम दर्ज होते ही डॉक्टर को पूरे भारत में कहीं भी दवाएं लिखने और चिकित्सा सेवा देने का अखिल भारतीय अधिकार मिल जाता है।

2. अनंतिम (Provisional) बनाम स्थायी (Permanent) मेडिकल रजिस्ट्रेशन {#2-प्रारूप-के-प्रकार}

चिकित्सा जगत में दो चरणों में पंजीकरण होता है:

पंजीकरण का प्रकारकब लिया जाता है?प्रयोजनवैधता
अनंतिम पंजीकरण (Provisional Registration)एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के तुरंत बादमेडिकल कॉलेज या अस्पताल में 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप (CRMI) करने हेतुकेवल 1 वर्ष (इंटर्नशिप अवधि तक)
स्थायी पंजीकरण (Permanent Registration)1 वर्ष की इंटर्नशिप सफलता से पूरी होने और डिग्री मिलने के बादस्वतंत्र डॉक्टर के रूप में अस्पताल में नौकरी करने या निजी क्लीनिक चलाने हेतु5 वर्ष (इसके बाद प्रति 5 वर्ष में रिन्यूअल अनिवार्य)
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3. अनिवार्य दस्तावेज चेकलिस्ट (Document Checklist) {#3-आवश्यक-दस्तावेज}

स्थायी पंजीकरण हेतु राज्य मेडिकल काउंसिल में जमा करने हेतु आवश्यक कागजात:

  1. 10वीं बोर्ड प्रमाण पत्र एवं अंकतालिका (सटीक जन्मतिथि सत्यापन हेतु)।
  2. 12वीं (10+2) विज्ञान (PCB) की अंकतालिका।
  3. NEET-UG का स्कोरकार्ड एवं आवंटन पत्र (Allotment Letter)।
  4. एमबीबीएस के सभी 4 प्रोफेशनल्स की मूल अंकतालिकाएं (All MBBS Marksheets)।
  5. एमबीबीएस डिग्री प्रमाण पत्र अथवा विश्वविद्यालय द्वारा जारी प्रोविजनल पास सर्टिफिकेट।
  6. अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप पूर्णता प्रमाण पत्र (CRMI Completion Certificate)।
  7. मूल अनंतिम पंजीकरण प्रमाण पत्र (Original Provisional Certificate)।
  8. कॉलेज डीन/प्रिंसिपल द्वारा जारी चरित्र प्रमाण पत्र (Character & Conduct Certificate)।
  9. आवेदक का आधार कार्ड, पैन कार्ड और 4 रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो (एप्रन में)।

4. राज्य मेडिकल काउंसिल व NMR पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया {#4-ऑनलाइन-आवेदन-प्रक्रिया}

```mermaid

graph TD

A[NMC के NMR पोर्टल या राज्य मेडिकल काउंसिल पोर्टल पर लॉगिन] --> B[MBBS अंकतालिकाएं, प्रोविजनल व इंटर्नशिप कंप्लीशन अपलोड]

B --> C[संबंधित राज्य काउंसिल हेतु निर्धारित पंजीकरण शुल्क का भुगतान]

C --> D[काउंसिल द्वारा मूल विश्वविद्यालय से डिग्री की प्रामाणिकता जांच]

D --> E[काउंसिल कार्यालय में व्यक्तिगत उपस्थिति व मूल दस्तावेज स्क्रूटनी]

E --> F[राज्य रजिस्टर में नाम दर्ज व Permanent Registration No. जारी]

F --> G[NMC केंद्रीय डेटाबेस द्वारा आजीवन यूनिक UID कोड आवंटन]

```

  1. पोर्टल पर जाएं: NMC के आधिकारिक National Medical Register (NMR) पोर्टल अथवा अपने राज्य की मेडिकल काउंसिल (जैसे delhimedicalcouncil.org या upsmc.org) पर जाएं।
  2. खाता बनाएं: डॉक्टर अपना नाम, ईमेल, मोबाइल और आधार संख्या दर्ज कर प्रोफाइल बनाए।
  3. शैक्षणिक विवरण भरें: नीट रोल नंबर, मेडिकल कॉलेज का नाम, विश्वविद्यालय का नाम, और एमबीबीएस पास करने का वर्ष भरें।
  4. दस्तावेज अपलोड करें: सभी मार्कशीट और इंटर्नशिप प्रमाण पत्र की स्पष्ट रंगीन स्कैन कॉपी अपलोड करें।
  5. शुल्क भुगतान: नेट बैंकिंग या कार्ड से निर्धारित सरकारी शुल्क (लगभग ₹5,000 से ₹10,000) का ऑनलाइन भुगतान करें।
  6. भौतिक सत्यापन (Physical Verification): राज्य काउंसिल द्वारा एक निश्चित तारीख दी जाती है जिस दिन डॉक्टर को अपने सभी मूल दस्तावेजों के साथ काउंसिल कार्यालय में उपस्थित होना होता है।
  7. प्रमाण पत्र जारी: सत्यापन के 7 से 15 दिनों में क्यूआर कोड युक्त डिजिटल परमानेंट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो जाता है।

