documents ⏱️ 5 मिनट पढ़ें 📅 16 सितंबर 2026

वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं? नए नियम, जरूरी दस्तावेज़ और उत्तराधिकार प्रक्रिया

अमित कुमार
अमित कुमार
वरिष्ठ विधिक एवं लोक सेवा सलाहकार

विधि स्नातक (LL.B.) और प्रशासनिक नियमों (DoPT, नागरिक अधिकार चार्टर, राजस्व संहिता) के विशेषज्ञ। विगत 8 वर्षों से ई-डिस्ट्रिक्ट सेवाओं, सिविल प्रमाण पत्रों, जाति, आय, निवास, और भूमि रिकॉर्ड प्रक्रियाओं पर प्रामाणिक तथ्य-जांच व विधिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।

⚡ त्वरित उत्तर (Quick Answer)

वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate / Varisan Praman Patra) राज्य सरकार के राजस्व विभाग (तहसीलदार / उप-जिला मजिस्ट्रेट) द्वारा जारी किया जाने वाला वह वैधानिक दस्तावेज़ है, जो किसी मृत व्यक्ति के वैध कानूनी उत्तराधिकारियों (Class-1 Legal Heirs जैसे पत्नी, पुत्र, पुत्री और माता) की आधिकारिक सूची प्रमाणित करता है। इसे राज्य के ई-डिस्ट्रिक्ट या राजस्व पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करके बनवाया जा सकता है। इसके लिए मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी जीवित उत्तराधिकारियों के आधार कार्ड और नोटरीकृत वंशावली शपथ पत्र (Family Tree Affidavit) आवश्यक होते हैं। लेखपाल व राजस्व निरीक्षक की स्थलीय जांच के बाद 15 से 30 दिनों में यह जारी हो जाता है। इसका मुख्य उपयोग पैतृक भूमि के नामांतरण (Mutation), बैंक जमा राशि पाने और पारिवारिक पेंशन के लिए होता है।

जानकारीविवरण
दस्तावेज़ का नामवारिसान / कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)
जारीकर्ता प्राधिकरणतहसीलदार / उप-जिला मजिस्ट्रेट (SDM) / राजस्व न्यायालय
प्रासंगिक कानूनहिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 / राज्य भू-राजस्व संहिता
मुख्य उद्देश्यपैतृक भूमि नामांतरण (दाखिल-खारिज), बैंक क्लेम, पारिवारिक पेंशन
आवेदन का माध्यमऑनलाइन (e-District / राजस्व पोर्टल) एवं ऑफलाइन (तहसील)
सरकारी शुल्क₹15 से ₹50 (पोर्टल) \नोटरी शपथ पत्र शुल्क अलग
निर्धारित समय सीमा15 से 30 कार्यदिवस
प्रमाण पत्र की वैधतास्थायी / अपरिवर्तनीय (जब तक कोई नया वारिस कानूनी दावा न करे)
डिजिटल डाउनलोडउपलब्ध (डिजिटल हस्ताक्षर सहित / राजस्व पोर्टल)

1. वारिसान प्रमाण पत्र क्या है?

वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं? नए नियम, जरूरी दस्तावेज़ और उत्तराधिकार प्रक्रिया
चित्र: वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) ऑनलाइन कैसे बनवाएं? नए नियम, जरूरी दस्तावेज़ और उत्तराधिकार प्रक्रिया बनवाने की आधिकारिक सरकारी प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की वैधानिक गाइड।

परिवार के मुखिया या संपत्ति स्वामी की मृत्यु के पश्चात उनकी चल और अचल संपत्तियों पर उनके वैध वारिसों का हक स्थापित करने वाला सबसे मुख्य दस्तावेज वारिसान प्रमाण पत्र है।

  • प्रमुख उपयोग:
  • पैतृक कृषि भूमि या मकान के खतौनी में नाम चढ़वाने (दाखिल-खारिज / नामांतरण) के लिए।
  • मृतक के बैंक खाते, एफडी (FD) या डाकघर बचत योजना के पैसों का क्लेम पाने के लिए।
  • मृतक की कार/बाइक के आरसी (RC) को वारिस के नाम ट्रांसफर कराने हेतु।
  • मृतक सरकारी कर्मचारी की ग्रेच्युटी, पीएफ और आश्रित नौकरी के दावों में।

2. तहसीलदार वारिसान बनाम कोर्ट का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र