5. विदेशी मेडिकल स्नातकों (Foreign Medical Graduates - FMG) के नियम {#5-fmg-विशेष-नियम}

रूस, जॉर्जिया, फिलीपींस, कजाकिस्तान या यूक्रेन से एमबीबीएस करने वाले भारतीय छात्रों हेतु विशेष शर्तें हैं:

  • स्क्रीनिंग टेस्ट (FMGE / NExT): नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) में न्यूनतम 50% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • भारत में इंटर्नशिप: एफएमजीई पास करने के बाद राज्य मेडिकल काउंसिल से 1 या 2 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप भारत के मान्यता प्राप्त अस्पताल से पूरी करनी होती है।
  • इसके बाद ही विदेशी मेडिकल स्नातकों को भारतीय छात्रों के समान स्थायी पंजीकरण प्रमाण पत्र दिया जाता है।

6. निजी क्लीनिक (Private Clinic) संचालन व प्रिस्क्रिप्शन लेखन के नियम {#6-क्लीनिक-व-प्रिस्क्रिप्शन}

स्थायी मेडिकल रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद डॉक्टर को निम्नलिखित कानूनी नियमों का पालन करना होता है:

  • प्रिस्क्रिप्शन पर रजिस्ट्रेशन नंबर: डॉक्टर द्वारा जारी किए जाने वाले प्रत्येक पर्चे (Prescription Slip) के शीर्ष पर उसका नाम, डिग्री (MBBS) और स्टेट मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट छपा होना अनिवार्य है।
  • जेनेरिक दवाएं लिखना: NMC की आचार संहिता के अनुसार डॉक्टरों को दवाओं के ब्रांडेड नाम के साथ-साथ उनके जेनेरिक नाम (Generic Salt Names) स्पष्ट और सुपाठ्य अक्षरों (Capital Letters) में लिखना अनिवार्य है।
  • क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट (CEA Registration): यदि डॉक्टर अपना निजी क्लीनिक या नर्सिंग होम खोलता है, तो उसे जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय से 'क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट लाइसेंस' भी अलग से लेना होता है।

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  • Discover Recommended Image: 1200x675px (16:9), राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) का आधिकारिक प्रतीक, स्टेथोस्कोप, एप्रन पहने युवा डॉक्टर और स्थायी मेडिकल पंजीकरण प्रमाण पत्र।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या एक राज्य की मेडिकल काउंसिल का डॉक्टर दूसरे राज्य में प्रैक्टिस कर सकता है?

A. हाँ, लेकिन नियमों के अनुसार। यदि कोई डॉक्टर किसी दूसरे राज्य में स्थायी रूप से शिफ्ट हो रहा है या वहां क्लीनिक खोलना चाहता है, तो उसे अपनी पुरानी काउंसिल से 'अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC)' लेकर नए राज्य की मेडिकल काउंसिल में 'रेसिप्रोकल रजिस्ट्रेशन (Reciprocal / Additional Registration)' कराना अनिवार्य होता है।

Q. क्या मेडिकल रजिस्ट्रेशन को हर 5 साल में रिन्यू कराना पड़ता है?

A. हाँ। NMC के नए नियमों के तहत चिकित्सा ज्ञान को अद्यतन रखने के लिए प्रत्येक डॉक्टर को प्रति 5 वर्ष में अपना पंजीकरण नवीनीकृत (Renewal) कराना अनिवार्य है। इसके लिए डॉक्टर को सतत चिकित्सा शिक्षा (Continuing Medical Education - CME) के निर्धारित क्रेडिट घंटे (Credit Hours) अर्जित करने होते हैं।

Q. यदि कोई डॉक्टर बिना रजिस्ट्रेशन के प्रैक्टिस करे तो क्या कानूनी कार्रवाई होती है?

A. NMC अधिनियम 2019 की धारा 34 और 54 के अनुसार, बिना वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन के एलोपैथी का अभ्यास करना गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है। पुलिस ऐसे व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर क्लीनिक सील कर सकती है और अदालत उसे 1 साल तक की जेल और ₹5 लाख तक का जुर्माना लगा सकती है।

Q. क्या डॉक्टर मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन (NMC / State Medical Council) को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।