अक्सर लोग इन दोनों में भ्रमित हो जाते हैं:

  • राजस्व वारिसान प्रमाण पत्र (Revenue Legal Heir Certificate): यह तहसीलदार/एसडीएम द्वारा जारी होता है। यह सामान्यतः अचल संपत्ति (जमीन, मकान) के नामांतरण, पारिवारिक पेंशन और सामान्य बैंक क्लेम के लिए पर्याप्त होता है। यह 15-30 दिन में आसानी से बन जाता है।
  • सिविल कोर्ट का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate): भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के तहत यदि मृतक के शेयरों (Shares), म्यूचुअल फंड्स या बैंक खातों में भारी रकम जमा हो और कोई नॉमिनी न हो, या परिवार में संपत्ति विवाद हो, तो बैंक केवल सिविल कोर्ट द्वारा जारी सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगता है।
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3. क्लास-1 कानूनी उत्तराधिकारी (Class-1 Heirs)

हिन्दू उत्तराधिकार कानून के अनुसार किसी पुरुष की मृत्यु होने पर उसकी संपत्ति पर सबसे पहला हक क्लास-1 वारिसों का होता है, जिनमें शामिल हैं:

  • मृतक की पत्नी (Widow).
  • मृतक के सभी पुत्र (Sons) और पुत्रियां (Daughters - विवाहित व अविवाहित दोनों).
  • मृतक की माता (Mother).

(नोट: पिता क्लास-2 उत्तराधिकारी में आते हैं, क्लास-1 में नहीं। पुत्रियों को 2005 के संशोधन के बाद बेटों के बिल्कुल बराबर पैतृक अधिकार प्राप्त है।)

4. जरूरी दस्तावेज़ों की चेकलिस्ट

दस्तावेज़विवरणमूल/कॉपीअनिवार्यता
मृतक का मूल मृत्यु प्रमाण पत्ररजिस्ट्रार द्वारा जारी डिजिटल डेथ सर्टिफिकेटस्व-प्रमाणित कॉपीअनिवार्य
सभी जीवित वारिसों के आधार कार्डपत्नी, बच्चों और माता का आधारफोटोकॉपीअनिवार्य
वंशावली शपथ पत्र (Family Tree Affidavit)₹10 या ₹100 के स्टांप पर नोटरीकृत हलफनामामूल कॉपीअनिवार्य
मृतक का संपत्ति साक्ष्यखतौनी, मकान की रजिस्ट्री या बैंक पासबुकफोटोकॉपीअनिवार्य
स्थानीय पार्षद / ग्राम प्रधान प्रमाण पत्रस्थानीय स्तर पर परिवार के सभी सदस्यों का सत्यापनमूल पत्रअनुशंसित
एनओसी (NOC - यदि कोई वारिस हक छोड़े)यदि कोई भाई/बहन अपना हक किसी एक को सौंपेनोटरीकृत हलफनामाऐच्छिक

5. वंशावली शपथ पत्र (Family Tree Affidavit)

वारिसान का सबसे मुख्य हिस्सा नोटरी हलफनामा होता है, जिसमें स्पष्ट लिखा होता है:

  • मृतक की मृत्यु की सही तिथि।
  • मृतक के सभी कानूनी वारिसों के नाम, उम्र और मृतक से संबंध।
  • यह स्पष्ट घोषणा कि "उल्लिखित व्यक्तियों के अलावा मृतक का अन्य कोई वैध वारिस जीवित नहीं है, और यदि यह असत्य पाया जाए तो आवेदक कानूनी दंड का भागीदार होगा।"

6. ऑनलाइन आवेदन की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

  1. राज्य ई-डिस्ट्रिक्ट / राजस्व पोर्टल पर जाएं: (जैसे UP में edistrict.up.gov.in या राजस्व परिषद पोर्टल vaad.up.nic.in, बिहार में serviceonline.bihar.gov.in).
  2. सिटिजन लॉगिन: अपनी आईडी से लॉगिन करें।
  3. 'वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate)' सेवा चुनें।
  4. मृतक का विवरण भरें: मृतक का नाम, मृत्यु की तारीख, मृत्यु प्रमाण पत्र संख्या और स्थायी पता।
  5. वारिसों की सूची दर्ज करें: 'Add Heir' पर क्लिक करके प्रत्येक वारिस का नाम, आधार संख्या, आयु और संबंध दर्ज करें।
  6. दस्तावेज़ अपलोड करें: मृत्यु प्रमाण पत्र, वंशावली शपथ पत्र और सभी वारिसों के पहचान पत्र अपलोड करें।
  7. ऑनलाइन फीस जमा करें: ₹15 से ₹30 का शुल्क अदा करें और रसीद सुरक्षित रखें।

7. ऑफलाइन आवेदन और लेखपाल जांच प्रक्रिया

  • फॉर्म सबमिट होते ही यह हल्का लेखपाल (पटवारी) को भेजा जाता है।
  • लेखपाल गांव में जाकर परिवार रजिस्टर और पड़ोसियों से गवाही लेता है कि क्या वास्तव में कोई दूसरा वारिस तो नहीं छूटा है।
  • लेखपाल अपनी जांच आख्या में पूरी वंशावली बनाकर कानूनगो और तहसीलदार को रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

8. आवेदन की स्थिति (Status) ट्रैक कैसे करें?

पोर्टल के 'आवेदन की स्थिति' टैब में अपना Application Number डालकर ट्रैक करें। सामान्यतः 20 कार्यदिवसों में वारिसान प्रमाण पत्र स्वीकृत हो जाता है।

9. डिजिटल वारिसान प्रमाण पत्र डाउनलोड

स्वीकृत होने के बाद पोर्टल से डिजिटल हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र PDF डाउनलोड करें। इस पर तहसीलदार के डिजिटल हस्ताक्षर और बारकोड होता है, जो सभी बैंकों और रजिस्ट्री दफ्तरों में 100% मान्य है।

10. जमीन के दाखिल-खारिज (Mutation) में उपयोग

वारिसान प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद राजस्व पोर्टल पर 'फौती नामांतरण (Inheritance Mutation)' का ऑनलाइन फॉर्म भरा जाता है, जिससे मृतक के स्थान पर खतौनी में सभी वारिसों के नाम दर्ज कर दिए जाते हैं।

11. विवाद या आपत्ति (Objection) होने पर क्या करें?

यदि किसी अन्य व्यक्ति ने खुद को फर्जी वारिस बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है, तो तहसीलदार मामले को 'विवादित नामांतरण' में दर्ज करके दोनों पक्षों को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी करता है।

13. आधिकारिक स्रोत (Official Sources)

  • विधि और न्याय मंत्रालय (विधायी विभाग): legislative.gov.in
  • राष्ट्रीय सरकारी सेवा पोर्टल: services.india.gov.in

Information Last Verified: 16 सितंबर 2026

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. क्या विवाहित बेटियों का नाम भी वारिसान प्रमाण पत्र में दर्ज होना जरूरी है?

A. हाँ, 100% अनिवार्य है! हिन्दू उत्तराधिकार कानून के अनुसार पिता की पैतृक संपत्ति में बेटियों का भी बेटों के समान कानूनी अधिकार है। बेटियों का नाम छुपाना कानूनी अपराध है।

Q. यदि कोई वारिस विदेश में रहता हो, तो क्या उसका भी आधार लगेगा?

A. हाँ, विदेश में रहने वाले वारिस का पासपोर्ट/आधार और उसकी सहमति (NOC) ईमेल या अधिकृत हलफनामे के माध्यम से संलग्न की जा सकती है।

Q. वारिसान प्रमाण पत्र बनने में औसतन कितना समय लगता है?

A. सामान्यतः बिना किसी विवाद के 15 से 25 कार्यदिवसों के भीतर वारिसान प्रमाण पत्र जारी हो जाता है।

Q. क्या वारिसान प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) कैसे बनवाएं? नए नियम, जरूरी दस्तावेज़ और उत्तराधिकार को डिजिलॉकर (DigiLocker) में रखना कानूनी रूप से मान्य है?

A. हाँ, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2016 के नियम 9A के तहत डिजिलॉकर में उपलब्ध डिजिटल दस्तावेज को मूल भौतिक कागजात के बराबर 100% कानूनी मान्यता प्राप्त है।

Q. इस प्रमाण पत्र / कार्ड की आधिकारिक वैधता (Validity) कितने समय की होती है?

A. अधिकांश सरकारी पहचान और सिविल प्रमाण पत्र (जैसे आधार, जन्म, जाति, निवास) आजीवन (Lifetime) मान्य होते हैं, जबकि आय प्रमाण पत्र सामान्यतः 3 वर्ष और ईडब्ल्यूएस 1 वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होता है।